अपराजिता -103

अपराजिता -103

एक रुठी हुई, तक़दीर जैसे कोई
खामोश ऐसे है तू, तस्वीर जैसे कोई
तेरी नज़र, बनके ज़ुबाँ, लेकिन तेरे पैग़ाम दिये जाये
ये शाम मस्तानी, मदहोश किये जाये
मुझे डोर कोई खींचे, तेरी ओर लिये जाये….

रेडियो पर चलता गाना समा बाँध रहा था…और यज्ञ गुनगुनाने में व्यस्त था..
कुसुम ने ही नानी के बारे में जानने के लिए बात छेड़ दी और वह अपनी नानी के बारे में कुसुम को बताने लगा….

“हमारे बचपन की सबसे खास यादों का हिस्सा है हमारी नानी.. बचपन में नानी का बनाया अचार हमारा खास होता था..!
अम्मा बताती हैं कि जब अखंड भैया पैदा होने वाले थे तब अम्मा अपनी मां के घर चली गई थी! उस वक्त हमारी दादी ने साफ-साफ कह दिया था कि अगर पहली लड़की हुई तो हमारे यहां वापस मत आना।

हम जानते हैं दादी हम दोनों से बहुत प्यार करती है, लेकिन उस समय दादी के अंदर की सास कुछ ज्यादा ही कड़वी हो बैठी थी। हमारी अम्मा बहुत डरी हुई थी, अखंड भैया के टाइम पर। लेकिन फिर भैया पैदा हो गया। पूरे घर में खुशी का माहौल हो गया !

उस समय हमारी नानी ने अखंड दीप जलाया था,ये सोच कर कि अगर बेटा भया तो ये अखंड दीप साल भर जलेगा….. ।
अम्मा बताती हैं कि, जब अम्मा सौर में गई उस वक्त नानी ने विष्णु भगवान के सामने मन्नत मानकर अखंड दीप जला दिया था कि भगवान एक लड़का दे दो, जिससे हमारी बेटी का ससुराल में गुजारा हो सके।
और बस अखंड भैया पैदा हो गए, उसके बाद पूरे साल भर वह अखंड दीप उस घर मे जलता रहा। और भैया का नाम अखंड रखा गया !

एक साल बाद जब अखंड भैया साल भर के हो गए उसके बाद उस दीप में घी डालना बंद किया था नानी ने।
उनकी बहुत मानता थी अपने घर के भगवानों पर।

दूसरी बार जब अम्मा प्रसूति के लिए उनके घर गई तब नानी बहुत खुश थी, क्योंकि अब एक बेटा हो चुका था इसलिए दूसरी बेटी भी हो जाती तो कोई बात नहीं थी। फिर भी दबे छुपे कहीं ना कहीं हमारी दादी चाहती थी कि दूसरा भी बेटा हो जाए।
लेकिन हमारी अम्मा बेटी चाहती थी और हो गए हम। हमारे होने पर हमारी नाना जी ने यज्ञ करवाया था, और इसीलिए हमारा नाम यज्ञ पड़ गया…।

“आप दोनों भाइयों के तो नाम की भी कहानी है? लगता है हमारे घर पर जब हम पैदा हुए होंगे तब ढेर सारे फूल खिले रहें होंगे, इसलिए हमारा नाम कुसुम पड़ गया.. ।”

यज्ञ की बात सुन कुसुम मुस्कुरा कर अपनी बात भी बोल गयी…

“जब तुम पैदा हुई रही होगी ना, तब तुम्हारा चेहरा खिले फूलों सा दिखा होगा। इसलिए तुम्हारा नाम कुसुम रख दिया।”

यज्ञ अपनी मस्ती में बोलकर गाड़ी चलाने लगा और कुसुम पल भर के लिए उसे देखती रह गई। गाड़ी में चल रहे संगीत को धीरे से यज्ञ ने बढ़ा दिया और आवाज कुसुम के कानों पर भी पड़ने लगी…

हम मिट चले, जिनके लिये
बिन कुछ कहे, वो चुप-चुप रहे
कोई ज़रा ये उनसे कहे
न ऐसे आजमाओ, ओ हो …
खोया-खोया चांद …

खोया-खोया चांद, खुला आसमां
आँखों में सारी रात जाएगी तुमको भी कैसे नींद आएगी, हो….

