अपराजिता -109

अपराजिता -109

अखंड के खिलाफ यूनिवर्सिटी की तरफ से ही वाद दायर
किया गया था.. हालाँकि यूनिवर्सिटी के प्रिंसिपल ऐसा नहीं करना चाहते थे, क्योंकि इससे उनकी यूनिवर्सिटी का नाम खराब होता, लेकिन धीरेंद्र अपनी राक्षसों की टोली लेकर प्रिंसिपल कक्ष में धरने पर बैठ गया था, और इसलिए मजबूरन यूनिवर्सिटी को यह निर्णय लेना पड़ा था…

रेशम के ऐसा कहने के बाद अखंड के वकील ने यही दलील दी थी कि अपराधी जब किसी अपराध में संलिप्त होने जाता है,तब वह बार-बार अपना नाम नहीं लेता..
क्यूंकि एक अपराधी के दिमाग में उस वक्त सिर्फ यह घूमता हैं कि किसी भी तरह उसे इस अपराध को अंजाम देना हैं…
और कितना भी जघन्य अपराधी हो वो कभी बार बार अपना नाम लेकर पीड़ित को डराता नहीं हैं, बल्कि अपना काम निपटाने का प्रयास करता हैं..
नाम लेकर वही डराता हैं जो या तो किसी और का नाम उछाल कर उसका नाम ख़राब करना चाहता हैं, या फिर किसी विशेष कारण से वो सिर्फ पीड़ित को अपना भय दिखाना चाहता हैं…!

  प्रिंसिपल सर अखंड के पूर्वपरिचित थे, वो उसका स्वभाव भली प्रकार जानते थे, उन्हेँ मन ही मन विश्वास था कि अखंड ऐसा नहीं कर सकता..
    अखंड बेगुनाह है यह जानते हुए भी प्रिंसिपल सर को कचहरी में जाना पड़ा.. हालांकि तब तक अनिर्वान ने  सबूत भी इकट्ठा कर लिया था, जिसके कारण अखंड के केस को थोड़ा सा बल मिल पा रहा था।

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रेशम का परिवार नहीं चाहता था कि रेशम इन सब पीड़ादायक मार्गों से बार-बार गुजरे, इसलिए उन लोगों ने लिखित में प्रिंसिपल सर और पुलिस को यह ज्ञापन दे दिया था कि उनकी नजर में अखंड गुनहगार है।
और उसे सजा मिलनी चाहिए।
लेकिन इसके लिए रेशम बार-बार कोर्ट कचहरी का चक्कर नहीं लगा पाएगी। इसके लिए वह माफी चाहती है।

इसके बाद रेशम ने पलट कर कभी उस तरफ देखा ही नहीं।
उसे मालूम ही नहीं चला कि अखंड के केस में क्या हुआ? या शायद वो उन सब बातों से भाग जाना चाहती थी, इसलिए उसने जानने की भी कोशिश नहीं की, कि अखंड का क्या हुआ ?
अखंड का केस लंबा चलता, अगर अनिर्वान इसमें व्यक्तिगत रूप से रुचि नहीं लेता।

धीरेंद्र प्रजापति यही चाहता था कि अखंड को इतना लंबा घसीट दे कि वह जिंदगी भर के लिए परेशान होकर रह जाए। धीरेंद्र यही चाहता था कि या तो अखंड पर उसका गुनाह साबित हो जाए और वह हमेशा हमेशा के लिए जेल की चक्की पीसता बैठा रहे, और अगर उस पर गुनाह साबित नहीं भी होता, तब भी केस इतना लंबा खिंच जाएं की अखंड मानसिक परेशानियों में ही घिरा रह जाए और उसका पूरा करियर चौपट हो जाए।

हालांकि अनिर्वान के प्रयासों के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका।

रेशम को कोर्ट में सिर्फ एक बार गवाही के लिए बुलाया गया, जहां उसने साफ और सीधे शब्दों में कहा कि वह लड़का जो रेशम से जबरदस्ती करने की कोशिश कर रहा था बार-बार उसे अपने नाम की धमकी दे रहा था। और साफ तौर पर उससे कह रहा था कि वह अखंड सिंह परिहार है जो उसे किसी और का नहीं होने देगा..।

