अपराजिता -111

तो बेटा अब बताओ तुमको शिवेन बोले या गोलू…?”
अनिर्वान ने उसकी तरफ देखा और सामने खड़ा गोलू अपने आंसू पोंछता वहीँ जमीन पर बैठ गया…
“साहब.. हमारा नाम शिव प्रसाद चौरसिया था, लेकिन कॉलेज में सब हमें गोलू ही कहा करते थे.. शिवेन नाम यहां आने के बाद रख लिए !”
उसने कातर दृष्टी से अनिर्वान की तरफ देखा..
“आगे बोलो बे… और सुनो अब बिना रुके बोलते चले जाओ… एकदम शुरू से सब कुछ.. तुम्हारी यूनिवर्सिटी में कब क्या हुआ, अखंड को कैसे फंसाया गया, और इस सब के पीछे कौन लोग है.. सब.. !”
गोलू ने एक गहरी सी सांस ली और बोलने लगा..
“साहब कॉलेज और यूनिवर्सिटी राजनीति की पहली सीढ़ी है.. यही देखते सुनते आये थे हमेशा, लेकिन इतनी गन्दी राजनीति होगी ये नहीं सोचा था कभी…
हमारी यूनिवर्सिटी में सबसे पहली दोस्ती लल्लन के साथ हुई थी… हमें पढाई के लिए स्कॉलरशिप की ज़रूरत थी जो मिल नहीं पायी थी, बस उसी समय लल्लन हमे पहली बार अखंड भैया के पास लेकर गया था..
अखंड भैया ने पहली बार मिलते ही हमारी समस्या सुनी और हमे साथ लिए सीधा कुलपति के पास पहुँच गए.. कुलपति के नानुकुर के बावजूद अखंड भैया ने अपना पूरा जोर लगा दिया, और हमे स्कॉलरशिप मिल गयी..!
लेकिन इसके बदले में हमारे साथ कुलपति साहब भी राजनीति खेल गए! हमे बॉयज हॉस्टल छोड़ने का फरमान सुना दिया… उनके अनुसार लड़को की सँख्या अधिक थी और हर एक लड़के को हर एक सुविधा नहीं दी जा सकती थी..!
जिन लड़को को छात्रवृत्ति मिल रही, उन्हेँ फ्री में हॉस्टल का रहना खाना छोड़ना पड़ेगा..। हालाँकि बहुत से लड़के दोनों ही चीज़ो का लाभ उठा रहे थे, लेकिन हमे ये कह कर कि हॉस्टल में कमरों की कमी हो रही इसलिए हमें किसी एक ही सुविधा को चुनना होगा..। हमे हॉस्टल से हटा दिया !
अखंड भैया ने यहां भी हमें उबार लिया..
उन्होंने हमारे कमरे की चाबी हमसे लेकर हॉस्टल वार्डन के हाथ में रख दी और हमे साथ लिए अपने कमरे में चले आये…
उनका भी हॉस्टल का साधारण सा कमरा ही था! अपनी सुविधा का ख्याल किये बिना उन्होंने हमे अपने कमरे में साथ रख लिया..
और फिर साहब उनके साथ रहते हुए समझ में आया कि अखंड भैया क्या थे..?
यूनिवर्सिटी वाले जिन गरीब छात्रों को छात्रवृत्ति देते थे उनकी संख्या तय थी, लेकिन अखंड भैया जाने कितने गरीब लड़को की पढाई अपनी जेब से करवा रहे थे..।
वहाँ जिस किसी को कोई कमी हो वो सीधा मुँह उठाये उनके पास चला आता था, और वो हर किसी की ज़रूरत का उपाय करने का प्रयास करते थे..।
बस यही तो कारण था जो यूनिवर्सिटी के लड़के उन पर जान छिड़कते थे..
इसीलिए निर्विवाद रूप से दो बार वो यूनिवर्सिटी प्रेजिडेंट का चुनाव जीत चुके थे..
“एक बात बताओ.. ये उपाध्यक्ष का क्या रोल था वहाँ ?”
