अपराजिता -41

अपराजिता -41

   रेशम को साथ लेकर पूर्वा अस्पताल पहुंच चुकी थी। रेशम को होश आ गया था, डॉक्टर ने उसे नॉरमल सलाइन की ड्रिप चढ़ा दी थी..
हालांकि रेशम अब भी घबराई हुई थी। पूर्वा उसके ठीक बगल में बैठी थी। उसने उसकी हथेली थाम रखी थी पूर्वा ने धीरे से रेशम से पूछा..

” मानव भैया को बुला लूँ.. ?”

रेशम ने धीरे से हां में सिर हिला दिया और वापस उसके आंखों से आंसू बहने लगे..

पूर्वा ने तुरंत मानव के मोबाइल पर कॉल कर दिया। पूर्वा ने बात करके फोन रखा ही था कि लंबे-लंबे डग भरते हुए अनिर्वान भारद्वाज वहां पहुंच गया..।

इजाजत लेकर वह अंदर कमरे में चला आया। रेशम एक बेड पर अधलेटी मुद्रा में थी और उसके ठीक बगल की कुर्सी में पूर्वा उसकी हथेली पकड़ कर बैठी थी। अनिर्वान रेशम के पास पहुंचा और वही रखी कुर्सी खींच कर बैठ गया..

” आपका नाम.. ?”

रेशम ने धीरे से अनिर्वान की तरफ देखा और अपना नाम बता दिया…

” रेशम !”

अनिर्वान ने वहीं खड़ी लेडी डॉक्टर की तरफ देखा और धीरे से उठकर उस लेडी डॉक्टर के पास पहुंच गया..

” फिसिकल असॉल्ट हुआ है क्या ?”

“हम्म.. लेकिन रेप नहीं हुआ है !”

अनिर्वान ने एक राहत भरी साँस ली और वापस डॉक्टर से पूछ बैठा..

” इस वक्त इनसे सवाल जवाब किए जा सकते हैं?”

“जी.. वैसे रेशम बहुत घबराई हुई है, आप उसी के हिसाब से सवाल करेंगे तो बेहतर होगा.. !”

“हम्म “

अनिर्वान वापस आकर रेशम के पास बैठ गया। रेशम ने उसकी तरफ नहीं देखा। वह बस आंखें झुकाए नीचे देख रही थी। इसकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे..।

” रेशम मैं नहीं जानता तुम्हारे साथ क्या हुआ है? और किसने किया है ? लेकिन तुम्हारी हालत देखकर यह समझ सकता हूं कि जिसने किया है, बहुत गलत किया है ।और अगर उस इंसान को उसके किए की सजा नहीं दी गई तो, यह तुम्हारे साथ और भी ज्यादा गलत हो जाएगा।

तुम्हें देखकर एक बात समझ में आ रही है कि तुम एक बहादुर लड़की हो। मैं जानता हूं यह वक्त नहीं है, यह सब पूछने का।
लेकिन रेशम अभी-अभी तुम उस तकलीफ से होकर गुजरी हो, और इसलिए तुम तकलीफ के बेहद करीब हो, और इसलिए उसे महसूस करके तुम उस हर एक वक्त को मुझे बता सकती हो।
जिसने तुम्हारे साथ गलत किया है वह कानून से बचकर नहीं जा सकता। मैं तुमसे वादा करता हूं कि उसे उसके किए की सजा दिलवा कर रहूंगा।
लेकिन मैं तब तक कुछ नहीं कर सकता, जब तक मुझे यह मालूम नहीं होगा कि किसने तुम्हारे साथ यह सब किया है.. ?”

” अ… खंड.. खंड.. अखंड परिहार नाम है उसका.. !”

” तुम्हारे कॉलेज में पढ़ता है.. ?”

“नहीं !”

“फिर ? अच्छा रेशम अगर तुम्हें बात करने में इस वक्त तकलीफ हो रही हो तो, मेरे सवालों का जवाब अगर तुम्हारी दोस्त को पता है तो वह भी बता सकती है.. ।”

रेशम ने ना में गर्दन हिला दी।
   रेशम के चेहरे पर गुस्से की रेखाएं प्रकट होने लगी उसकी मुट्ठीयां भिंच गयी..

“क्या करता है ये अखंड परिहार.. ?”