वकील की दूसरी और सबसे मजबूत दलील यह थी कि अखंड कि उंगलियों के निशान रेशम के पास शरीर पर कहीं पर भी नहीं पाए गए थे..
अगर वाकई अखंड ने ऐसा कोई भी प्रयास किया होता तो रेशम उसके स्पर्श से अछूती नहीं रह सकती थी…
रेशम के गले गर्दन बाँहों पर, गालो पर किसी के हाथो के निशान थे ज़रूर लेकिन किसके थे ये मालूम नहीं किया जा सका..!
यहां तक कि रेशम के कपड़ो पर किसी के बाल भी मिले लेकिन डीएनए टेस्ट करने पर वो भी अखंड के बालों से मैच नहीं हुए….!

रेशम को उसके परिवार वालों ने इस सब केस से भले ही दूर रखा था, लेकिन मानव बराबर हर एक सुनवाई में पहुँच रहा था.. अखंड को देखते ही उसका खून खौल उठता था, लेकिन उसने बड़ी मजबूती से खुद को संभाल रखा था..
वो चाहता था कि अखंड को आजीवन कारावास की सजा सुनाई जाये..
लेकिन जैसे जैसे सुनवाई आगे बढ़ती जा रही थी, वो खुद आश्चर्य में डूबता चला जा रहा था..!

वो भी सोच में था कि अगर अखंड रेशम के साथ ज़बरदस्ती करने की सोच रहा था, फिर ऐसा कैसे सम्भव हैं कि उसके हाथ के ट्रेसेस रेशम में नहीं मिले ?

बाक़ी बातों के बारे में भी सोच कर वो परेशान ही हो रहा था और तब अनिर्वान ने उसे भी समझाने कि कोशिश कि थी..

“देखिये मानव.. ये भी हो सकता हैं कि कोई और लड़का अखंड कि जगह आपकी बहन को परेशान कर गया हो और उसने जानबूझ कर अखंड को फंसाने के लिए उसका नाम बोला हो, जिससे रेशम को यही लगे कि इस सब के पीछे अखंड का हाथ हैं !”

अनिर्वान की इस बात पर मानव ने यक़ीन तो नहीं किया लेकिन केस हारने के बाद अब उसके पास चारा भी नहीं बचा था..

और इस तरह पर्याप्त सबूतो के अभाव में अखंड को न्यायालय द्वारा बेगुनाह मानकर बरी कर दिया गया था… लेकिन इस साल डेढ़ साल के पीड़ा दायक समय में अखंड को जितनी मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा, उसके बाद वह वापस अपने पुराने रूप में कभी नहीं लौट पाया था…

जिस दिन केस का परिणाम आया यज्ञ और अपने पिता के साथ अखंड उस शहर को छोड़कर हमेशा के लिए अपने घर चला गया था…

हालांकि कुछ समय गांव में बिताने के बाद एक बार फिर उसका मन उखड़ने लगा था और वह काम धंधे के लिए शहर वापस चला गया था…!
लेकिन फिर वो उस यूनिवर्सिटी में वापस नहीं लौटा !!

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आज अखंड को वहां बैठा देखकर यह सारी पुरानी बातें अनिर्वान को सिरे से याद आ गई थी और याद आ गया था इन सब के पीछे अराजकता पैदा करने वाला धीरेंद्र प्रजापति..!

जाने क्यों लेकिन अब अनिर्वान के दिमाग में यह सारी कड़ियां एक साथ जुड़ने लगी थी.. पंकज के साथ रेशम की तस्वीर देखकर अनिर्वान को याद आ गया था कि रेशम वही लड़की थी जिस पर अखंड के द्वारा जबरदस्ती करने का आरोप लगा था…
और वो पंकज के साथ तस्वीर में नजर आ रही थी..
पंकज धीरेन्द्र के साथ भी देखा गया था… और यूनिवर्सिटी में पंकज और अखंड के बीच एक लड़की जो ज़रूर रेशम ही थी के कारण झगड़ा हुआ था और जिसके बाद पंकज मारा गया था..!
हालाँकि पंकज की मौत के समय पर अखंड थाने में मौजूद था, और इसीलिए वो उस इल्जाम से भी बरी हो गया था, वरना फंसाने वाले ने तो पूरी तैयारी कर रखी थी…