“साहब धीरेन्द्र प्रजापति भी चाह कर भी अखंड भैया को नहीं हरा पा रहा था.. जबकि उसके ऊपर नेता जी का हाथ भी था। बावजूद वो अखंड भैया से बहुत पीछे था.. वो तो ऐसा था कि उपाध्यक्ष के पद पर दूसरे ग्रुप के ही किसी को बैठाना होता था, वरना अखंड भैया के नाम पर हम, लल्लन किसी को भी लोग वो पद दे देते..।
एक तरह से धीरेन्द्र पर भी अखंड भइया तरस खा लेते थे, बस इसीलिए वो सूअर जीतता आया था।
लेकिन अपने घमंड में उसे लगता था वो अखंड भैया से श्रेष्ठ है..
अखंड भैया अपनी भलमनसाहत के कारण जीतते थे, और वो अपनी दुष्टता के कारण..
अखंड भैया को हराने के लिए उसने न जाने कितने पैंतरे बदले, लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पा रही थी..।
और तब उसने चली अपनी सबसे काली चाल..
वो समझ चुका था कि अखंड भैया की इमेज को बर्बाद किये बिना उन्हेँ हराना मुश्किल है, और इसलिए उसने सब कुछ लम्बे चौड़े तरीके से प्लान करना शुरू कर दिया..
अखंड भैया मेडिकल में पढ़ने वाली एक लड़की को दिल ही दिल में पसंद करने लगे थे..।”
“क्या वो लड़की भी अखंड को पसंद करती थी ?”
“नहीं साहब, उस लड़की को तो पता भी नहीं था अखंड भैया ऐसा कुछ सोचते हैं..।
अखंड भैया को तो गीता पसंद किया करती थी…।”
“गीता कौन ? वहीँ पढ़ती थी ?”
“जी हुज़ूर… गीता अखंड भैया को दिल ही दिल में बहुत पसंद किया करती थी, बहुत ज्यादा.. लेकिन अखंड भैया ने उस पर कभी ध्यान ही नहीं दिया.. वो जानबूझ कर उसे नजरअंदाज करते थे, ऐसा भी नहीं था।
लेकिन बस उनके मन में उसके लिए कुछ नहीं था..।”
“हम्म फिर धीरेन्द्र ने क्या पैंतरे इस्तेमाल किये ?”..
“साहब… सौ कमीने मरे होंगे जब ये आदमी पैदा हुआ.. इसे जैसे ही मालूम हुआ कि अखंड भैया किसी को पसंद करते हैं, इसने पूरी तैयारी से उसे घेरना शुरू कर दिया..। पहले उस लड़की के दिमाग में अखंड भैया के नाम का डर बिठाना शुरू किया…।
जिससे वो ये मान ले कि अखंड भैया यूनिवर्सिटी के घटिया राजनेता और बेकार छात्र है..।
वो लड़की वैसे भी मेडिकल वाली थी तो उनका इस तरफ आना जाना भी कम होता था.. सुनी सुनाई बातों पर उसे यक़ीन भी होने लगा था शायद….
एक के बाद एक धीरेन्द्र ने ऐसी चालें चलनी शुरू की जिनके बारे में अखंड भैया को कुछ भी मालूम नहीं था…
धीरेन्द्र जाने कब से ये सब तैयारी कर रहा था…
उसके बाद उसने अपनी सबसे घटिया चाल चली.. उस मेडिकल वाली लड़की को अखंड भैया के नाम से मेडिकल के पीछे वाले स्टोर रूम में बुलाया और वहाँ खुद पहुँच गया..
उसके बाद उसने उस लड़की के साथ जो भी ज़ोर ज़बरदस्ती की सब कुछ अखंड भैया के नाम से ही किया..
वो लड़की भी इस कमीने को पहचान नहीं पायी और अखंड भैया को ही दोषी मानने लगी…
और इस तरह उसने अखंड भैया को चारों तरफ से ऐसे उलझा दिया कि वो बेचारे इस सब में उलझते चले गए.. !”
“जब तुम ये सारी सच्चाई जानते थे तो तुमने कुछ बोला क्यों नहीं ?”
