अपराजिता -113

अपराजिता -113

अपराजिता by aparna…

अनिर्वान अपने ऑफिस में बैठा अखंड के केस की पुरानी फाइल खोलकर पढ़ रहा था, वह पूरी तरह फाइल में डूबा हुआ था कि नेहा उसके केबिन में चली आई…

” एक्सक्यूज मी,मिस्टर एसीपी लगता है, आप बिजी हैं?”

” जी मुझे भी ऐसा ही लग रहा है कि मैं बिजी हूं! वैसे आप यहां कैसे?”

” आपको बताया तो था कि मैं इस जगह पर इंटर्नशिप करने आई हूं, और आपने ही मुझे अपनी कॉलोनी में अपने घर के ऊपर कमरा दिलवा दिया था…
अब पत्रकार तो वहीं होगा ना, जहां केस होंगे। और केस कहां मिलेंगे मुझे, यहां आपके ऑफिस में?

” उसके लिए आप हमारे लोकल थाने में भी जा सकती हैं। मेरे ऑफिस में आने की जरूरत नहीं है।”

” सर मुझे इतना पता है कि लोकल थाने में लोकल चिड़िमार, पॉकेट मार, छुटपुट गुंडे आते हैं। लेकिन सारे बड़े-बड़े केसेस और उनकी फाइल्स तो असिस्टेंट कमिश्नर आफ पुलिस के ऑफिस में ही होती है ना। और फिर आपकी टीम ही तो सारा काम करती है। मतलब पूरे शहर में शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने का काम तो आपके ही कंधों पर है ना। इसलिए मुझे लगा आपके ही ऑफिस में मुझे केसेस मिल सकते हैं। जिन पर मैं अपना प्रोजेक्ट तैयार कर सकती हूं।”

” ठीक है, फिर बैठिए। मैं पराग को बुला देता हूं। आप उसके साथ जाकर कुछ फाइल्स देख लीजिएगा।”

” हां सर वह तो मैं देख लूंगी, फिलहाल क्या मैं आपसे पूछ सकती हूं कि आप क्या पढ़ रहे हैं?”

” एक पुरानी केस फाइल है।”

” सॉल्वड केस या अनसोल्वड केस?”

“सुलझ तो गया था, लेकिन इसकी कुछ कड़ियां अनसोल्वड ही रह गई थी। बस उन्हें सुलझाने की कोशिश में हूं।”

” क्यों केस आपसे जुड़ा हुआ था? मतलब क्या आप जानते थे इसे?”

” नहीं जानता तो नहीं था।”

” तो फिर आपके इतने पर्सनल इंटरेस्ट की वजह?”

” वजह है उस बेगुनाह लड़के की आंखें। पता नहीं क्यों लेकिन इस केस में जिस लड़के का नाम आया था, उसे देखकर पहली बार में ही महसूस हो गया था कि यह लड़का गुनाहगार नहीं है। इसने यह गुनाह नहीं किया, और बस इसीलिए मैं उस वक्त जी जान से जुट गया था कि इसे बेगुनाह साबित कर सकूं।
हालांकि उसकी बेगुनाही साबित करने के पहले मैंने अपने तरीके से छानबीन भी कर ली थी, और जब मुझे पूरा यकीन हो गया कि इस लड़के ने यह गुनाह नहीं किया है, और तभी मैंने उसे बचाया ।”

“तो फिर जब आपने एक बेगुनाह को बचा ही लिया फिर केस अधूरा कैसे रह गया?”

” अधूरा रह गया नेहा जी, क्योंकि उस लड़के ने गुनाह नहीं किया यह तो मैंने साबित कर लिया था। लेकिन उन गुनाहों के पीछे छुपे गुनहगार को मैं नहीं पकड़ पाया था। और आज इस केस के 5-6 साल बीत जाने के बाद भी मेरे मन में यह फांस बराबर चुभती रहती है। इस केस से मुझे जानबूझकर दूर करने की कोशिश की गई थी। बावजूद मैंने अखंड को निर्दोष साबित कर ही लिया था। और इस वक्त मेरा ट्रांसफर कर दिया गया, एक सुदूर गांव तहसील में, और उसके बाद मुझे एक जगह से दूसरी जगह पटकना जारी रखा गया।
    घूम फिर के मैं यहां पहुंच गया और यहां मेरी मुलाकात वापस इसी लड़के से हो गई। कहते हैं ना पृथ्वी गोल है, तो बस इस गोल के एक सिरे से दूसरे सिरे तक पहुंच कर मैं वापस इस केस पर आ गया हूं। और अब ऐसा लग रहा है कि इस केस के तार में सुलझा ही लूंगा।”

” यह तो बहुत अच्छी बात है, अगर आप चाहे तो मुझे केस के बारे में थोड़ी जानकारी दे सकते हैं। हो सकता है मैं भी आपकी कोई मदद कर दूं।”

” हां फिलहाल तो मैं इस केस से जुड़े एक बहुत इंपॉर्टेंट शख्स से मिलने जा रहा हूं, तो तुम चाहो तो मेरे साथ चल सकती हो। वैसे भी वह एक लेडी है, जिससे मुझे मिलना है। हो सकता है मुझे अकेले मिलने आने में वह सहज न महसूस करती हो।”

“आप तो ऐसे हैं कि आपसे हर कोई, हर वक्त मिलना चाहेगी।”
नेहा ने यह बात इतने धीमे से कही कि अनिर्वान ठीक से सुन नहीं पाया।

” क्या कुछ बोला आपने?”

