जीवनसाथी -3 भाग -29

जीवनसाथी -3 भाग -29

जीवनसाथी by aparna

विज्ञान विषय में कोई भी बात बिना लॉजिक के नहीं की गयी है, इसलिए मुझे विज्ञान से प्यार है… इसमें एक बात कही जाती है जड़त्व की (moment of inertia) यानि आप और आपका शरीर, मन, आसपास की प्रकृति परिवेश हर एक वस्तु स्थित या गतिशील है..
और वो सतत अपनी अवस्था में बनी रहना चाहती है, उसकी स्थिति में बदलाव का वो हमेशा विरोध करती है…!
कुछ ऐसा ही मेरे साथ भी हो रहा है…
पिछले दिनों पढाई की, खूब पढाई की.. !
पिछले महीने भर से शायद ढंग से खाया भी नहीं, सोई नहीं और इसलिए अब भी दिमाग में बस सिलेबस ही घूम रहा…
कहानी कहाँ से कैसे शुरू करूँ ये समझ नहीं आ रहा..? लेकिन एक सच ये भी है कि कहानियाँ लिखना अब जीवन का एक हिस्सा हो गया है।  जैसे आप लोग कहते  हैं ना, आपकी कहानियाँ पढ़ कर सुकून मिलता है, ज़िन्दगी और रोज़मर्रा का हिस्सा है आपकी कहानियाँ, बस वैसा ही कुछ मेरे साथ है…

मेरी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा हो चुकी है मेरी लेखनी..।
कहानी के पार्ट्स लिखना, फिर उस पर आपकी समीक्षाओ की प्रतीक्षा करना बहुत अच्छा लगता है..। रिप्लाई भले ना लिख पाऊँ पर आप सब की समीक्षाएं पढ़ती और मुस्कुराती हूँ…
आपकी समीक्षाओ को पढ़ कर लगता है लिखना सुफल हो गया…।

अब गप्पे बंद करती हूँ और कहानी पर आती हूँ..

अब तक आप पढ़ चुके हैं..

अपने डैडा से झूठ बोल कर किसी बहाने से कली भारत पहुँच गयी हैं, उसके साथ आयी सरु को काका की ख़राब तबियत के बारे में पता चलने से उसे वहाँ जाना पड़ा… कली बचपन से लंदन में पली बढ़ी है, इसलिए उसके लिए शौर्य से बातचीत करना उसे आपने घर में पनाह देना कोई अचम्भे की बात नहीं है…।
वहीँ शौर्य की फ़िज़ूलख़र्ची को रोकने समर ने उसके सारे एकाउंट्स ब्लॉक करवा दिए हैं… ।

उसके फ्लैट में रिनोवेशन होने और हर्ष और बाक़ी लोगो के बाहर चले जाने के कारण इस अरबपति राजकुमार के पास रहने को कोई जगह नहीं बची है..
इत्तेफाक से शौर्य का कली से मिलना होता है, और वो उसके साथ रहने को मजबूर हो जाता है..।

अब चलते हैं कहानी की ओर…

******

वो बच्चे गाते गुनगुनाते आगे बढ़ गए और शौर्य वापस उस कैफे की टेबल पर चला आया… उसकी वापसी तक में मीरा अपना खाना समाप्त कर के शौर्य का ही रास्ता देख रही थीं.. शौर्य के पीछे ही कली भी वहां चली आई….

” तुम्हें भी क्या हो जाता है ना कभी-कभी? उन भिखारी बच्चों के साथ जाकर गाना गा रहे हो? यह सब तुम्हें सूट नहीं करता..? तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हें अपना क्लास मेंटेन करना चाहिए..?”