अगर पंकज की  मृत्यु का सटीक समय अनिर्वान नहीं निकलवाता और उस समय पर थाने में मौजूद सीसीटीवी में वहाँ मौजूद अखंड कि झलक नजर नहीं आती,तब अखंड को इस केस से भी बचाना मुश्किल हो जाता..
.
हालाँकि इस केस से उसे बचाने के बाद अनिर्वान का सबसे पहला ध्यान इसी काम पर केंद्रित हुआ था कि  किसी भी तरह अब उसे असली गुनहगार तक पहुंचना हैं.. उसने अपनी तैयारियां शुरू भी कर दी थी कि तभी उसका सुदूर किसी शहर में तबादला करवा दिया गया..
और सरकारी आदेश का पालन करता अनिर्वान भारद्वाज बिलकुल बिना मन के उस अधूरे केस की स्मृतियों को संजोये वहाँ से चला गया था…!!

लेकिन आज अचानक उसे सब कुछ याद आ गया था..

उसने मन ही मन ये तय कर लिया था कि अब हो सके तो एक बार पंकज के साथ इस तस्वीर में नजर आती रेशम से मिलने जाना ही होगा..वही इस केस पर प्रकाश डाल सकती थी..!!

अनिर्वान को सोच में डूबा देख बाबूराव ने उससे चाय के लिए पूछ लिया..

“हुज़ूर चाय लीजियेगा ?”

“ले लेंगे बाबूराव !”  कहने को अनिर्वान कह गया और अपने दिमाग में अब भी अपना जोड़ घटाव बैठाता रहा कि उसी वक्त बाबूराव चाय लेकर चला आया..
अनिर्वान ने चाय की तरफ हाथ बढ़ाया ही था कि दो पुलिस कर्मी एक आदमी को पकड़ कर उसके सामने ले आये..

“ये कौन हैं भाटी साहब ?”

“हुज़ूर ये वही आदमी हैं जिससे दीपक की सबसे ज्यादा बात हो रही थी.. !”

अनिर्वान ने अपने अंदाज़ में अपनी एक भौंह ऊपर चढ़ा ली और उसकी तरफ देखने लगा..

“दीपक से कैसे जानपहचान हैं ?” अनिर्वान के सवाल पर वो आदमी बिना ज्यादा विचार किये बोल गया, उसे लगा दीपक वैसे भी चंद्रभान का गुंडा हैं उस पर पुलिस की कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं चलने वाली..

“दोस्त हैं हमारा !” उस आदमी ने अकड़ कर जवाब दे दिया..

“कैसा दोस्त ?”

“बहुत खास दोस्त !”

अनिर्वान ने ध्यान से उसे देखा और बाबूराव को इशारा कर दिया.. बाबूराव अनिर्वान के इशारे को समझ कर एक सफ़ेद पाउडर भरा हुआ पैकेट ले आया और अनिर्वान के सामने रख गया..
उस पैकेट में सादा टेलकम पाउडर था, लेकिन ऊपर से देखने पर वो कुछ और ही नजर आता था..

“तुम्हारा खास दोस्त इस चीज का कारोबार करता हैं..!”
वो आदमी आश्चर्य से उस पुड़िया को देखने लगा..

” चरस बेचता हैं !” अनिर्वान के मुहं से ये सुन कर उस आदमी की आंखे फटी रह गयी..
वो एक सामान्य सा बिचौलिया था जो किसी अधकचरे  सुपारी किलर का काम लिया करता था,

उस सुपारी किलर ने कायदे से आजतक एक भी मर्डर नहीं किया था..
बेचारा अपने आपको एक कातिल के तौर पर स्थापित करने के लिए प्रयासरत था, लेकिन उसके आज तक के हर प्रयास असफल ही हुए थे..
उसे खुद को हत्यारा कहलवाना बड़ा पसंद था लेकिन कायदे से आज तक एक भी खून वो नहीं कर पाया था…
दीपक के इसी दोस्त ने उसे, इस चिंदीचोर हत्यारे के बारे में बताया था और दीपक ने इसे बहुत बड़ा कातिल समझ कर इसे यज्ञ पर गोली चलाने के लिए पैसे दे दिए थे..!

लेकिन इस बार भी उस गंवार हत्यारे ने अपना रिकॉर्ड तोड़े बिना यज्ञ पर गोली चलायी ज़रूर, लेकिन वो गोली उसके सीने में लगने की जगह उसकी बांह पर लग गयी..