गाड़ी बढ़ती रही और वो दोनों यज्ञ के ननिहाल पहुँच गए..
वहां एक बार फिर हर किसी से मिलने के बाद कुसुम खुश हो गई।
   दोनों का ही बहुत आदर और सम्मान किया गया। वैसे भी यज्ञ घर की बेटी का बेटा था, इसलिए उससे लाड़ होना स्वाभाविक था। और कुसुम उसकी धर्मपत्नी थी। नानी तो इसी बात पर खुश थी कि वह बहू को देखने नहीं जा पाई तो, बहु खुद उनके पास चली आई।

ढेर सारे लाड़ दुलार और स्वागत सत्कार के बीच कुसुम यही भूल कर रह गयी कि ये भी उसका ससुराल है..

नानी के सारे किस्सों और तरह तरह के पकवानों के बीच कब रात घिर आयी पता भी नहीं चला..।

खाना खाते समय मामियां कुसुम को बढ़ चढ़ कर परोस रही थी और कुसुम भी उनके स्वाद में अपना पेट भूल कर सबकुछ चखती चली जा रही थी..

सूरन की कढ़ी, कटहल के कोफ्ते, बैगन के पकौड़े और भी जाने क्या क्या बना रखा था उन लोगों ने.. सब जानते थे उनका बेटा नॉनवेज नहीं खाता..इसलिए निरामिष जो बन सकता था ठाकुरों के घर सब परोस दिया गया था.. 

खाना खा कर सब आंगन में साथ बैठे बातें कर रह थे कि छोटी वाली मामी जी सबके लिए गाजर का हलुआ ले आयी.. कुसुम ने लेने से मना कर दिया..।
कुसुम के बगल में बैठी यज्ञ की ममेरी बहन कुसुम को चख कर देखने के लिए मनाने लगी, लेकिन कुसुम का अभी कुछ खाने का मन नहीं था..
थोड़ा थोड़ा कर के उसने कुछ ज्यादा ही खा लिया था, इसलिए उसका जी मचल रहा था..।

लेकिन उसकी हालत से अनजान मामी उसे खाने के लिए मजबूर कर रही थी… कुसुम को उबकाई सी आने लगी..
उसने अपने साथ बैठी यज्ञ की बहन को बताया और वहाँ से उठा कर तेज़ी से निकल गयी..
यज्ञ की बहन शर्मीली भी कुसुम के पीछे वहां से निकल गयी…

“क्या हुआ भाभी, ठीक है आप ?”

“हाँ बस उबकाई सी आ रही, लग रहा उलटी हो जाएगी.. ।”

शर्मीली ने बड़ी भेद भरी नजर से कुसुम को देखा..
और उसकी पीठ सहलाने लगी.. हालाँकि कुसुम का जी ज़रूर मिचलाया लेकिन उसे उलटी नहीं हुई..।
चेहरे और मुहं पर पानी डाल कर वो ज़रा थम कर खड़ी हो गयी और उसी समय उसका हालचाल पूछने मामी चली आयी…

“क्या हुआ कुसुम, ठीक हो ?”

“जी मामी जी.. बस थोड़ा जी घबरा रहा !”

मामी जी ने तिरछी नजर से कुसुम को देखा और तुरंत अंदर चली गयी.. कुछ देर में वो नीम्बू आम का खट्टा अचार, इमली की फांक साथ में लिए वापस आयी..

“ये चख लो, अच्छा लगेगा !”.

कुसुम का जी घबरा रहा था, ऐसे में उसे खट्टा देख राहत सी लगी। उसने तुरंत निम्बू के अचार की फांक उठा कर मुहं में धर ली,उसे वैसे भी अचार पसंद था..।

उसने खाते हुए आंखे मूँद ली, जैसे उस अचार के अमृत स्वाद में डूब चुकी हो..।

मामी के मन की शंका का पूरा समाधान हो गया..।।

अब तो किसी किन्तु परन्तु की आवश्यकता ही शेष ना थी..।
कुसुम पेट से थी ये बात पक्की हो गयी थी..
मामी धीरे से सरक कर बाहर जमी महिला मण्डली के पास पहुँच गयी..
नानी जी के एक तरफ बैठी बड़ी मामी के पास बैठ उन्होंने चुगली कर दी..