मीरा ने सवाल कर दिया, शौर्य शायद उसके इस कथन के लिए तैयार नहीं था.. लेकिन कली को मीरा की ये बात पसंद नहीं आयी…

“क्लास… कौन निर्धारित करता है कि हमारी क्लास क्या है ? किसे दिखाना है कि हमारी क्लास क्या है? मुझे यह लगता है कि जो हमसे सच में प्यार करते हैं, उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमने महंगे और ब्रांडेड कपड़े पहने हैं या सस्ते कपड़े पहने हैं?
हम रईसों से बातचीत किया करते हैं या गरीब बच्चों से? इन सारी बातों का उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता जो दिल से हमें चाहते हैं।
और जो, हम से सिर्फ औपचारिकता के लिए जुड़े हैं, उन्हें कुछ भी दिखा कर हम इम्प्रेस नहीं कर सकते। क्योंकि वह हर बात में हम से प्रतिस्पर्धा ही करेंगे, अगर आज हमने महंगे ब्रांड के कपड़े पहन कर उन्हें प्रभावित करने की कोशिश की तो, वह इस बात से प्रभावित नहीं होंगे उल्टा वह हमें दिखाने के लिए हमसे ज्यादा महंगे ब्रांड पहनेंगे, और अपनी क्लास हमसे ऊंची दिखाने की कोशिश करेंगे ।
मुझे तो कभी भी यह प्रतिस्पर्धा समझ में ही नहीं आती है। आखिर हम किस दिशा में दौड़ रहे हैं? हमारी जिंदगी का लक्ष्य क्या है? क्यों हम दूसरों को दिखाने के लिए अपने चेहरे पर एक मुस्कान बनाए रखते हैं?
क्यों हम इतना फेक हो जाते हैं कि हम अपनी पहचान सिर्फ कुछ ब्रांड्स में ही बांध कर रख देते हैं?
हम क्यों इस जीवन को खुलकर नहीं जीते?
खुलकर क्यों नहीं मुस्कुरा सकते? उन बच्चों को शायद आप ने ध्यान से नहीं देखा। प्रिंस का गाना सुनकर उनके चेहरे पर जो 100 वाट के बल्ब की चमक आई थी ना, वह चमक किसी भी महंगे ब्रांड और क्लास से कहीं ऊपर थी।
एक सच्ची और अनमोल नेमत है वह ।
आज प्रिन्स ने उनके लिए जो किया, उनके चेहरे पर जो सच्ची खुशी लाई है ना, उसकी तुलना किसी क्लास से नहीं की जा सकती।
वैसे मैं भी आप से यह सब क्यों बता रही हूं… ?

मेरे डैडा बहुत कम बोलते हैं, क्योंकि उनका कहना है बोलो उसके सामने जो तुम्हारी बात को बिना जज किए सुन और समझ सके।
और जो सामने बैठकर तुम्हारी बातें सुनते हुए हर एक बात पर उसे काटने का पॉइंट दिमाग में सोचने लगे ना, ऐसे इंसान के सामने कुछ भी बोलना व्यर्थ है।
और मुझे पता है इस वक्त आप अपने दिमाग में मेरी बातों को काटने के पॉइंट्स ही तैयार कर रही हो, और मैं जैसे ही चुप होंगी आप बोलना शुरू कर दोगी.. !”

कली ने जो भी कहा वो सुनकर शौर्य के चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान चली आई और उसकी मुस्कान देखकर मीरा के रोम-रोम में आग लग गई।
उसने दांत पीसते हुए कली की तरफ देखा और शुरू हो गई..

” तुम्हें भी देखा था मैंने, बड़ा रुचि लेकर इनका साथ दे रही थी वहां गाने में।
लेकिन याद रखना, आगे जिंदगी भर मुझे ही इसका साथ देना है।
आज अगर उसने तुम्हारे साथ बैठकर कॉफी पी ली तो यह मत सोचो कि तुम इसके लिए कुछ खास हो गई हो..!”

” किसी के भी कुछ भी सोचने से क्या फर्क पड़ जाता है। मेरा तो यही मानना है कि यह सारी चीजें जो हो रही है यह सब इस प्रकृति के अधीन है।
हम सब एक दूसरे से मिलते हैं, यह सब हमारे प्रारब्ध होता है। यानी यह सारी बातें पहले से तय होती है। बस आज के दिन मेरी किस्मत में आपसे मिलना लिखा था, और मैं मिल ली, और वैसे अब मुझे जाना चाहिए…!”