उसे ये बताया गया था कि यज्ञ अकेला होगा, लेकिन एक गोली चलाने के बाद ही उसकी नजर वहाँ हंगामा मचाती कुसुम पर गयी और उसकी दहाड़ सुन कर वो खुद सर पर पैर रख कर भाग खड़ा हुआ था..!

ये आदमी दीपक और उस कातिल के बीच की कड़ी था, इसे ज्यादा कुछ लेना देना नहीं होता था, इसके लिए पैसा ही सबकुछ था.. पैसे के लिए ये किसी हद तक जा सकता था..

इसे बस पैसा बनाना था, इसलिए वो ये सब किया करता था लेकिन वर्जित ड्रग्स का कारोबार सुन कर इसके हाथ पांव फ़ूल गए..

उसे अपनी कानून व्यवस्था पर पूरा भरोसा था, एक व्यक्ति खून कर के भी बड़े आराम से घूम सकता हैं, जब तक उसके खिलाफ सबूत ना मिले लेकिन गैरकानूनी औषधि रखने के इल्जाम से बरी होना मुश्किल था..!

अनिर्वान उस लड़के के चेहरे के भावो को देख कर समझ गया कि ये अब सब कुछ उगल देने को तैयार हैं.. अनिर्वान उसे और भी डराने लगा..

“हाँ तो दीपक तुम्हारा खास दोस्त हैं ? इसका मतलब इस सफेद पुड़िया के बारे में तुम्हे भी मालूम होगा!”

“नहीं…. हम इस बारे में कुछ नहीं जानते !”

“अरे तुम तो बड़ी पहुंची चीज़ निकले, सफेद पुड़िया का कारोबार भी करते हो..और ऐसे कारोबारियों को अपना दोस्त भी बना रखा हैं.. ! चलो अच्छा हैं दोनों दोस्त साथ में जेल में रहोगे तो वक्त भी अच्छा कट जायेगा..तुम दोनों ही मेहनती दिखते हो, तुम्हे फर्नीचर बनाने का काम सौंप देंगे, बढ़िया मेहनत से काम करना और एक दूसरे से बात भी करते रहना..
बीस बाइस साल में जब तक यहां से छूटोगे तब तक अच्छा रुपया बना चुके होंगे दोनों.. !”

“बीस बाइस साल ?”
.
वो घबरा कर चीख पड़ा..

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“अब यंग जनरेशन के खून में ज़हर घोलने के बदले इतनी सजा तो भुगतोगे ही !”

“नहीं साहब वो बात नहीं.. हम सच कहे तो हम उस दीपक को ढंग से जानते तक नहीं.. वो तो बस उसने एक बार फ़ोन किया अपने किसी काम के लिए तो हमने हाँ कर दी..!”

“ऐसा कारोबार करने वाला तुन्हे फ़ोन भी ऐसे ही किसी काम से करेगा ना.. ज़ाहिर हैं आलू प्याज़ का दाम पूछने तो तुम्हे फ़ोन करेगा नहीं..।”

अनिर्वान अभी उससे पूछताछ कर रहा था कि तभी बाहर से एक पुलिसवाला अंदर चला आया..

“हुज़ूर आपने कोई फोटो बहुत पहले सभी थानों में ढुंढवाई में डाली थी…

” हाँ भाटी साहब.. करवाई तो थी.. ! अभी दो दिन पहले वापस उसका सर्कुलर आसपास के राज्यों में भेजा हैं !”

“हुज़ूर बनारस से एक फ़ोन आया था, आपकी भेजी तस्वीर से मिलता जुलता आदमी अस्सी घाट पर देखा गया हैं..!”

उस पुलिस वाले ने अपने मोबाइल की स्क्रीन अनिर्वान की तरफ घुमा दी..

अनिर्वान ने मोबाइल पर बनारस पुलिस की भेजी तस्वीर को बड़े ध्यान से देखा और उस तस्वीर को ज़ूम कर लिया..

“भाटी साहब इस तस्वीर को फोटोशॉप में डलवा कर इसके चेहरे से ये जटाजूट और दाढ़ी हटवा कर लाइए.. ज़रा देखे की जिस लड़के को ढूंढ़ रहा हूँ, ये वही हैं या नहीं..

“जी हुज़ूर..