” नहीं नहीं मैं बस यही कह रही हूं कि हां मैं आपके साथ चलूंगी।”

अनिर्वान ने हामी भरी और उस केस की फाइल में से कुछ पेपर्स निकाल कर उसने अपने साथ लिए और नेहा को साथ लेकर निकल गया।

दोनों अपनी गाड़ी में जा रहे थे।

अनिर्वान ने ड्राइवर को भी साथ नहीं लिया था।

” क्या बात है एसीपी साहब आज आपका ड्राइवर भी साथ नहीं है?”

” हां यह जरा कॉन्फिडेंशियल मामला है। हम जिससे मिलने जा रहे हैं, वह कोई ऐसा वैसा शख्स नहीं है। उनकी प्राइवेसी बहुत मैटर करती है।”

” कौन है वह?”

” शहर की बहुत प्रसिद्ध जन दल पार्टी के उभरते नेता की धर्मपत्नी को तो आप जानती होंगी।”

“उनके घर जा रहे हैं?”

” नहीं सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने पहले ही फोन पर कह दिया था कि वह अपने घर पर मुझे नहीं मिल सकेंगी। उनके पति का पार्टी कार्यालय उनके घर पर ही है, जिसके कारण हर वक्त कार्यकर्ताओं की भीड़ उनके घर और कार्यालय में मौजूद रहती है। ऐसे में मेरा वहां पहुंचना लोगों की नजरों में आ जाएगा और फिलहाल वह सबसे छिपकर मुझसे मिलना चाहती है। लेकिन हां इसके बाद मुझे एक डॉक्टर से भी मिलने जाना है। वह एक लेडी डॉक्टर है, और मैं सोच रहा हूं यहां से निकलने के बाद उन्हें फोन करके उनकी डिस्पेंसरी में ही मिल लें।”

अनिर्वान की यह बात सुनकर नेहा सोच में डूब गई।

” सर मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूं।”

” हां कहे”

” उस लेडी डॉक्टर का भी संबंध इसी केस से है?”

” हां! मैंने ऐसा सुना है कि उस लेडी डॉक्टर पर किसी लड़के ने जोर जबरदस्ती करने की कोशिश की थी। उसने केस भी किया था, और यही वह केस था, जिससे अखंड सिंह परिहार निर्दोष स्थापित हुआ था।”

” मैं कुछ समझी नहीं।”

” मेडिकल की एक लड़की पर अखंड सिंह परिहार ने जबरदस्ती करने की कोशिश की। ऐसा अखंड पर उस लड़की ने आरोप लगाया था। लेकिन बाद में उस लड़की के पास से या उस कमरे से ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे अखंड को दोषी ठहराया जा सके, और उसे निर्दोष पाकर बरी कर दिया था। यह लड़की उसके बाद से बिल्कुल ही गायब हो गई थी । उसने अपनी पढ़ाई की और अब नौकरी में आ गई है। हो सकता है उसकी शादी भी हो चुकी हो।

” सर मैं एक बात कहना चाहती हूं, हो सकता है आपको गलत लगे, अगर आपको बुरी लगती है तो मुझे माफ कर दीजिएगा लेकिन जैसे आपने उन नेताजी की पत्नी की प्राइवेसी का ख्याल रखा, वैसे ही आपको इस लेडी डॉक्टर की भी प्राइवेसी का ख्याल रखना चाहिए।

   देखिए वह जब पढ़ रही थी, उस वक्त किसी ने उनकी इज्जत पर हमला किया था। जरूरी नहीं कि यह बात उन्होंने अपने पति से कहीं हो, और अगर उन्होंने नहीं कही होगी और आप एकदम से उनके घर या डिस्पेंसरी पर उनसे पूछताछ करने पहुंच जाते हैं, तो हो सकता है कि उनके पति के लिए यह एक शॉकिंग खबर हो।”

नेहा की बात सुनकर अनिर्वान सोच में डूब गया।

” हां कह तो तुम सही रही हो। तो क्या करना चाहिए मुझे?”

” मेरे ख्याल से आप नेताजी की पत्नी से जहां मिलने जा रही हैं, वही उस लेडी डॉक्टर को भी बुला लीजिए। हम चार लोग रहेंगे तो किसी को देखकर शक भी नहीं होगा। वैसे भी आप यूनिफॉर्म में नहीं है, तो दूर से देखने वाला यह नहीं समझेगा कि आप पुलिस में है। और आपके साथ तीन औरतें रहेंगी तो कुछ गलत बातें भी नहीं बनेंगी।”

” हां ऐसा किया जा सकता है।”

” क्या आपके पास उस लेडी डॉक्टर का नंबर है?”