काली ने शौर्य की तरफ देखा और अपनी जगह पर खड़ी हो गई…

” तुम चलोगे मेरे साथ या तुम्हें थोड़ा और रुकना है..?”

कली ने शौर्य से पूछा और शौर्य मुस्कुरा कर खड़ा हो गया…

” हां मुझे भी कुछ काम से जाना है, तो मैं भी निकलता हूं!”

उसने मीरा की तरफ देखा और वहां से निकल गया। मीरा पैर पटकती अपनी जगह पर खड़ी हो गई…

उन लोगों के जाने के बाद वेटर मीरा के पास आया और उसकी टेबल साफ करने लगा।
मीरा ने दांत पीसते हुए उससे बिल पूछ लिया..

” आपका बिल तो वह मैडम पे कर चुकी हैं..!”

वेटर  ने जाते हुए शौर्य और कली की तरफ इशारा कर दिया। मीरा ने सोचा नहीं था कि जाते-जाते भी उसकी  महंगी सी डिश का पेमेंट कली देकर जाएगी।

मीरा जैसी स्वार्थी और ओछे स्वभाव की लड़की के लिए किसी और की एक कप कॉफी का बिल पे करना भी बहुत बड़ी बात थी…
और उसे आधा गुस्सा तो इसी बात का था कि कही उसे पैसे ना खर्चने पड़ जाये..
उसने राहत की साँस ली और अपना बैग उठाये वहाँ से निकल गयी..

शौर्य और कली वहाँ से निकल कर आगे बढ़ गए..
कली का आज दिल्ली घूमने का मन था, उसने दिल्ली के श्री राम मंदिर के बारे में सुन रखा था और उसका बहुत मन था मंदिर जाकर दर्शन करने का।

वही शौर्य को बैंक जाना था। वह बैंक जाकर अपने अकाउंट के बारे में पता करना चाहता था। क्योंकि अब उसके पास कोई चारा नहीं रह गया था। ना उसके पास पैसे थे और ना उसके कार्ड काम कर रहे थे। वह ऐसे ही आखिर कब तक कली के फ्लैट पर पड़ा रह सकता था। इसलिए वह चाहता था कि बैंक जाकर वह अपने अकाउंट्स देख ले..।

” तुम्हें कहां जाना है? तुम कह रहे थे कुछ काम है?”

“हाँ काम तो है, बस बैंक ही जाना है.. !”

“ओके तो ऐसा करते हैं मैं अपने काम से चली जाती हूं तुम अपने काम से निकल जाओ..!”

” तुम्हें कहां जाना है?”

शौर्य अब इतना तो समझ गया था कि कली के लिए हिंदुस्तान और दिल्ली एकदम नया था और जैसा कली का स्वभाव था, उसे बड़ी आसानी से कोई भी बुद्धू बना सकता था इसलिए उसकी चिंता हो गई..

“मैंने इण्डिया के मंदिरो के बारे में बहुत कुछ सुन रखा है, और जब से आयी हूँ किसी मंदिर में नहीं जा पायी हूँ… यहाँ के श्रीराम मंदिर जाने का बहुत मन है.. बस सोच रही मंदिर दर्शन कर लूँ !”

“तुम्हे पता है मंदिर है किस तरफ ?”

“ऊहूं…. लेकिन ढूंढ़ लुंगी !”

“चलो मैं भी साथ चलता हूँ !”

कली ने आश्चर्य से शौर्य की तरफ देखा… “रियली ?”

“हम्म !”

वो दोनों वहाँ से निकल गए..

“लोकल बस में चले ?” कली ने पलट कर शौर्य से पूछा..

“क्यों तुम्हे दिल्ली मेट्रो में नहीं चलना ?”

“लंदन में वैसी ट्रेन्स में बहुत ट्रेवल किया है। लेकिन लोकल बस की बात ही अलग है !” कली हल्का सा मुस्कुरा कर आगे बढ़ गयी..