“जिज्जी, कुसुम पेट से हैं.. !”

“हैं क्या कह रही.. अभी तो साल नहीं पूरा ब्याह को ?”

“हाँ फिर क्या हुआ ? ये सब अपने हाथ की बात तो है नहीं..  भगवान का आशीर्वाद है.. मिल गया तो मिल गया.. !”..

बस उसके बाद एक कान से दूसरे कान तक ये बात पहुँचती चली गयी..
चलते चलते ये बात यज्ञ तक भी पहुँच गयी..

यज्ञ की नानी ने ही यज्ञ को टोक दिया..

“इतनी जल्दी क्या पड़ी थी छोरे… ? आजकल तो लोग शादी के बाद वो क्या कहते हैं, अजवाइन करते हैं पहले सालो साल।
उसके बाद बच्चे का सोचते हैं और तुम दोनों ने छमाही ना बीतने दी..।”

यज्ञ को समझ में आ गया कि कुसुम की ख़राब तबीयत को इन औरतो ने कुछ और ही समझ लिया है.. वो वैसे भी मजे लेने में माहिर था..।

“अजवाइन नहीं नानी एंजॉय…।
और वो तो हम दोनों अब भी कर रहे.. देखो ना बढ़िया घूम फिर रहे, मजे कर रहे और क्या चाहिए..?
और बच्चे की हड़बड़ी आपकी बहु को ही थी, हमें नहीं.. उसी से पूछिए.. ।”

कुसुम ऐसे अचानक हमले के लिए तैयार नहीं थी.. वो सारी बात समझ में आते ही हड़बड़ा गयी..

“अरे नहीं नहीं.. ऐसा कुछ नहीं.. हम प्रेग्नेंट नहीं है..।”

उसके मुहं से ये खुलासा सुनते ही सबका मुहं खुला का खुला रह गया और सबको देख यज्ञ ज़ोर से हंसने लगा..

सबको एकदम से सदमा सा लग गया था… धीमे से सब सामान्य हुए और मामी ने इशारे से अपनी बिटिया को बुला लिया.. ।

उनकी लड़की कॉलेज में पढ़ती थी और अब उसके लिए रिश्ता देखा जा रहा था..।
उसे इन सब आयोजन में बड़ा रस मिलता था..।

वो अपनी सहेलियों को लेकर अपने यज्ञ भैया और भाभी का कमरा सजाने चली गयी..

खाना पीना निपटा और दोनों को ऊपर के कमरे में सोने भेज दिया गया… यज्ञ के मामा की दो बेटियां थी, उन दोनों की कुछ सहेलियां भी कुसुम से मिलने चली आयी थी। उन चारों ने मिलकर यज्ञ और कुसुम के लिए कमरा बिलकुल ऐसे सजा दिया था जैसे दोनों की पहली रात हो..।

कुसुम को साथ लिए वो लोग ऐसे ही उसे उसके कमरे तक छोड़ भी आयी..।

कुसुम कमरे में आते ही चौंक गयी…
उसने देखा यज्ञ पहले ही कमरे में मौजूद था.. उसे देखते ही कुसुम झेंप गयी..।

यज्ञ की बहने उसे छेड़ कर अंदर धकेल कर बाहर से दरवाज़ा मूँद कर चली गयी.. कुसुम वहीँ दरवाज़े पर खड़ी थी..

” अरे आ जाओ अंदर.. क्या रात भर वहीँ खड़ी रहोगी..?  और सुनो यहां इस कमरे में सोफा नहीं है। जो है बस यही एक पलंग है..।
अब सोच लो.. अगर नीचे सोना चाहो तो हम बाहर से एक चादर और मांग लाते हैं..।”

“अरे नहीं.. रहने दीजिये..।
पता नहीं सब लोग क्या सोचेंगे ? हम यहीं सो जायेंगे पलंग पर ।”

“हाँ लेकिन हम नीचे नहीं सोयेंगे।”

“हम आपको बोल भी नहीं रहे..।”

“मतलब हम भी इसी पलंग पर सो सकते है ?”

