अपराजिता -43

अपराजिता -43

“क्या बात कर रहें हो भाई.. ? सच्ची आप थे.. ? लेकिन अगर आप थे तो, फिर इतनी सुंदर लड़की को ऐसे ही जाने कैसे दे दिया.. मतलब कुछ किया क्यूँ नहीं ?”

धीरेन्द्र के चेहरें पर कुटिलता चमकने लगी..

“उसका कारण ये है की…..
आजकल पुलिस जाँच में सब कुछ निकलवा लेती है, ये फोरेंसिक जांचे बड़ी तगड़ी होती है… अगर मैं रेप कर डालता तो, लड़की के एक्सामिनेशन में पाए जाने वाले सीमेन ट्रेसेस से पुलिस मुझे पकड़ लेती गधों…
वैसे सच बोलूं तो कई बार दिल ललचा गया था, जी तो कर रहा था की उसे छोड़ू नहीं, लेकिन बड़ी मुश्किल से खुद को काबू कर लिया..!
ज्यादा छुआ भी नहीं, की कहीं कोई ऐसी चीज़ ना छूट जायें जिससे शक की सुई मेरी तरफ घूम जाये..
अब तैयारी तो पूरी कर आया हूँ, बस अखंड की बारात उठने की देरी है.. !”

“ओह्ह तो ये माजरा है… हम तो गुरु अब तक ये सोच रहे थे कि अखंड बाबू को लड़की को नोचने का मौका नहीं मिला। उसके पहले ही मस्त हीरो टाइप एंट्री मार कर आप पहुँच गए और हीरोइनी को बचा लिए, लेकिन यहाँ तो माजरा ही कुछ अलग है..।
लेकिन गुरु मानना पड़ेगा आपका दिमाग.. ।
हज़ार कमीने मरे होंगे तब आपकी दिव्य आत्मा का जन्म हुआ है.. !”

धीरेन्द्र ने गुटखे का नया पाउच खोला और अपने मुहँ में डाल लिया और पलट कर उस लड़के को कस कर एक  तमाचा जड़ दिया..

“साले लतखोर, हमको कमीना बोलोगे बे !”

“अरे भैया जी वईसा कमीना थोड़े ना बोले हैं, ये तो बढ़िया वाला है.. पिच्चर वाला है, कमीने वाला कमीना !”..

“अभी बताते हैं तुमको कमीने वाला कमीना.. क्या होता है.. ! अब चलो यहाँ से.. !”

“कहाँ जाना है भैया जी ?”

“सबसे पहले अस्पताल वापस जायेंगे, उसके बाद कल सुबह बताएँगे, कहाँ जाना है.. ! अरे उसके पहले इस पुलिस वाले को भी ठिकाने लगाना होगा, वरना ये हम पर ही ना चढ़ जायें.. !”

“जी भैया जी !”

धीरेन्द्र के पंटर उसके साथ आगे बढ़ गए..

पीछे छिप कर खड़ा गोलू सब सुन चुका था..
उसकी ऑंख से आँसू बहने लगे, उसके अखंड भैया को फंसाने की इतनी बड़ी साज़िश की थी इस कमीने ने..
वो भागकर थाने पहुँच गया..।
अनिर्वान को देखते ही उसने उसके पैर पकड़ लिए..

“हुज़ूर एक बार अखंड भैया से मिलवा दीजिये  !”

अनिर्वान ने गहरी नज़र से उसे देखा और एक तरफ को ईशारा कर दिया….

गिरते पड़ते अपने आँसू पोंछते गोलू सलाखों तक पहुँच गया..

“भैया जी… भैया जी… एक्को ज़रूरी बात… बतानी है.. वो साला… !”

“साँस लें लो गोलू.. !” अखंड ने धीरे से कहा…

“नहीं.. भैया जी… बात ये…. आपको… फंसाने की…
भैया जी…

गोलू दमे का मरीज़ था, उस पर ये भयानक खबर सुन उसके हाथ पांव फ़ूल गए थे..।
वो जल्द से जल्द सब कुछ बता देना चाहता था, लेकिन उसकी साँसे उलझती जा रहीं थी..
उसी समय एक और लड़का वहाँ चला आया.. आते ही उसने भी अखंड से मिलने की गुहार लगा दी..