” हां नंबर तो मैंने पता करवा लिया था, मेरे पास है। वैसे एक बात कहूं तुम इतनी बेवकूफ हो नहीं जितनी मैंने शुरुआत में सोचा था।”

” एक्सक्यूज मी! मैं बिल्कुल भी बेवकूफ नहीं हूं। इन फैक्ट मैं बहुत इंटेलिजेंट हूं। और मेरी इंटेलिजेंस का फायदा आपको वक्त वक्त पर मिलता ही रहता है।”

” करेक्ट मैं भी यही कहने जा रहा था कि तुम्हारी इंटेलिजेंस का फायदा मुझे मिलता रहता है।”

अनिर्वान ने मुस्कुरा कर अपना फोन उठाया और रेशम का नंबर डायल करने लगा। रेशम उस वक्त अपने घर पर ही मौजूद थी। अथर्व को आए हुए एक पूरा दिन बीत चुका था। दोनों दिन भर इधर-उधर घूमते रहे थे। अगले दिन सुबह रेशम की देर से नींद खुली थी। गुड्डी आकर घर का काम करने लगी थी। रेशम ने सुबह बगीचे में पानी डाला और रसोई में आकर अथर्व की पसंद का नाश्ता बनाने लगी।

दोनों ने साथ-साथ नाश्ता किया और गुड्डी के जाने के बाद रेशम कुछ गमले लाकर पेंट करने बैठ गई। अथर्व भी उसकी मदद करने लगा। दोनों ढेर सारी बातें भी करते जा रहे थे। इसी बीच रेशम का फोन बजने लगा।

एक अनजान नंबर से फोन आते देखकर रेशम सोच में पड़ गई ।अथर्व के इशारे पर रेशम ने फोन उठा लिया।

फोन उठाते ही दूसरी तरफ से अनिर्वान की गहरी सी आवाज रेशम के कानों में गूंज गई।

“हेलो मैं एसीपी अनिर्वान भारद्वाज बोल रहा हूं ।।”

पुलिस का परिचय सुनते ही रेशम के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी.. उसके माथे पर पसीने की बुँदे छलक आयी.. उसने माथे पर छलक आया पसीना पोंछा और अथर्व की तरफ धीमे से देखने लगी

क्रमशः

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Vinod Kumar Bansal
Vinod Kumar Bansal
1 year ago

बहुत सुन्दर रचना

Kirti Saxena
Kirti Saxena
1 year ago

बहुत ही सुंदर भाग है 👌👌

Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🥰🥰👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻🥰👌🏻👌🏻👌🏻

Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️

Manu verma
Manu verma
2 years ago

5-6 साल बीत गए इस बात को बीते, समय अपनी गति से चल रहा, थम गई तो उन दो लोगों की ज़िन्दगी, जो बिना कसूर के सजा भुगत रहे, अखंड अपनी ज़िन्दगी में आगे ना बढ़ सका और रेशम दो कदम आगे तो बड़ी पर सुकून नहीं मिला।
सच में दुनिया गोल है उसका एक और उदहारण मिल गया… एक सिरा दूसरे सिरे से मिल रहा, वक़्त बहुत लगा पर न्याय तो मिलेगा 🙏🏻, इसी उम्मीद के साथ अगले भाग का इंतज़ार है 😊🙏🏻।

Asha Gupta
Asha Gupta
2 years ago

Wonderful story ❤️ ♥️ 👏 💖 💕 😊 ❤️ ♥️ 👏 💖 💕 😊 ❤️ ♥️ 👏 💖 💕 😊 ❤️ ♥️ 👏

Anonymous
Anonymous
2 years ago

Bahut sundar

Seema garg
Seema garg
2 years ago

बहुत सही कर रहा है अनिर्वान इस केस को वापिस खोलकर।आखिर अखंड को भी हक है अपनी जिंदगी गिल्ट फ्री होकर जीने का और जब असली गुनहगार पकड़ा जाएगा तो रेशम को भी आगे बढ़ने में मदद मिलेगी क्योंकि अगर कैसे खिलता है वापिस तो अथर्व को भी जानकारी हो जायेगी इन सबकी।और क्या पता अथर्व सब जानता भी हो।एक बार अथर्व ने कॉलेज में हुए स्कैंडल के बारे में पूछा भी था रेशम से जिससे उसने अनभिज्ञता दिखा दी थी।हमारी नेहा बहुत समझदार है और सही कहा उसने कि रेशम की प्राइवेसी का भी ख्याल रखना होगा।
रेशम पुलिस का नाम सुनकर ही घबरा रही है।क्या होगा अब देखते हैं

Ashok Garg
Ashok Garg
2 years ago

Very nice part of the story and very interesting 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊 🙂 👍 😀 👌 👏 😊

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
2 years ago

नेहा का साथ अनिर के लिए भी फायदेमंद साबित हुआनेहा ने जो बात कही वो बिल्कुल सही है कि जब एक की प्राइवेसी का ख्याल रखा जा रहा है तो दूसरे का क्यों नहीं 👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻👍🏻 पता नहीं रेशम का क्या रिएक्शन होगा एसीपी का फोन आने पर। 🤔🤔🤔🤔🤔