“हम्म.. बिलकुल सो सकते हैं..।
पलंग बड़ा है, हम एक तरफ आप इक तरफ..।”

यज्ञ धीमे से मुस्कुरा उठा..

पता नहीं खुद को सफाई दे रही या हमें..

“क्या कुछ कहा आपने.. ?”कुसुम पूछ बैठी

“ना नहीं..!”

यज्ञ ना में गर्दन हिलता मुस्कुरा कर पलंग पर पसर गया…
दूसरी तरफ कुसुम कुमारी भी लेट गयी…

यज्ञ अपने मोबाइल पर कोई रील देख रहा था, उस गाने की आवाज़ कुसुम के कानो में भी पड़ रही थी…

जाने दो ना
हे पास आओ ना
छुओ ना छुओ ना मुझे छुओ ना…छुओ ना देखो छुओ ना…
जाने दो ना…

प्यासे होंठों की जो कहानी है,
पास आ के तुम्हें सुनानी है…
ये बातें मैं ना कर पाऊँगी,
पास ना आना मर जाऊंगी
आओ ना आओ ना पास
आओ ना आओ ना
देखो आओ ना…

खुद को समेट कर उसने भरसक प्रयास किया कि गलती से भी यज्ञ से छू ना जाए..!

पता नहीं कमबख्त कौन से इत्र के कुंड में डुबकी लगाता था..।
उसके लेटने भर से पूरा बिस्तर महकने लगता था..।
यज्ञ की उस खुशबु को अपने अंदर उतारती कुसुम कुमारी जाने कब गहरी नींद में सो गयी..

अगली सुबह कुसुम की नींद खुली, यज्ञ बिस्तर पर नहीं था…
लेकिन यज्ञ के खिलखिलाने की स्पष्ट आवाज़ वो सुन पा रही थी, उसने खिड़की से झांक कर देखा, नीचे खुले आंगन में अपनी नानी के साथ बैठा वो इधर उधर की बातों में लगा चाय पी रहा था…

कुसुम भी नहा कर नीचे चली गयी…!
कुसुम को यज्ञ का ननिहाल बड़ा पसंद आ रहा था…!
मामियां, उनके बच्चे सभी बड़े हंसमुख थे..!
यज्ञ भी उन सब से बड़ा घुला मिला था.. !
यज्ञ ने अपनी नानी से कुछ कहा और खड़ा हो गया… वो कहीं जा रहा है, किसी से मिलने ये सुन कर कुसुम भी खड़ी हो गयी..

उसने अपने पास खड़ी यज्ञ की ममेरी बहन से पूछा और उसने मुस्कुरा कर सर हिला दिया…
कुसुम जानना चाहती थी कि आखिर यज्ञ किससे मिलने के लिए इतना उतावला है..।

हर वक्त ख़ुशी में झूमते रहने का राज़ कहीं ये ही तो नहीं जिनसे यज्ञ मिलने जा रहा है..।

“हम भी चलेंगे !”

“तुम क्या करोगी ?” यज्ञ के इस जवाब पर कुसुम हैरानी से उसे देखने लगी..

अच्छा तो छोटे ठाकुर हमें साथ ले कर भी नहीं जाना चाह्ते.. !
अब तो कुसुम के अंदर बैठी ज़िद्दी लड़की अंगड़ाई लेकर खड़ी हो गयी..

“हम तो साथ जायेंगे !”  कुसुम की आँखों की ज़िद देख कर यज्ञ ने हाथ आगे बढ़ा कर उसे साथ चलने का इशारा कर दिया…
और खुद भी निकल गया..

क्रमशः

aparna…

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Meera Patel
Meera Patel
2 years ago

kon se itra me dubki lagata hai 🤣🤣🤣 or kya gaane bajata hai ye Banda , fan 🪭 ho gaye hum to