भाटी साहब के हटते ही बाबूराव ने अनिर्वान का ध्यान उसकी ठंडी पड़ती चाय पर दिलवा दिया..

“चाय पी लेते हुज़ूर !”

अनिर्वान ने देखा चाय ठंडी पड़ गयी थी.. उसने बेचारगी से बाबूराव को देखा और फिर उस लड़के से अन्य पुलिस वालो को पूछताछ करने बोल खुद कम्प्यूटर की तरफ बढ़ गया..

कुछ देर में ही अनिर्वान के ऑफिस में मौजूद कम्प्यूटर पर उसी के ऑफिस का कम्प्यूटर एक्सपर्ट बैठा था और उस फोटो के चेहरे से दाढ़ी और जटाजूट हटाता चला जा रहा था..

और धीरे धीरे उस लड़के का चेहरा स्पष्ट दिखाई देने लगा था…

उस लड़के का चेहरा साफ़ दिखते ही अनिर्वान के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान चली आयी..

” चलो बाबूराव अब हमें बनारस निकलना हैं… जरा इन्हे भी उठा कर यही ले आते हैं.. पता तो चले की इतने सालो से ये कहाँ छिपा बैठा था.. और क्या कर रहा था ?”

क्रमशः

aparna…

आप सब guess कर के बताइये की गंगा घाट पर मिला ये लड़का आखिर कौन हैं, जिसे देख अनिर्वान साहब मुस्कुरा उठे..

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Nisha
Nisha
1 year ago

Ye kahin raja toh nahi jo basuri ke sath banaras me the us waqt

Savita Agarwal
Savita Agarwal
1 year ago

Bahtareen n Lajabab and Fantastic n Fabulous part

Gurpreet Kaur
Gurpreet Kaur
1 year ago

Finally aprajita and jivansathi read karne mil hi gaya acha writer kahi bhi chup jaye reader dhundh hi lete hai 😁😁aapki stories achi nahi awesome hoti hai god bless you 😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊👍👍👍👍👍👍👍

Arun Kumar
Arun Kumar
1 year ago

🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰🥰

Anonymous
Anonymous
2 years ago

Hamesha ki tarah ye part bhi shandar tha.

Bandna Thakur
Bandna Thakur
1 year ago
Reply to  Anonymous

❤❤❤❤❤aaj bahut dino baad padhi story… Facebook wall pe show nhi ho rhi thi par aaj aap ki post padhi pratilipi pe to dundh liya…. Hamein to inn Anirwan ji se pyaar ho rha hai… Vaise hum shadishuda or do bacho ki maa hain or hmare baccho ke according hum adher ho chuke hain par dil to baccha hai ji😘😘keep writing awesome stuff ❤❤❤❤

S Murmu
S Murmu
1 year ago
Reply to  Anonymous

Lagta hai Dhirendra Prajapati hoga . I guess . Ye part bhi aacha hai, ab curiosity ho Rahi hai aage kya hua hoga.

कांति
कांति
2 years ago

बेहद, बेहद शानदार, लाज़वाब, मज़ेदार भाग जितनी प्रशंसा की जाएं डॉक्टरनी साहिबा की कम हैं 😘😘😘

Suman Thakur
Suman Thakur
2 years ago

Thank you so much,,,, हम लोगों को आपकी कहानियों की लत लग गई है , और अब हम इस इतनी प्यारी लत को कभी नहीं छोड़ेंगे!!!! डॉक्टर साहिबा 🙏🙏💐💐

उमिता कुशवाहा
उमिता कुशवाहा
2 years ago

काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे आपके अपराजिता के नए भाग का पर समझ में नहीं आ रहा था कि आप कहां चली गई हैं अब समझ में आया कि आप यहां पर हैं।
भाग बेहद मजेदार था और भारद्वाज साहब पूरी छानबीन करके पता लगा ही लेंगे की अखंड के जीवन को नर्क बनाने वाला इंसान कौन है और यज्ञ को मौत की कगार पर लाने वाला भी कौन है।

Anonymous
Anonymous
2 years ago

Superb story ❣️💕❣️💕❣️💕😍💕😍💕😍

Anonymous
Anonymous
2 years ago

मज़ा आ गया भाग 109 पढ़ के….ग़ज़ब लिखती हैं। 💃💃🙏🙏😍😍