“साहब हमने जैसे ही ये सब बातें सुनी, हम तुरंत अखंड भैया को बताने के लिए थाने की तरफ भाग निकले.. लेकिन उन लोगो ने हमे सब कुछ सुनते देख लिया था शायद, इसीलिए हमारे पीछे उनका एक लड़का चला आया..।”
“क्या सुना था तुमने ?”
” साहब हमने साफ-साफ धीरेंद्र को यह बोलते सुना था कि उस स्टोर रूम में अखंड की जगह वह मौजूद था उसके दोस्तों ने इस बात पर उसकी वाहवाही भी की।
हम खुद पूरी बात नहीं जानते थे कि उस स्टोर रूम में उस लड़की के साथ क्या हुआ? हमें लगा शायद धीरेंद्र ने उसके साथ जबरदस्ती की होगी, जिसका इल्जाम उसने अखंड भैया पर डाल दिया है।
हो सकता है धीरेंद्र ने अपना चेहरा किसी चीज से ढंक रखा हो, जिससे वह लड़की धीरेंद्र को पहचान नहीं पाई और उसे अखंड समझ लिया..।
यह सच्चाई सुनते ही हम वहां से तुरंत थाने के लिए निकले, लेकिन उन लोगों ने हमें देख लिया था। इसलिए हमारे पीछे-पीछे चले आए। थाने के अंदर दाखिल होते ही हम अखंड भैया को सब कुछ बता देना चाहते थे। लेकिन हमें सांस की बीमारी है।
जैसे ही कोई ऐसी खबर या घटना देखते हैं तो हमारी तकलीफ बढ़ जाती है। उस समय भी हमारी तकलीफ बढ़ने लगी। वह लड़का जो हमारे बाद थाने पहुंचा हमें सहारा देकर वहां से बाहर ले गया। हम बार-बार अखंड भैया को बताना चाहते थे कि वह निर्दोष है, और यह सब कुछ धीरेंद्र का किया कराया है, लेकिन हमें मौका ही नहीं दिया गया। वह लड़का हमें थाने से बाहर निकाल कर ले गया।
हम सोच भी रहे थे कि यह अनजान लड़का हमारी मदद क्यों करना चाहता है। वह हमसे बार-बार बोल रहा था कि तुम सांस की दवा ले लो। उसके बाद लौट कर अपने अखंड भैया को सब कुछ बता देना। लेकिन उसने हमें कोई दवा लेने का मौका ही नहीं दिया। बाहर पहुंच कर एक वैन खड़ी थी, जिसमें उसने हमें धक्का देकर अंदर किया और खुद हमारे बगल में हमारे हाथ पकड़ कर बैठ गया।
वहां से वो लोग हमें जाने किन सुनसान गलियों को पार करते हुए,पुराने गोदाम में ले गए।
हमारे मुंह में कपड़ा ठूंस कर और हाथ पैर बांधकर हमें उस गोदाम म में उन लोगों ने छोड़ दिया और वहां से चल दिए।
जाने से पहले उनमें से एक लड़के ने फोन पर धीरेंद्र प्रजापति को यह जानकारी दे दी कि उन लोगों ने हमें पकड़ कर नेता जी के पुराने गोदाम में डाल दिया है…।
धीरेंद्र ने उन लोगों से क्या कहा हम ठीक से सुन नहीं पाए लेकिन ऐसा लगा जैसे धीरेंद्र ने हमें मार देने की बात कही है, वह लड़के आपस में बाद में इस काम को निपटाएंगे ऐसा कहते हुए वहां से चले गए। लेकिन हम बहुत डर गए थे।
अपने लिए नहीं, अखंड भैया के लिए।
हमें समझ में आ गया था कि उनका कैरियर चौपट करने की दिशा में धीरेंद्र प्रजापति ने इस बार बहुत ही गहरा साजिश भरा कदम बढ़ाया है, और अब अखंड भैया को शायद ही कोई बचा पाएगा…।
हम वहाँ से भाग कर अखंड भैया तक पहुंचने की सोच रहे थे कि एक लड़का अंदर आया और उसने हमे जाने कौन सा इंजेक्शन लगाया और चला गया….