दोनों स्टॉप पर पहुंचे और कुछ देर में ही विवेक विहार की बस पकड़ ली..
बस में कुछ लड़कियाँ कॉलेज के लिए भी सवार थीं… ये सारी ही महाराष्ट्रियन थीं और पढाई करने दिल्ली आयी हुई थीं…
एक साथ लोकल बस में चढ़ते खूबसूरत से जोड़े को देख वो सारी किलक उठी.. एक दूसरे को आँखों ही आँखों में इशारा कर वो सब मुस्कुराने लगी और मराठी में बात करने लगी..

” अरे बघा, किती सुंदर जोडी आहे!”
(अरे देख ना कितनी सुंदर जोड़ी है )

“होय, दोन्ही हिरो हिरोईनसारखे दिसतात, नाही का?”
(दोनों हीरो हीरोइन लग रहे हैं ना ?)

“एवढ्या सुंदर जोडप्याची मुलं किती सुंदर असतील?”(इतनी सुंदर जोड़ी के बच्चे कितने सुंदर होंगे ना )

शौर्य को थोड़ी बहुत मराठी आती थीं… उसे उन लड़कियों की बात समझ में आ रही थीं…

“जर मला हा माणूस आधी सापडला असता तर मी त्याला नक्कीच प्रपोज केलं असतं!”
(अगर ये लड़का मुझे पहले मिल गया होता तो मैं पक्का इसे प्रोपोज़ कर देती )”

उसकी बात सुन बाक़ी लड़कियां हंसने लगी लेकिन शौर्य के चेहरे का रंग बदल गया..उसने धीरे से अपना गला साफ़ किया और उनमे से एक लड़की से अपना सवाल पूछ लिया..

“विवेक विहार किती थांब्यांनंतर येणार?”
(विवेक विहार कितने स्टॉप के बाद आएगा ?”.

“हरे देवा, तुला मराठी येतं का?” (हरे देवा तुम्हे मराठी आती है ?)

“हम्म थोडी सी !”

वो लड़कियां जीभ काट कर रह गयी… और शौर्य हल्का सा मुस्कुरा उठा..
कली ने एक नजर शौर्य पर डाली और वापस खिड़की से बाहर के नज़ारे देखने लगी…

कुछ देर में ही उन लड़कियों का स्टॉप आ गया और वो हंसती खिलखिलाती शौर्य को हाथ हिला कर विदा देती वहाँ से चली गयी.. कुछ देर में ही शौर्य और कली का भी स्टॉप आ गया और वो दोनों भी उतर गए..

मंदिर तक पहुंचने के बाद शौर्य बाहर सीढ़ियों पर ही रुक गया… कली ने सीढ़ियां चढ़ते हुए उसे मुड़ कर देखा….

“क्या हुआ ? अंदर नहीं आओगे ?”

शौर्य ने ना में गर्दन हिला दी…

“इनसे मेरी कुछ खास बनती नहीं !”

कली ने उसे देखा और हल्के से मुस्कुरा उठी..

” उनकी मर्जी के बिना एक पत्ता भी नहीं हिलता, फिर तुम और मैं किस खेत की मूली है?
यह जो तुम कह रहे हो ना कि उनसे बनती नहीं, यह भी उन्हीं की मर्जी से कह पा रहे हो ।
यह जो तुम यहां बाहर इतनी शान से खड़े हो ना, यह भी उन्हीं की मर्जी है। और एक बात याद रखना, अगर वह चाहेंगे तो तुम्हें किसी भी बहाने से अंदर बुला ही लेंगे …. समझे ?”..

कली पलट कर अंदर चली गयी…

कली भगवान की मूर्ति के सामने हाथ जोड़े खड़ी थी..वो अपलक उस मूर्ति को निहार रही थीं.. ऐसा नहीं था कि वह लंदन में कभी भगवान के मंदिर नहीं गई। लेकिन अपने देश की मिट्टी में बने मंदिर में खड़े होकर उसे एक अलग ही अनुभूति हो रही थी।
सामने स्थित मूर्ति पर टकटकी लगाए देखते हुए उसे सिहरन सी हो गई थी।
ऐसा लगा जैसे कोई शक्ति वहां उपस्थित है। उसने पूरी श्रद्धा से आंखें मूंद ली।
उसी समय तेज बादलों का गड़गड़ाना उसे सुनाई दिया। और एकदम से तेज बारिश होने लगी।

