अपराजिता -42

अपराजिता -42

अपराजिता – इस कहानी में ध्यान से पढ़ें तो इस बार मैंने एक अलग सामाजिक मुद्दे को उठाया है, और ये सामाजिक मुद्दा है किसी की इमेज किलिंग का..
कहानी पढ़ते पढ़ते समय शुरु से ही पाठकों को यह लग रहा था कि अखंड परिहार एक जल्लाद किस्म का विलन है जिसने रेशम के साथ बहुत गलत किया, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती गई समझ में आने लगा कि अखंड के नाम पर किसी और ने यह सारा स्वांग रचा था!

यह आजकल की एक बहुत बड़ी सच्चाई है।
जहां सोशल मीडिया ने लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का काम किया है, वहीं कुछ लोग इसका फायदा उठाकर दूसरों की इमेज कीलिंग का भी काम बड़ी आसानी से करते हैं..।
वैसे भी अगर किसी एक इंसान के लिए बार-बार गलत बातें दोहराई जाए तो सुनने वाले उन्ही बातों को सच मान लेते हैं। आजकल वैसे भी किसी के पास सच्चाई जानने का या, सच्चाई की तह तक जाने का वक्त ही नहीं होता।

धीरेंद्र ने अपने फायदे के लिए अखंड की इमेज का बंटाधार कर दिया…।

धीरेंद्र ने जब देखा कि ढेर सारी कोशिशों के बावजूद वह अखंड की बढ़ती लोकप्रियता कम नहीं कर पा रहा, और उससे आगे नहीं बढ़ पा रहा, तब उसने अपने पक्ष को बढ़ाने की सकारात्मक कोशिश की जगह अखंड के पक्ष को नीचे गिराने की नकारात्मक कोशिश शुरू कर दी..।

और वह काफी हद तक इसमें सफल भी रहा! इसे ही इमेज बिल्डिंग या इमेज किलिंग कहा जाता है!

जो कि आजकल सोशल मीडिया का सबसे ट्रेंडिंग काम चल रहा है.. आप सभी से भी विनती है कि इस तरह सिर्फ देखी या सुनी बातों पर यकीन करने की जगह जितना हो सके सच्चाई की हद में जाने की कोशिश कीजिए सिर्फ सुनी सुनाई बातों पर यकीन करने की जगह….!

***

  अब आगे..

  “सरकारी आदमी हूँ, इसलिए उपयोग में लायी हर एक वस्तु का हिसाब देना होता है, एक एक गोली का, रजिस्टर के एक एक पन्ने का, पेन का… ।
लेकिन तमाचों का कोई हिसाब नहीं देना होता..
भाटी साहब, उस अखंड परिहार को धर लीजिये.. !”

भाटी को आज्ञा दे अनिर्वान आगे बढ़ गया..

इतनी देर में मानव भी समझ गया था की उसकी लाड़ली के साथ बदतमीज़ी करने वाला अखंड यहीं है..।
मानव खुद पर काबू नहीं कर पाया और लपक कर उसने अखंड की कॉलर पकड़ ली..
उसके गाल पर वो थप्पड़ ही थप्पड़ लगाने लगा..।
अखंड की कोई गलती तो थी नहीं फिर वो कैसे थप्पड़ खा लेता.. उसने भी पलटवार शुरू कर दिया..

दोनों के बीच घमासान छिड़ गया…

“साले कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुए मेरी बहन को हाथ लगाने की.. !”..

मानव जी जान लगा कर उस पर चीख पड़ा..

“हमने कुछ नहीं किया है.. हम कुछ नहीं जानते.. ! हम जब वहाँ पहुंचे तब रेशम बेसुध पड़ी थी.. ।”

मानव अखंड की किसी बात को सुनने में रुचि नहीं ले रहा था। उसके दिमाग में इस वक्त मानव की जान ले लेने का फितूर सवार हो गया था। बिना इधर उधर देखे लात घुसे से वह अखंड पर प्रहार पर प्रहार कर रहा था। अखंड खुद को बचाने के लिए वार रोकने के उपाय करने में मानव पर टूट पड़ा था..

अनिर्वान गुस्से में लौटा और दोनों को खींच कर अलग कर दिया.. उसने वापस अखंड के झापड़ रख दिया..

“एक तो गलत काम किया ही उस पर सीनाज़ोरी भी कर रहें.. शरम नहीं आती ?”

“साहब हमनें कुछ नहीं किया.. !”

“तुम्हारी गैंग की बात नहीं हो रहीं, अकेले तुम्हारी बात हो रही है इसलिए मैंने कहो..  हमने नहीं..!”