अनिर्वान भी अखंड का दबदबा जानता था, उसे भी मिलने जाने की इजाज़त दी और पेट्रोलिंग के लिए भाटी को साथ लिए निकल गया…

वो लड़का गोलू के पास पहुँच गया..
अखंड और गोलू ने उसे आज पहली बार ही देखा था..

“ये.. पानी पी लो गोलू.. ! फिर बता देना !”

अखंड ने आश्चर्य से उस लड़के को देखा..
“तुम कौन हो बे… आज के पहले तो दिखे नहीं कभी ?”

“हुज़ूर माई बाप, आपके जबरा फैन हैं बस.. आपकी गैंग में जाने कब से हैं, लेकिन गोलू लल्लन से नज़र हटे तब तो आप किसी और को देखें… !”

गोलू ने पलट कर उस लड़के को देखा और उसके हाथ से बॉटल ले एक बार में पूरी बॉटल गुटक गया..
हड़बड़ी में पानी पी लेने से, गले से पानी उतरने में उसे वक्त लगा और वो थोड़ा गहरी साँस भरने लगा..।
लेकिन अचानक ही उसे साँस की तकलीफ बढ़ने लगी..
साँस लेने में उसे इतनी दिक़्क़त होने लगी कि वो कुछ बोल भी नहीं पा रहा था..

अखंड से उसकी तकलीफ देखी नहीं जा रहीं थी… उसने उस दूसरे लड़के को गोलू को साथ ले जाने का इशारा कर दिया..
उसी वक्त अपना डंडा खटकाता कॉन्स्टेबल भी चला आया..

“चलो भाई निकल लो… ये तुम्हारे बुआ का बगीचा नहीं है कि बैठ कर ताश पत्ती खेल लो.. समझे.. !”

अखंड के इशारे पर वो लड़का गोलू को सहारा देकर उठने लगा, लेकिन गोलू जी जान से अब भी इस कोशिश में था कि किसी तरह अखंड को सब सच बता दे..

लेकिन उसकी उखड़ती साँसे और हालत देख कर लग रहा था अगर उसे सही समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया गया तो वो बचेगा नहीं..

गोलू बिना बतायें जाने को तैयार नहीं था, लेकिन अखंड ने चीख कर उसे भेज दिया..

वो लड़का गोलू को सहारा दिये अपने साथ ले गया..

हमेशा हमेशा के लिए !!!

****

अपना काम निपटा कर धीरेन्द्र सबसे पहले विधायक जी के पास पहुँच गया..।

विधायक जी अपने घर के बगीचे में मौजूद तलैया में खिले कमल में इधर उधर तैरते सारस देख रहें थे..
उनके हाथ में व्हिस्की का गिलास था..।
उसी वक्त वहाँ धीरेन्द्र पहुँच गया..
उसने अपने साथ आये दोनों लड़कों को बाहर ही छोड़ दिया था…।

आते ही वो विधायक जी के पैरों पर झुक गया..।

“हम्म…..  ठीक है ठीक है.. और सुनाओ.. !”

“नेता जी…. एक फरियाद लेकर आया हूँ !”

“कौन नयी बात है.. जब आते हो फरियाद ही ना लाते हो..। कभी कोई ढंग की बात तो लाये नहीं !”

“नहीं गुरुदेव… उस बार तगड़ा वाला न्यूज़ भी लाये हैं !”

“ऐसा क्या खबर ले आये हो !”

“इस बार चार महीना बाद होने वाले चुनाव में हमारा जीतना पक्का है.. उसके बाद यहाँ से आप हमको उठा कर अपनी पार्टी में लें सकेंगे.. !”

“साले पिछली तीन बार से तुम यही कह रहे, और उस अखंड के सामने हर दफ़ा हारे हो..
हम तो सोच रहें इस बार अखंड को स्पॉन्सर कर दे.. !”

“कैसी बात कर रहें हैं माईबाप… उस अखंड के बच्चे को तो ऐसा मज़ा चखाए हैं कि ससुरा याद रखेगा..
थाने में बैठा है.. और अब उसे जेल की चक्की पीसने से कोई नहीं रोक सकता !”