उसके बाद हमे होश ही नहीं रहा..।
फिर पता नहीं कितने दिन ये लोग हमें होश में आने के पहले ही बेहोश कर दिया करते थे.. हमें कुछ मालूम ही नहीं चला..।
एक शाम हमारी हलकी सी आँख खुली और हमने उठने की कोशिश की…
हमे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि बाहरी दुनिया में क्या चल रहा है, हम असल में कहाँ है ? हमारे साथ क्या हो रहा है… अभी उठ कर हम इधर उधर देख रहे थे कि कमरे का दरवाज़ा खुला और कोई अंदर चला आया..।
बेहोशी से उठे होने की वजह से हमारी आंखे ठीक से खुल नहीं पा रही थी.. फिर भी हम दरवाज़े की तरफ देखने की कोशिश कर रहे थे..।
वहाँ एक लड़की थी जो हमारी तरफ बढ़ती चली आयी..। उसने अपने दुपट्टे से अपने आधे चेहरे को ढँक रखा था…।
वो हमारे पास आकर बैठी और उसने हमारे बँधे हुए हाथ खोल दिए..
“गोलू.. यहां से जहाँ भाग सकते हो भाग जाओ.. ये लोग तुम्हे जिन्दा नहीं छोड़ेंगे.. !”
हम उस लड़की को पहचानने की कोशिश करने लगे, लेकिन कमरे में ज्यादा उजाला था नहीं और उसने अपना चेहरा भी ढँक रखा था..
“आप कौन है ?”
“हम कौन है, क्यों है, इन बातों से फर्क नहीं पड़ता, इस वक्त बस अपनी जान बचा कर भागो यहां से !”
“नहीं, हम भागेंगे नहीं बल्कि इन लोगो का पर्दाफाश कर के रहेंगे.. इन्होने अखंड भैया के साथ जो किया है वो सच्चाई दुनिया के सामने ला कर रहेंगे !”
उस लड़की ने एक ठंडी सी आह भरी और वापस बोलने लगी..
“धीरेन्द्र ने जैसा जाल फैलाया है ना तुम कुछ नहीं कर पाओगे.. सुनो इस वक्त बस तुम्हारा यहां से सुरक्षित निकल जाना ही ठीक रहेगा…
“लेकिन अखंड भैया ?”
“वो फ़िलहाल जेल में है और उस पर केस चल रहा है.. मेडिकल वाली लड़की रेशम का और मेडिकल स्टूडेंट पंकज की मौत का भी..।”
“क्या.. लेकिन अखंड भैया किसी का खून नहीं कर सकते ?”
“ये हम जानते है, तुम जानते हो, लेकिन दुनिया नहीं जानती। और सुनो अगर तुम यहां से बाहर निकले ना तो अखंड और बुरी तररह फंस जायेगा..।
ये लोग पिछले चार महीने से तुम्हे ड्रग्स दे रहे हैं.. अब तुम्हारे शरीर में ड्रग्स इस कदर घुल चुका है कि तुम ना तो ढंग से लोगो को देख पाओगे ना तुम ढंग से बोल पा रहे हो..
इन लोगो का प्लान यही है कि दो चार महीने बीतने पर तुम्हे मार कर कहीं फेंक दिया जाये..।”
“तो अब तक क्यों ज़िंदा रखा ?”
“क्यूंकि मार नहीं पाए.. पहले ही धीरेन्द्र पंकज को मार चुका है, उसके अलावा एक और मेडिकल वाली लड़की का ट्रक एक्सीडेंट करवाया है उस खूनी ने..।
अभी फ़िलहाल ये केस जिस पुलिस वाले के पास है उससे धीरेन्द्र भी डर गया है..
उसका बस चलता तो वो तुम्हे तुरंत ही मार देता, लेकिन हमारे पापा ने उसे ऐसा करने से मना कर दिया…
उन्होंने कहा अगर तुम्हारी बॉडी कहीं से मिल गयी तो पूरा शक धीरेन्द्र पर ही जायेगा क्यूंकि तुम अखंड के खास आदमी जो हो..।
बस इसीलिए तुम्हे यहां नशा दे देकर ऐसे रखा जिससे ना तुम जिन्दे में गिने जाओ ना मुर्दो में..