“सर हम सच कह रहें.. हमारा यकीन कीजिये आप !”

अखंड की बात सुनकर अनिर्वान के माथे पर बल पड़ गए।
  उसने भाटी को उसे पकड़ लाने का इशारा किया और तेज कदमों से बाहर निकल गया।
मानव अपने दांत पीसता हुआ वहीं खड़ा रह गया।
धीरेंद्र और उसके गुर्गे भी पीछे-पीछे बाहर निकल गये….

मानव रेशम के पास बैठकर उसके बाल सहलाने लगा। और रेशम मानव के सीने से लगकर सिसकने लगी। मानव को गुस्सा तो बहुत आ रहा था। लेकिन इस वक्त उसने अपने गुस्से को शांत कर रखा था। इस वक्त वह समझ रहा था कि रेशम को उसकी बहुत ज़रूरत है.. ।

रेशम के बाल सहलाते हुए धीरे-धीरे उसे प्यार से समझाता भी जा रहा था..
मानव को अब तक असली बात मालूम नहीं थी। वह घबराया हुआ था, उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि उसकी छोटी बहन के साथ आखिर हुआ क्या था? रेशम की टूटी फूटी सी हालत देखकर किसी के भी  दिमाग में सबसे पहले गलत बात ही आनी थी..।

“रेशु… उसने तेरे साथ ज़बरदस्ती… !”

रेशम अपने भाई का सवाल समझ गयी, और धीरे से ना में गर्दन हिला दी..

” भाई वो बार-बार अपने नाम की धमकी दे रहा था। मुझे मार रहा था, पीट रहा था। मुझसे गलत बातें कर रहा था। लेकिन काफी कुछ गलत करने के बावजूद उसने मेरे साथ जबरदस्ती नहीं की..।
यह हो सकता है उसे मौका नहीं मिला। क्योंकि जैसे ही वह अपनी लिमिट से आगे बढ़ने को हुआ, तभी दरवाजे पर कोई जोर जोर से दस्तक देने लगा  इस बीच में पता नहीं क्या हुआ, मेरी गर्दन में कुछ जोर से लगा और मैं बेहोश हो गई।
उसके बाद जब होश आया तो वह मेरे पास बैठा मुझे होश में लाने की कोशिश कर रहा था। मेरी आंखें थोड़ी सी खुली थी, तभी कुछ लोग दरवाजा खोलकर भीतर चले आए और उन्होंने ही लाइट भी जला दी।
तब मैंने उसका चेहरा देखा वह मुझे पकड़ कर बैठा था। मुझे जैसे ही सब कुछ समझ में आया मैंने उसे जोर का तमाचा लगा दिया भाई..!”

“बस तमाचा ही लगाया, उस गुंडे का मुहँ नोच खाना था.. ! रेशु मैं उस गुंडे को छोडूंगा नहीं.. !”

मानव ने तुरंत अपने पिता को भी फोन लगाकर सारी बातें बता दी। मानव के मुंह से यह सारी बातें सुनते हैं उसके पिता भी तुरंत अस्पताल के लिए निकल गये..

****

अनिर्वान, अखंड परिहार को पकड़कर अपने साथ थाने ले गया।
उसने अखंड को सलाखों के पीछे डाला और पंचनामें के आधार पर एफ आई आर तैयार करवाने लगा।

      उसी वक्त वहां धीरेंद्र और उसके साथी भी पहुंच गए। धीरेंद्र को यह सब करने में बहुत मजा आ रहा था।..
इस सब में धीरेंद्र का स्वार्थ निहित था।
पिछले तीन बार से वह ढेर सारी कोशिशों के बावजूद अखंड को छात्र संघ चुनाव में हरा नहीं पा रहा था। धीरेंद्र प्रजापति के ऊपर वहां के विधायक का हाथ था। वह उसे चुनाव लड़ने के लिए भी पैसे दिया करते थे। कॉलेज यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले लड़के लड़कियां कहीं ना कहीं इन नेताओं के बहुत काम आया करते थे। और बस इसीलिए विधायक जी चाहते थे कि उनका आदमी यानी कि धीरेंद्र प्रजापति यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत जाए। लेकिन पिछले 3 वर्ष से उसे हारते देखने के बाद उन्होंने धीरेंद्र को अल्टीमेटम दे दिया कि अगर इस बार भी चुनाव नहीं जीतता है तो, वह उसे देने वाला पैसा देना बंद कर देंगे।