“ऐसा क्या कर दिये..बे?”

विधायक जी की क्रूर छोटी छोटी आंखें चमकने लगी..

“हुज़ूर ऐसा कुछ कर के आये है कि बेल तक नहीं मिलने वाली है..।
लड़की के साथ ज़बरदस्ती का मामला किये है और…..

“और क्या.. ?”

“बाकी वक्त आने पर पता चल जायेगा हुज़ूर.. बस आप एक मदद कर दीजिए कि इस वक्त थाने का इंचार्ज जो पुलिस वाला है, वह कुछ ज्यादा ही होशियारी मार रहा है।जिस तरीके से वह अखंड से और हम से पूछताछ कर रहा था, हमें लगता है कहीं उसे हम पर भी शक तो नहीं हो गया?
आप जरा ऊपर से दबाव डलवा कर उस पुलिस वाले को इस केस से हटवा दीजिए। एक बार वह पुलिस वाला हट गया ना, तब अखंड परिहार को जेल जाने से कोई नहीं रोक सकता..।”

” कौन पुलिस वाला है जो अभी केस देख रहा हैं?”

“कोई भारद्वाज है… !”

“अनिर्वान भरद्वाज ?”

नाम लेते ही विधायक जी के माथे पर बल पड़ गए क्योंकि अनिर्वान भारद्वाज कोई ऐसा वैसा पुलिस वाला नहीं था…
उसका विधायक जी के साथ भी पहले एक लफड़ा हो चुका था!
अनिर्वान की बुद्धि पराक्रम और साहस याद कर विधायक जी के माथे पसीना छलक आया..

” गलत आदमी से भिड़ लिए हो धीरेंद्र..!”

विधायक जी ने कहा.. और धीरेन्द्र भी सोच में पड़ गया..

“तभी ना कह रहें हैं कि हटवाइये उसे.. !”

“पंडित आदमी है वो… पंडित जात से बुद्धिमान और कोमल स्वभाव के मानें जाते हैं, लेकिन अगर यहीं बुद्धिमान ब्राम्हण शूरवीर और ताकतवर हो तो ये सारी दुनिया को अपने कदमो पर झुकाने की भी ताकत रखते हैं..
भूलना मत, परशुराम के खानदान का है वो सनकी ब्राम्हण ! एक लात में तुम जैसे टुच्चो को वो अपने तलुए के नीचे दाब देगा !”

“अच्छे से समझ चुके हैं उसे… तभी ना कह रहें आपसे.. हटवाइये उसे.. !”

“कोशिश करते हैं…. आई जी से बात करते हैं.. !”

“करवा ही दीजियेगा हुज़ूर.. तभी हमारा रास्ता साफ होगा.. वैसे कल सुबह तक एक सरप्राइज और सुनंने मिलने वाला है आपको !”

“वो क्या.. ?”

“कल के अख़बार में ही पढ़ लीजियेगा हुज़ूर !”

“हम्म !”

धीरेन्द्र ने विधायक जी के पैर छुए और वापस निकल गया..
विधायक जी ने तुरंत ही अनिर्वान के ऊपर बैठे ऑफिसर को फ़ोन लगा दिया…

वो रात अखंड की थाने में ही गुज़र गयी.. रात भर उसने पलक भी नहीं झपकी..
दबंग था उसे दबंगई करना पसंद था।
उसके अंदर ठाकुरों वाला निराला एटीट्यूट था। लेकिन आज तक उसने कभी गलत बात का समर्थन नहीं किया था। और ना ही अपनी सोच समझ से कभी कोई गलती की थी ।
ऐसा नहीं था कि वह मारपीट लड़ाई झगड़ा इन सब में विश्वास नहीं करता था। ऐसा करके अपना रुतबा बनाए रखना उसे भी पसंद था। लेकिन लड़कियों के मामले में अखंड निराला ही था। आज तक उसने कभी किसी लड़की से बदतमीजी नहीं की थी। और यही बात उसे धीरेंद्र से अलग कर जाती थी।
लेकिन आज जिस तरह से रेशम ने सारे लोगों के सामने चीख चीख कर उस पर आरोप लगाए थे, उसके बाद अखंड निःशब्द खड़ा रह गया था।
उसे समझ में नहीं आ रहा था कि रेशम क्यों बार-बार उसका नाम लगा रही है। जबकि आज तक वह रेशम से आमने सामने खड़े होकर कभी बात तक नहीं कर पाया था।
रेशम के सामने पड़ जाने पर उसकी जुबान लड़खड़ाने लगती थी। बल्कि वह तो रेशम का नाम तक एक बार में नहीं ले पाता था। अटक अटक कर दो बार में उसके मुंह से रेशम यह शब्द निकलता था।
   उसके लिए रेशम उसके मन मंदिर में बैठी एक सच्ची प्रेम की मूरत थी, और आज उसी मूरत ने उसका घमंड चूर चूर कर दिया था।