लेकिन इस सब में एक अच्छी बात भी है कि तुम्हारे अखंड भैया निर्दोष साबित हो सकते है..।”
“वो कैसे ?”
“अखंड की मदद करने वाला पुलिस वाला और उसका वकील पूरी तरह से सबूत जुटाने में लगे है.. अभी तक की कोर्ट कार्यवाही से यही लग रहा की केस भले लम्बा खिंच जाये पर अखंड बाबू निर्दोष साबित हो जायेंगे..।”
एक गहरी सी साँस भर कर गोलू उस लड़की की तरफ देखने लगा..
“आप हमें क्यों बचाना चाहती है ?”
“क्यूंकि तुम अखंड के खास हो….. वो तुम्हे बहुत प्यार करता है.. अभी वो जिन परिस्थितियों में उलझा हुआ है उसे आज नहीं तो कल अपनों की ज़रूरत महसूस होगी ही..
लेकिन तुमसे यही कहेंगे गोलू कि फिलहाल यहां से कहीं दूर निकल जाना, और अभी अखंड बाबू के आसपास भी मत फटकना, अगर अपनी और उनकी ज़िन्दगी बचाना चाह्ते हो !
वैसे अखंड बाबू की ज़िन्दगी को हम बचा चुके हैं, लेकिन अगर तुम उनके आसपास भी दिख गए तो धीरेन्द्र समझ जायेगा की उसके दिन पूरे हुए.. उसे पता है की तुम सब जानते हो, और तब वो तुम्हारे साथ साथ उन्हेँ भी मार देगा..।
भगवान के लिए, अपने खुद के अखंड के लिए उनसे दूर चले जाओ.. तुम्हारा उनके पास रहना उनकी मौत का कारण बन जायेगा गोलू…।”
“आप ये कैसे कह सकती है कि हम उनसे दूर चले गए तो वो ज़िंदा रह जायेंगे..।”
“उनकी ज़िंदगी धीरेन्द्र से बचाने की गारंटी हम लेते है..। हम पर विश्वास करो.. बस एक बार अखंड निर्दोष साबित होकर अपने गांव लौट जाये उसके बाद धीरेन्द्र मुड़ कर उनकी तरफ देखेगा भी नहीं.. !”
“आप है कौन ?” गोलू ने ध्यान से उस लड़की की तरफ देखा… उस लड़की ने अपने साथ लाया खाना और पानी गोलू को पकड़ाया और कुछ रूपये उसके हाथ में रख कर बाहर निकल गयी..
“जल्दी निकलो… आज पार्टी कार्यालय की मीटिंग है जिसमे धीरेन्द्र और उसके गुर्गे भी शामिल होने गए है.. यहां अभी कोई नहीं है, इसलिए निकलना सुरक्षित है, यहां मुख्य मार्ग पर पहुंचने के बाद दाहिने रास्ते को पकड़ कर चलते जाओगे, तो रेलवे स्टेशन पहुँच जाओगे.. वहाँ जो पहली गाड़ी मिले पकड़ कर निकल लेना.. अपने अखंड भैया को ज़िंदा देखना चाह्ते हो, तो अब उनके जीवन में कभी वापस मत लौटना.. !”
इतना कह कर वो जाने लगी की गोलू ने उसे आवाज़ लगा दी..
“गीता !”
वो चौंक कर रुकी, एक बार पलटी और फिर तेज़ी से निकल गयी…
गोलू सर झुकाये बैठा ये सारी बातें अनिर्वान को बताता जा रहा था..
“ये गीता कौन थी ?”
“हुज़ूर मंत्री जी की बेटी थी गीता… ये वही गीता है जो अखंड भैया को बहुत पसंद करती थी, लेकिन फिर जाने क्या हुआ ?”
“मतलब ?” अनिर्वान के सवाल पर गोलू उसे देखने लगा..
“हमे बाद में अखबार से मालूम चला कि गीता ने धीरेन्द्र से शादी कर ली !”
“क्या ? लेकिन क्यों ?”