” यूनिवर्सिटी का……. प्रेसिडेंट है.. ।” अटक अटक कर रेशम ने कहा।

” तुम भी उसी यूनिवर्सिटी में पढ़ती हो.. ?”

“, मैं ….. मेडिकल मे….
    ….. पढ़ रही हूं, एमबीबीएस फर्स्ट ईयर.. !” अटकना जारी था उसका।

” फिर अखंड परिहार का तुमसे मिलना कैसे हुआ?”

“हमारे कॉलेज…. के एनुअल डे.. में.. !”

“हम्म… आज क्या हुआ ?”

“सर उसने मुझे मेसेज कर के बुलाया था, मिलने के लिए.. !”

घबराती रेशम ने मोबाइल पर का मेसेज उसे दिखा दिया..

“हम्म, नंबर सेव्ड नहीं है.. !”

“मैंने उस लीचड़ आदमी का नंबर सेव करने की ज़रूरत नहीं समझी.. !”

“हम्म…
. उसी वक्त वहाँ धीरेन्द्र और इसके पंटर पहुँच गए…

अनिर्वान ने उस नंबर को देखा और अपने साथ आये कॉन्स्टेबल को दे दिया..

“नंबर किसके नाम पर है, पता करो.. !”

“अरे सर जब रेशम कह रही कि, अखंड का नंबर है तो उसी का होगा ना !”

धीरेन्द्र ने अनिर्वान से कहा और अनिर्वान ने आंखें उठा कर धीरेन्द को पूरी नजर से घूर कर देखा और उसकी नजरो की आंच से धीरेन्द्र पल भर को सहम गया….

“तुम कौन ?”..

“मैं धीरेन्द्र प्रजापति… यूनिवर्सिटी का वाइज प्रेजिडेंट हूँ !”

“ओह्हो वाइज प्रेजिडेंट जी, पद तो ऐसे बता रहे जैसे राष्ट्रपति हो..!”
.

“सर ये अखंड का ही नंबर है !”

“तुम्हें कैसे पता.. ? तुम्हारा दोस्त है ?”

“ना सर इनके तो अबसे बड़े दुश्मन है !” धीरेन्द्र के किसी  एक मुहंफट लड़के ने अपना मुहँ फाड़ दिया..

“हम्म… ! आप लोग फ़िलहाल यहाँ से बाहर निकलिए.. विक्टिम से अकेले में बात करनी है !”
.
अनिर्वान ने उन सबको बाहर जाने कहा और वापस रेशम की तरफ मुड़ गया..

उसी समय मानव आ गया..

मानव को देखते ही रेशम की आंखें फिर भर आई.. मानव ने आते ही उसे अपनी बाँहों में समेट लिया..

“क्या हुआ छुटकी ?”

“मानव…. मानव… वो अखंड… उसने मेरे साथ बहुत गलत किया… !”

अनिर्वान ध्यान से रेशम की बात सुन रहा था..

“उसने क्या किया, मुझे बता पाओगी.. ?”

अनिर्वान के सवाल पर रेशम ने हिचकते हुए अपने आँसू पोंछे…

“सर मुझसे गन्दी बातें बोल रहा था..
और मुझसे कहाँ अगर मैं उसकी बात मान लेती हूँ तो मुझे हर सेम में टॉप करवा देगा, पीजी सलेक्ट करवा कर नौकरी में भी लगवा देगा.. !”

“और.. !”

“और…. उसने….

रेशम ने मानव की तरफ देखा… मानव चुप चाप खड़ा हो गया..
वो बाहर जाने लगा कि रेशम ने उसका हाथ पकड़ लिया.. वो भी वहीँ रुक गया..

और रेशम ने आगे कहना जारी रखा..

“सर वो मुझे डरा रहा था.. उसने मेरे कमरे में दाखिल होते ही पीछे से आकर रौशनी बंद कर दी और फिर मेरे हाथ बांध दिये..

“कमरे में अँधेरा था.. ?”

अनिर्वान ने पूछा..

“जी सर !”

“तो फिर तुमने अखंड को पहचाना कैसे ? “

“उसने खुद अपना नाम बताया सर !”

“उसका चेहरा देखा ?”

“नहीं, लेकिन उसने खुद कहा कि अभी तो अखंड परिहार ने कुछ किया ही नहीं फिर अभी से क्यूँ कांपने लगी डॉक्टर !”