सीढियों पर खड़ा शौर्य खुद को बचाने के लिए अपने सिर पर हाथ रखे हुए तेजी से सीढ़ियां चढ़कर मंदिर के अंदर चला आया… ।

वह जैसे ही अंदर की तरफ आया, उसी वक्त बादलों के शोर के कारण कली ने भी आंखें खोली और पीछे मुड़ गयी..
सीढ़ियों के ठीक ऊपर मंदिर के प्रवेश द्वार पर शौर्य खड़ा था।
    जहां से शौर्य को भी भगवान की मूर्ति साफ साफ नजर आ रही थी।
कली उसे देखकर धीमे से मुस्कुरा उठी। वो धीरे-धीरे कदमों से उसके पास पहुंच गई ,और उसका हाथ पकड़ कर उसे खींचकर मूर्ति के सामने ले आई…।

” देखा सिर्फ अपनी मर्जी से तुम बाहर खड़े भी नहीं रह पाए। आखिर उन्होंने तुम्हें अंदर बुला ही लिया और जब यहां तक आ गए हो तो, उनके सम्मान में हाथ जोड़ लो..!”

“जानता हूं कि तुम फिल्मी हो, लेकिन हर एक बात को तुम इस ढंग से घुमाकर फिल्मी कर देती हो ना कि क्या कहूं। तुम्हारा पता नहीं क्या होगा..?”

शौर्य ने भगवान के सामने हाथ नहीं जोड़ें। उसने मूर्ति की तरफ देखा और कुछ देर देखते रहने के बाद जाने क्यों वह उस मूर्ति की ताब सहन नहीं कर पाया।
उसका सिर स्वयं झुक गया लेकिन तब भी उसने हाथ नहीं जोड़ें।
वह धीरे से मुड़कर मंदिर के एक किनारे बनी रेलिंग की तरफ बढ़ गया।
कली ने भगवान की तरफ देखकर वापस अपने हाथ जोड़ लिये…

” इसे माफ कर देना भगवान जी, थोड़ा सा उल्लू है यह लड़का। लेकिन दिल का साफ है ।
और मुझे पूरा यकीन है कि एक न एक दिन ये यही आपके सामने हाथ जरूर जोड़ेगा !”

कली ने झुक कर एक बार फिर प्रणाम किया और पंडित जी से प्रसाद लेकर शौर्य के पास चली आई ।
शौर्य के सामने उसने हाथ बढ़ा दिया..

” प्रसाद ना सही खाने की चीज समझ कर ही खा लो..!”

“हम्म ! प्रसाद से मुझे कोई दिक्कत नहीं है!”

अपने हाथ से थोड़ा सा हलवा उठा कर शौर्य ने अपने मुंह में डाल दिया..

वह दोनों ही लोग मंदिर के आसपास घूमते हुए मंदिर परिसर में ही कुछ देर के लिए बैठ गए..

” एक बात पूछूं तुमसे?”

कली ने शौर्य को देखकर पूछा और शौर्य ने हामी भर दी..

” वह जो बस में लड़कियां मिली थी, वह क्या बात कर रही थी..?!”

“कुछ खास नहीं !”

“बताओ ना प्लीज़ ! तुम्हें तो बड़ा इंटरेस्ट आ रहा था उनकी बातें सुनने में, और बड़ा मुस्कुरा मुस्कुरा के उनकी बातों का जवाब दिया जा रहा था। कोई पसंद आ गई थी क्या..?”

” तुम बात बात पर शादी लाल क्यों बन जाती हो? कभी मेरी सैलरी पूछने लगती हो? कभी मेरे लिए लड़कियां ढूंढने लगती हो? बात क्या है?
या फिर कुछ ज्यादा ही हैंडसम एलिजिबल बैचलर लगता हूं मैं..?”