धीरेंद्र प्रजापति का तो सारा कारोबार ही विधायक जी के पैसे से होता था। इसलिए इस बार उसके लिए चुनाव जीतना जीवन और मरण का प्रश्न हो गया था।

रेशम के कंधे पर बंदूक रखकर अब उसे अखंड को निशाना बनाना था, और यही उसने किया था।
रेशम के साथ जिस तरह की जोर-जबर्दस्ती उसने की थी, उसमें अखंड का नाम पूरी तरह फंस रहा था ।
और अगर अखंड पर केस बन जाता है या वह 2 दिन के लिए भी जेल दाखिल हो जाता है तो अगली दफा उसे चुनाव लड़ने का मौका ही नहीं दिया जाएगा।

छात्र संघ चुनाव के प्रोटोकॉल के अनुसार अगर किसी व्यक्ति पर किसी भी तरह का पुलिस केस या क्रिमिनल केस दर्ज है तो, वह चुनाव में खड़ा नहीं हो सकता।
कहीं ना कहीं धीरेंद्र अपनी चली हुई चाल में सफल होने लगा था..।

झूमती हुई चाल से धीरेंद्र थाने में दाखिल हुआ और अनिर्वान के ठीक सामने की कुर्सी पर जाकर बैठ गया। अनिर्वान रजिस्टर में कुछ दर्ज करने में व्यस्त था। उसने आंख उठाकर धीरेंद्र को देखा और कलम को नीचे रख कर अपने दोनों हाथ टेबल पर टिकाए धीरेंद्र को देखने लगा..

” तुम से बैठने को कहा है, मैंने..?”

” छात्र संघ के उपाध्यक्ष हैं, और अगले चुनाव के बाद अध्यक्ष बनने के पूरे चांस है। अब इसके बाद भी क्या बैठने के लिए आपकी इजाजत लगेगी.. ?”

अनिर्वान अपनी जगह से खड़ा हुआ और धीरेंद्र के पास पहुंच कर उसने उसकी कुर्सी को जोर से लात मारी। कुर्सी दूर छिटक कर गिरी धीरेंद्र अपनी जगह से नीचे गिर पड़ा…

” तुम कुछ भी बन जाओ, लेकिन मेरे थाने में मेरे नियम कायदे से ही चलना पड़ेगा…।
अगर यहां ज्यादा ऊंचा उङोगे उतनी ऊंचाई से नीचे गिरने की चोट भी महसूस करनी पड़ जाएगी, समझे..!”

धीरेंद्र गुस्से में उठकर खड़ा हो गया..

” आपका थाना है तो सिर्फ आप बैठेंगे? बाकी लोग क्या खड़े रहेंगे?”

“बिल्कुल बैठ सकते हैं लेकिन पूछ कर ! बैठ जाओ !”

धीरेन्द्र इस वक्त कुछ ज्यादा ही प्रसन्न था..
वो बड़े आराम से कुर्सी पर फ़ैल गया..

“कहिये, आप क्या पूछना चाह रहें ?”

“अखंड परिहार को कब से जानते हो ?”

“काफ़ी सालों से जानते हैं.. गुंडा है एक नंबर का ! गाँव के ऊँचे रईस घर का है इसलिए अकड़बाज है !”

“हम्म… और ? “

“और गुंडा है बस !”

“लड़कियों के मामले में कैसा है ?”

“लम्पट है साहब एक नंबर का.. लफ्फाज और कमीना है. रोज़ नयी लड़की चाहिए इसे.. ! अभी भी रेशम के पीछे पड़ा था..
जाने कब से उसे कह रहा कि हमारी बात मान जाओ तो हर सेमेस्टर में अच्छे नंबरों से पास करवा देंगे, पीजी सेलेक्ट करवा देंगे, नौकरी लगवा देंगे.. !”

“एक मिनट.. ये सब उसने तुम्हारे सामने भी बोला है.. !”

“बोलता ही रहता है हुज़ूर.. अब मेरे क्या और किसी और के क्या सामने.. घटिया सोच का गिरा हुआ आदमी है एकदम.. !”

“हम्म.. ठीक है.. तुम जाओ.. जब ज़रूरत होगी वापस बुलवा लूंगा !”

धीरेन्द्र और उसके साथी चले गए..
भाटी आकर अनिर्वान के सामने खड़ा हो गया..

“हुज़ूर एक बात समझ नहीं आई.. ? पूछ लें ?”

“पूछ लो !”

“जब विक्टिम बार बार बोल रहीं की अखंड परिहार ने ही उसके साथ दुराचार किया है, तब भी अब तक आपके कोप के प्रकोप से ये दुष्ट आत्मा बची कैसे रह गयी… क्यूंकि किसी लड़की के साथ दुराचार हुआ ये सुन कर तो आप तांडव मचाने लगते अब तक.. !”