“हम्म.. और क्या कहा इस बेवकूफ ने ?”

“उसने कहा पोलिस में शिकायत कर लेना.. अखंड परिहार किसी से नहीं डरता !”

“और क्या कहा ?”

“बस इसी तरह की बातें थी.. !”

“हम्म… ठीक है रेशम… आप आराम करो, अभी हम लोग प्राथमिकी दर्ज़ कर रहें हैं, जब अस्पताल से छुट्टी हो जायें तब तुम्हें एक बार पहचान करवाने के लिए थाने आना पड़ सकता है… !”

रेशम ने हामी भर दी…

“भाटी जी निकलवाओ.. इस अखंड परिहार की कुंडली निकलवाओ और उसे पकड़ कर थाना दाखिल करो.. !”

भाटी कॉन्स्टेबल था, जी हुज़ूर कह कर वो निकल गया..

बाहर निकल कर जाते हुए अनिर्वान रुका और धीरेन्द्र के पास पहुँच गया..

“आप भी ज़रा तशरीफ़ लाइयेगा थाने में.. !”

“जी हुज़ूर.. !”

अनिर्वान आगे बढ़ रहा था कि एक लड़का तेज़ी से भागता वहीँ पहुँच गया..
वो आगे बढ़ रहा था कि धीरेन्द्र ने उसे रोका और ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगा..

“अब तू यहाँ क्या करने आया है अखंड परिहार.. तुझे यहाँ से निकल जाना चाहिए.. तूने बहुत गलत काम किया है..।”

अखंड ने धीरेन्द्र को दूर करने की कोशिश की और आगे बढ़ने लगा कि अनिर्वान ने आकर उसकी कॉलर पकड़ ली..

“अखंड परिहार ?”

अनिर्वान ने उससे एक बार पूछा और बदहवास से अखंड ने अनिर्वान को देख कर हाँ में गर्दन हिला दी..

अनिर्वान का ज़ोरदार तमाचा उसका गाल रंग गया.. अपने गाल पर हाथ रखें उसने सवालिया नजरों से उसने अनिर्वान की तरफ देखा और तभी धीरेन्द्र वहाँ चला आया..

“सही किया सर..इस जल्लाद को तो फांसी होनी चाहिए.. इसने कॉलेज की लड़की का रेप किया है आखिर !”

रेप शब्द सुनते ही अखंड के पैरों तले जमीं खिसक गयी..
क्या उसकी नाज़ुक फूलों की कली सी कोमल रेशम के साथ किसी ने इतना बुरा कर दिया..
उसके चेहरें की उडी रंगत को ध्यान से देख अनिर्वान ने बोल ही दिया..

“विक्टिम के साथ रेप नहीं हुआ है !”

अनिर्वान की नज़र अखंड पर ही थी.. अखंड ने एक गहरी लम्बी साँस ली और दोनों हाथ जोड़े ज़मीन पर थक कर बैठ गया..

“अरे सर ये लड़का उस लड़की के पीछे जाने कब से पागल हो रखा था.. उसके पीछे पीछे घूमा करता था… बिल्कुल बौरा गया था छोरा !”

अनिर्वान की एक भौंह ऊपर चढ़ी और उसने धीरेन्द्र के गाल पर कस के तमाचा रसीद कर दिया..

“सर मुझे क्यूँ मारा, मेरी क्या गलती ?”

“जब इतना कुछ जानते थे इस अखंड के बारे में तो लड़की को पहले से आगाह क्यूँ नहीं किया.. इसलिए एक तमाचा..।”

अनिर्वान ने उसके दूसरे गाल पर भी तमाचा जड़ दिया..

धीरेन्द्र का एक दाँत बाहर निकल कर गिर गया..

“अब ये क्यूँ ?”

“कभी कभी बिना किसी कारण भी  तमाचा लगाने का मन कर जाता है ।
     और फिर ये तमाचा है, इसका हिसाब हमें नहीं देना पड़ता।  सरकारी आदमी है इसलिए बाकी हर एक चीज़ का हिसाब देना पड़ता है.. एक एक गोली का, रजिस्टर का पेन का, लेकिन तमाचे का नहीं.. समझे..।”

क्रमशः

aparna….

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