” ओ हो हो, श्री श्री खुद के मुंह मियां मिट्ठू जी…। लड़कियां सिर्फ शक्ल सूरत पर फिदा नहीं होती और भी बहुत कुछ चाहिए होता है, शादी के लिए..!”

” जैसे..?  तुम्ही बता दो, क्या-क्या चाहिए होता है?”

“बड़ा शौक है तुम्हे शादी करने का ? वैसे तुम्हारी गर्लफ्रेंड से मिल भी चुकी हूँ… एक बात बोलूं ?”
.
“बोल ही दो… बिना कहे मानोगी थोड़े ना ?”

“तुम चाहे जिस से शादी कर लेना पर उस छछूंदर से शादी मत करना… जाने क्यों वो मुझे सही नहीं लगी !”

“और ये बताइये कि, मैं आपकी मर्ज़ी से शादी क्यों करूँगा भला ?”

“क्यूंकि… ” बोलते बोलते अचानक कली को कुछ नहीं सूझा और वो झेंप कर चुप हो गयी..

“एक बात पूछूं ? “कली के लिए चुप बैठना बेहद कठिन काम था..

“पूछ ही लो !”

“तुम्हारे घर पर सब कैसे हैं ? मतलब तुम्हारी माँ है ?”

“हाँ क्यों नहीं होंगी ? हर किसी की माँ होती है !”..

“मेरी नहीं है !”

कली चुप हो गयी, और उस वक्त उसकी वो चुप्पी शौर्य का कलेजा चीर गयी.. उससे कुछ कहा नहीं गया..
दोनों थोड़ी देर एकदम शांत बैठे रह गए..
एक बार फिर बारिश शुरू हो गयी…
शौर्य तेज़ी से उठा और आपने आप को बारिश से बचाने के लिए कोई जगह ढूंढने लगा। वह भाग कर एक शेड के नीचे जाकर खड़ा हो गया।

लेकिन कली वहीं बैठी भीगती रही! उसने आंखें बंद करके अपने चेहरे को ऊपर उठा दिया.. उसके चेहरे पर गिरती बूंदों को महसूस करती कली धीरे से मुस्कुरा उठी…

उससे कुछ दूर पर खड़ा शौर्य उसे भीग़ते देखता रहा और फिर खुद भी उसके पास चला आया…

“क्यों भीग रही हो ? बीमार पड़ जाओगी ?”

“पता है..?  वैसे तो मैं उदास नहीं होती, लेकिन कभी जब मॉम की याद आने लगती है ना, तब उस वक्त मॉम ऐसे ही अपने प्यार को बूंदों के रूप में बरसा कर मुझे गले से लगा लेती है।
मैं बारिश से बचने के लिए कभी शेड में नहीं जाती हूं…!”

शौर्य कली की मुस्कान के पीछे छिपे उसके दर्द को महसूस कर पा रहा था..
उसने धीरे से अपना हाथ कली की तरफ बढ़ा दिया और कली ने उसकी हथेली थाम ली।
वह दोनों ही बारिश में भीगते हुए गुनगुनाते हुए वहां से बाहर निकल गये….

.


aparna….

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Abhishek Kishor
Abhishek Kishor
1 year ago

दोनों एक दूसरे की परवाह कर रहे हैं, कली इंडिया में खुश है, वह जैसे जीना चाहती थी जी रही है, शौर्य भी उसके साथ अपनी परेशानी भूल जा रही है, दोनों को साथ साथ पढ़ना अच्छा लग रहा है, दोनों एक दूसरे का सच जब जानें तब लेकिन उनके सफर में रोचकता बनी हुई है, नाईस पार्ट दीदी…💐👍🙏

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बेहद खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻❤️
कलि ने सच ही कहा ईश्वर की मर्ज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता ओर देखो ईश्वर की मर्ज़ी से शौर्य को मंदिर में जाना ही पड़ा।
बारिश की बूंदो में माँ को महसूस करना 😊❤️सच में लाजवाब लिखा आपने 👏👏👏।
बहुत सुन्दर भाग 👌🏻👌🏻👌🏻❤️🙏🏼🙏🏼🙏🏼❤️❤️❤️।