“भाटी.. बैठो… !”

“जी साब !”

“पहली बात लड़की के साथ दुराचार नहीं हुआ है.. मतलब गलत व्यवहार तो हुआ है लेकिन रेप नहीं हुआ और यहीं बात मेरे दिमाग में हलचल मचा रहीं है..
इस केस में बहुत सी ऐसी बातें हैं जो केस को अलग सा रंग दे रहीं हैं..
पहला तो अगर लड़का किसी लड़की के साथ ज़बरदस्ती करना चाह रहा है, तो वो बार बार अपना नाम लेकर लड़की को डरायेगा नहीं..
उसका ध्यान तो पहले अपना काम निपटाने में रहेगा ना, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं है…
लड़के का ध्यान लड़की से प्यार से बात करने की जगह उसे डराने में लगा है.. !
अगर कोई लड़का किसी लड़की से ज़बरदस्ती करने वाला है तो वो अपना नाम बचाना चाहेगा या खुद होकर कहेगा की पुलिस से शिकायत कर दो मैं किसी से नहीं डरता.. !
एक और बात खटक रहीं, लड़का लड़की को एक अकेली जगह बुला कर उसके हाथ बांध देता है और कमरे की बत्ती बुझा देता है..
क्या इसका मतलब ये है की वो चाहता है लड़की उसे ना देख सकें ? और अगर वो ये चाहता है तो वो बार बार चीख कर अपना नाम क्यूँ बता रहा ?

दूसरी बात लड़के ने लड़की के अंदर आते ही बत्ती बुझा दी मतलब वो नहीं चाहता की लड़की उसे पहचाने फिर जब लड़की बेहोश हुई तब वो उसके पास बैठ कर उसे होश में लाने की कोशिश क्यूँ कर रहा ?.
और ख़ास कर तब जब वहाँ बाहरी भीड़ इकट्ठा होने लगी तब भी भागने की जगह वो लड़की के पास क्यूँ बैठा था.. ?”

“हुज़ूर हो सकता है वो ये साबित करना चाहता हो, कि इस सब में उसका हाथ नहीं है और वो भी उस भीड़ का हिस्सा है जो वहाँ पहुंचे हैं.. !”

“अगर यहीं साबित करना था तो बार बार वो रेशम के सामने अपना नाम वो भी सरनेम के साथ क्यूँ लें रहा था.. ?”

“हाँ हुज़ूर ये तो सोचने वाली बात है !”

“सोचने वाली नहीं बड़ी झोलझाल वाली बात है..। कुछ तो गड़बड़ है इस अब के पीछे..
भाटी तुम इस अखंड की जन्मकुंडली निकलवाओ !”

“जी हुज़ूर !”

“और सुनो… इस धीरेन्द्र का भी पत्रा निकलवाओ ज़रा… ये लड़का सही नहीं लग रहा मुझे !”…

“जी हुज़ूर.. !”

धीरेन्द्र अपने लड़कों के साथ वहाँ से बाहर निकल गया..
मस्ती में झूमता वो चला जा रहा था कि उसका एक पंटर बोल पड़ा..

“क्या बात है धीरू भैया, बड़े खुश नज़र आ रहें ?”

“खुश होने की तो बात ही है, मेरा सबसे बड़ा दुश्मन अंदर हो गया है.. अब पंकज को भी ठिकाने लगा ही दिया जायें.. !”

“लेकिन भाई एक बात समझ में नहीं आई ?”

“क्या ?”..

“आपने अखंड को वहाँ रेशम के साथ कैसे सेट किया..? मतलब अखंड इस बात के लिए तैयार कैसे हुआ, कैसे उसने रेशन को डराया.. और..

“पागल है क्या.. अखंड जैसे लड़के से कुछ भी ज़बरदस्ती करवाया जा सकता है क्या भला ?”

“फिर.. ये काम किया कैसे ?”

“वहाँ अखंड था ही नहीं.. अखंड का नाम ले के कर रेशम को डराने वाला मैं था.. !”

“क्या बात कर रहें हो भाई.. ? सच्ची आप थे.. ? लेकिन अगर आप थे तो फिर इतनी सुंदर लड़की को ऐसे ही जाने कैसे दे दिया.. मतलब कुछ किया क्यूँ नहीं ?”

धीरेन्द्र में चेहरें पर कुटिलता चमकने लगी..

“उसका कारण ये है की…

क्रमशः
.
aparna…

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