पूरी रात आंखों ही आंखों में काट दी थी अखंड ने। लेकिन अपनी तकलीफ के समय भी उसने अपने घर वालों को कुछ भी नहीं बताया था..।

गोलू को अपने साथ ले जाने वाला लड़का फिर गोलू को अपने साथ ही ले गया।

उसके बाद गोलू को कभी उस कॉलेज या यूनिवर्सिटी के कैंपस में किसी ने नहीं देखा…।

लल्लन अखंड के थाने पहुंचते ही इधर-उधर लोगों से मदद की गुहार में लग गया था। अखंड के चेलों की गैंग को लेकर लल्लन सीधे यूनिवर्सिटी के डीन के पास पहुंच गया था। वह उनके हाथ पैर जोड़कर अखंड की बेगुनाही उनके सामने साबित करने पर लगा था ,लेकिन जिस तरीके से रेशम ने प्रोफेसर और बाकी लोगों के सामने अखंड को गुनहगार बताया था, उसके बाद अब डीन सर के हाथ में भी कुछ नहीं रह गया था। हालांकि वह भी अखंड का स्वभाव अच्छे से जानते थे ।
बावजूद उन्हें यह लगा उम्र के उछाल का क्या भरोसा? हो सकता है अखंड ने वाकई रेशम के साथ कुछ गलत कर दिया हो..।

हर तरफ से थक हार कर लल्लन वापस थाने पहुंचा। आधी रात का वक्त हो चुका था। इसलिए उसे थाने में अंदर जाने नहीं दिया गया।
मन मसोसकर लल्लन थाने के बाहर की सीढ़ियों पर ही अपने लड़कों के साथ बैठ गया।

अंदर अखंड जागता रहा और बाहर उसकी सेना..।

भोर होते ही लल्लन ने सबसे पहले अखंड के भाई यज्ञ को फोन घुमा दिया..

****

रेशम पहले से काफी बेहतर थी, इसलिए रात के वक्त ही मानव उसकी छुट्टी करा कर उसे अपने साथ घर ले गया। अपने घर अपने कमरे में पहुंचकर रेशम को थोड़ा आराम लग रहा था। लेकिन फिर भी रह-रहक र वह कांप जाती थी।
रेशम डरपोक स्वभाव की नहीं थी, लेकिन थी तो एक कोमल लड़की ही।
वैसे भी लड़कियां जब तक अपने मायके में रहती हैं, उनके स्वभाव में एक अलग सी कोमलता रहती ही है। बिल्कुल वैसी जैसी सीप में मोती होता है या, फिर किसी बगीचे में खिला गुलाब। जिसे उसके पालनकर्ता अपनी पलकों पर बैठा कर पालते पोसते हैं।
बस वैसा ही कुछ रेशम के साथ था।

गलत के खिलाफ बोल नहीं सकती, उसका स्वभाव नहीं था। बावजूद जहां तक शांति से निपटारा हो जाए वह लड़ने झगड़ने से दूर ही रहा करती थी…।

उसके घर पर सबने उसका पूरा साथ दिया, हालाँकि मानव ने बताने लायक बातें ही घर पर बताई और बहुत सी बातचीत दोनों भाई बहन खुद में ही छुपा ले गए..।

मानव का ख़ास दोस्त अमित भी चला आया था..
वो तीनों ऊपर रेशम के कमरे में थे..
रेशम अपने आप को हिम्मती दिखाने की पूरी कोशिश कर रहीं थी, लेकिन सच्चाई ये थी कि अब भी आंखें बंद करते ही, वो घिनौनी महक, वो लिजलिजा स्पर्श उसे डंक सा दे रहें थे..।
उसके कान के पास आकर उस बेहूदा इंसान का कुछ भी कहना जिसमे उसके मुहँ से निकली हवा रेशम के कान में अब भी सीसा पिघला रहीं थी..।
उसका वो पीछे से ज़िप को खींचना… सब कुछ कांटे सा रेशम को चुभ रहा था..
वो सूनी सूनी आँखों से ज़मीन को देखती बैठी थी..