“नहीं पता हुज़ूर… हम उस रात वहाँ से भाग कर बनारस वाली ट्रेन में बैठ गए और यहां पहुँच गए, जो थोड़े रूपये साथ रखे थे उनसे ये गुमटी डाल ली… और बस अखंड भैया सुरक्षित रहे, इसलिए पलट कर उधर का रुख नहीं किया… हाँ इतना ज़रूर पता चल गया था कि अखंड भैया उन दोनों केस से छूट गए है, और वापस लौट गए हैं…।”
अनिर्वान ने गोलू की तरफ देखा..
“अब गवाही दोगे कि तुम्हारे अखंड भैया बेकसूर है ?”
“अगर अखंड भैया का जीवन सुरक्षित रहेगा तब ज़रूर देंगे हुज़ूर !”
अनिर्वान ने एक गहरी सी साँस भरी और गोलू की बातों को रिकॉर्ड करते बैठे भाटी की तरफ देख कर गोलू को ले जाकर खिलाने पिलाने का इशारा कर दिया..
उसी वक्त अनिर्वान का फ़ोन बजने लगा..
उसने देखा नेहा का फ़ोन आ रहा था..
“कहिये ?”
“हाय इतने प्यार से पूछेंगे मिस्टर एसीपी तो हम तो भूल ही जायेंगे, क्या कहना था..!”
“बकवास शुरू !”
“हम्म.. अच्छा ये बताइये, आपके लिए जो डिब्बा छोड़ कर आये थे ना पराग के पास, वो ले लिया ना आपने ?”
“इस वक्त बनारस में हूँ….बस वापस लौटते ही देखता हूँ !”
“अब रहने ही दीजियेगा.. वैसे भी जो बना कर भेजा था वो ख़राब हो चुका होगा !”
“वो तो पराग ने खा भी लिया.. !”
“क्या ?”
“हाँ…. उसने फ़ोन किया और बताया था तो मैंने कहा मुझे लौटने में वक्त लगेगा इसलिए जो भी है तुम खा लो.. !”..
“हाउ रुड ?”
“कौन मैं ?”
“नहीं मैं…!” नेहा ने गुस्से में फ़ोन रख दिया..
अनिर्वान ने मुस्कुरा कर बाबूराव की तरफ देखा..
“बाबूराव वो टिफिन बॉक्स धुलवा दिया था ना ?”
“जी हुज़ूर हलवे वाला ना ?”
अनिर्वान ने हाँ में गर्दन हिला दी..
“वो तो जब आपने हलवा खाया उसी के बाद धूल गया था.. !”
अनिर्वान ने मुस्कुरा कर गर्दन हिलायी और फाइल्स उठा कर बाहर निकल गया..
क्रमशः

Bahut badmash hai anirwan😃😃behetreen part
बेहतरीन लेखन
Awesome part
👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
बेहतरीन भाग, यज्ञ को लेकर कुसुम का दिल प्यार मे धड़कने लगा।दो दिल एक-दूसरे को प्यार का अहसास दिखाने लगे ।हमे भी खूबसूरत पल का इंतजार था। अभी अखंड के लिए भी दिल के दरवाजे प्यार के अहसास के साथ खोल दिजिए। बेहतरीन भाग।
Behtareen lekhika ki kalam se nikali ek apratim rachna ki sakshi ban rahi hoon.Keep writing ma’am.
बहुत बहुत खूबसूरत भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻,
अब होग़ा धीरेन्द्र के षड्यंत्र का पर्दा फाश, अखंड की ज़िन्दगी खराब कर दी धीरेन्द्र की ज़िद ने। इंतज़ार है गोलू की गवाही का…।
नेहा… 😊👌🏻👌🏻👌🏻ओहो टिफिन… वाह वाह ♥️वाह अनिर्वान बाबू आप भी कम नहीं हो 😄😄।
बहुत लाजबाब भाग 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Aakhir akhand nirdosh sabit ho gaya
Bahut hi badhiyan part… Golu ka milna sach main khushi de gaya…
अखंड का केस अब सुलझने लगा है अगर गोलू अपना बयान दे दे तो धीरेन्द्र का फंसना तय है.
अनिर्वाण बाबु बड़ा गलत कर रहे हो, खाते भी हो और बताते नहीं हो.
Haaye….ye anirvan bhardvaj……. ❤️❤️❤️