मानव के गुस्से को कम करने के लिए अमित लगातार उसे समझा रहा था, हालाँकि खुद अमित बहुत परेशन था, उसने बचपन से रेशम में अपनी बहन को देखा था.. परेशान होकर उसने सिगरेट निकाल कर जला ली और फूंकने लगा..

फिर अचानक उसने रेशम की तरफ बढ़ा दी..

“एक कश ले ले.. दिमाग से वो कमीना निकल जायेगा.. !”

रेशम ने अमित की तरफ देखा और उसके हाथ से सिगरेट ले ली..

एक गहरा सा कश खींच कर रेशम को खाँसी आ गयी…
अमित पीछे से उसकी पीठ ठोंकने लगा..
मानव ने तुरंत उसके हाथ से सिगरेट छीन ली..

“क्या बेहूदा हरकत है ये अमित… ! उसे क्यूँ पकड़ा दी ?”

“उसके अंदर अभी जितनी कड़वाहट भरी है ना, उसे निकालने का यही एकमात्र उपाय है… ! मेरी भी बहन है यार वो.. !”

रेशम ने वापस सिगरेट पकड़ कर एक फूँक लगायी और सिगरेट की कड़वी तरलता उसके अंदर जाते ही उसे ऐसा लगा जैसे उसके अंदर की सारी जलन सारी कड़वाहट को कुछ देर के लिए शांति सी मिल गयी हो…

उसने आंखें बंद कर ली..
उसकी आँखों की कोर से बूंदे वापस बहने लगी..

मानव चुपचाप अपनी बहन की परेशानी को देख रहा था..

“इस अखंड परिहार की जान लें लूंगा मैं !”

गुस्से में मुट्ठियां भींचता मानव अपनी जगह से खड़ा हो गया..
वो आगे बढ़ा ही था कि अमित ने उसे रोक लिया..

“थम जा मानव… ऐसे नहीं मारना उसे.. उस जैसे लीचड़ को छू कर अपने हाथ क्यूँ गंदे करने..?
मेरे डैड वकील है ना, उसे ऐसे फंसायेंगे की साला ज़िंदगी भर चक्की पिसेगा, उसकी सात पुश्ते जेल बाहर आने को तड़प जाएँगी लेकिन साला वहीं सड़ सड़ कर मरेगा…।
कल सुबह ही डैड से मिल कर पूरी बात करते है..।”

“लेकिन अमित एक बात का ध्यान रखना है, रेशम का नाम कहीं ना आये.. !”

“भाई मीडिया में बात नहीं जाने देंगे.. चिंता मत कर !”

उन दोनों की बातें सुनती रेशम ने आंखें मूँद ली..।
उसकी आँखों से अब भी सावन बह रहा था..
उसके अन्तस् की पीर वहीं समझ पा रहीं थी..

किसी लड़की के लिए किसी लड़के का अनचाहा स्पर्श कैसे कांटे भरा होता है, ये आज उसने महसूस किया था..।
उसे अपने ही सर्वांग से घृणा हो रहीं थी..।
वो खुद को घिस घिस कर उसकी छुअन मिटा देना चाहती थी..

आधी रात के वक्त वो उठ कर बाथरूम में घुस गयी..
खुद को रगड़ रगड़ कर उसने अपने आप से अखंड के सारे निशान मिटाने चाहे, लेकिन वो उसके दिल दिमाग की अंदरूनी गहन कंदराओं में कहीं अंदर जा बैठा था…

जो रेशम के वर्तमान तक में नहीं निकल पाया था !!!

क्रमशः

aparna…

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Manu verma
Manu verma
2 years ago

बहुत अच्छा भाग 👌👌👌👌👌👌