अपराजिता -40
पंकज की दम भर के पिटाई करने के बाद भी अखंड को ऐसा लग रहा था कि कहीं ना कहीं कोई तो ऐसी बात थी जो उसकी आंखों के सामने से गुजरते हुए भी उसे नजर नहीं आ रही थी। उसे इन बातों का आपस में कोई तार जुड़ा हुआ महसूस तो हो रहा था लेकिन वह उस तार को पकड़ नहीं पा रहा था.. ।
आखिर पंकज के दिल दिमाग में ऐसा क्या चल रहा था जो वह यह सब कर रहा था ?
अखंड रास्ते की चाय की गुमटी पर बैठा था कि तभी लल्लन भागता हुआ उसके पास आया..
” अखंड भाई एक बुरी खबर है..!”
अखंड का दिल जाने क्यों जोरों से धड़क रहा था..
वह घबराकर अपनी जगह से खड़ा हो गया..!
उसकी लाल-लाल बड़ी बड़ी आंखों को देखकर लल्लन भी घबरा गया! उसने अखंड के कंधों को पकड़ लिया..
” अखंड भाई, मेडिकल की एक लड़की कार से कहीं जा रही थी, उसका एक्सीडेंट हुआ है, चौक पर!
और एक्सीडेंट इतना भयानक हुआ है कि गाड़ी चलाने वाले के साथ साथ वो लड़की भी गई मारी गई..!”
“क… क… कौन.. कौन थी.. !”
कहीं वो रेशम तो नहीं थी, यह दिल में आते ही अखंड की ज़बान लङखङाने लगी, वह ठीक से सवाल भी नहीं कर पाया और लल्लन ने अखंड को गले से लगा लिया..
“नहीं ……. भाभी नहीं है.. !”
अखंड ने गहरी सी सांस ली और अपनी बढी हुई धड़कनों को सम्भालने की कोशिश करने लगा..
“भौजाई को तो अभी अभी लाइब्रेरी के पीछे के स्टोर रूम की तरफ जाते हुए देखें हैं.. !”
गोलू ने कहा..
अखंड तुरंत गोलू की तरफ देखने लगा।
” तुम खुद देखें हो ?”
“हाँ खुद ही देखें हैं.. । हम वहां नल पर पानी पी रहे थे, तभी पास में प्रजापति का चमचा है ना मनोज वो आया, वहीं बताया की भौजाई स्टोर रूम की तरफ आपसे मिलने गयी है..।
हम उस टाइम आपको देखें नहीं रहें तो हमें लगा आप ही से मिलने गयी होंगी, लेकिन आप तो यहाँ बैठे है..
फिर भौजाई अब तक लौटी काहे नहीं ?”
अखंड को समझ में आ गया कि उसका दिल बेवजह नहीं धड़क रहा था। उसे पता नहीं क्यों लेकिन आज सुबह से ही लग रहा था कि उसके किसी बहुत करीबी के साथ कुछ गलत होने वाला है।
उसका ध्यान इस बात पर नहीं गया था कि वह करीबी रेशम हो सकती है। सबसे पहली बात तो मेडिकल की किसी लड़की का रोड एक्सीडेंट में यूं मारे जाना भी बहुत आश्चर्य वाली बात थी। उस पर गोलू का उसे बताना कि उससे मिलने के लिए रेशम स्टोर रूम में जा रही है, और अब तक बाहर नहीं आई।
उसके दिल को हिला गया।
वो अपनी जगह से उठा और तेजी से भागता हुआ स्टोर रूम की तरफ दौड़ पड़ा। गोलू और लल्लन भी उसे आवाज देते उसके पीछे भागने लगे…।
लल्लन और गोलू भाग ही रहे थे, कि उनके साथ भागते मनोज ने अचानक लल्लन को पीछे से गर्दन पर एक थप्पड़ लगा दिया।
लल्लन ने पलटकर गुस्से में घूरकर उसे देखा और उससे इस थप्पड़ का जवाब पूछने लगा।
मनोज ने हंस कर उसे इशारे इशारे में कहा कि वह सिर्फ मजाक कर रहा है। उसकी यह हरकत लल्लन और गोलू दोनों पसंद नहीं आई, और दोनों रुक कर उससे बहस करने लगे।
इस सब में अखंड अकेला ही स्टोर रूम की तरफ दौड़ लगा चुका था। मनोज ने बड़ी शातिर तरीके से गोलू और लल्लन को अपनी बातों में उलझा कर वहां रोक लिया। मनोज ने दूर खड़े अपने बाकी दोस्तों को इशारा किया और गोलू और लल्लन को खुद में उलझा रखा।
अखंड भाग कर स्टोर रूम के दरवाजे तक पहुंचा और बाहर हमेशा का लगा ताला ना मिलने से वह परेशान हो गया। उसने दरवाजे को खोलने की कोशिश की, लेकिन दरवाजा अंदर से बंद था।
उसका दिमाग ठनकने लगा। उसने जोर-जोर से दरवाजे पर दस्तक देनी शुरू कर दी। लेकिन दरवाजा नहीं खुल रहा था। लगभग 5-7 मिनट तक दस्तक देने के बाद उसने वहीं पड़े लोहे के एक बड़े सरोट को उठाकर दरवाजे पर मारना शुरू कर दिया था।
कुछ ऐसा हुआ कि दरवाजा खुल गया और अखंड तेजी से अंदर की तरफ गिर पड़ा। अंदर स्टोर रूम में अंधेरा था। वह धीरे से खड़ा हुआ और अपने मोबाइल को निकाल कर उसके टॉर्च को ऑन कर दरवाजे पर बत्ती ढूंढने लगा। वह धीरे-धीरे आगे बढ़ता जा रहा था, लेकिन उसे कुछ ठीक से नजर नहीं आ रहा था, तभी उसका पैर किसी चीज पर पड़ा और वह धड़ाम से जमीन पर गिर पड़ा…।
वो जमीन पर जहां गिरा, वही ठीक बगल में रेशम बेहोश पड़ी हुई थी। उसे हल्का हल्का सा होश आ रहा था, वह धीरे-धीरे चेहरा इधर-उधर घुमा रही थी…।
अखंड को जैसे ही महसूस हुआ कि उसके आसपास कोई चीज है, उसने धीरे से हाथ उस तरफ बढ़ाना शुरू किया। इसके साथ ही मोबाइल की रोशनी भी उधर डाली।
मोबाइल की रोशनी में उसे किसी का शरीर नजर आया। धीरे से उसने मोबाइल को ऊपर बढ़ाना शुरू किया और जैसे ही उसकी नजर रेशम के चेहरे पर पड़ी, वह स्तब्ध रह गया।
उलझे बिखरे से चेहरे पर फैले बाल, पसीने से तरबतर चेहरा,चेहरें पर जगह जगह से बहता ख़ून, गले और गालों पर नाखूनों के निशान..।
उसकी हालत देख अखंड को लगा जैसे उसे साँस आनी बंद हो गयी है..।
बड़े धीरे से उसने हाथ रेशम की तरफ बढ़ाया और उसके गालों पर थपकी देकर उसे जगाने की कोशिश करने लगा….
इधर उधर ढूंढने पर भी उसे रेशम का दुपट्टा नज़र नहीं आ रहा था…।
रेशम के कपड़ों की अस्तव्यस्त हालत देख अखंड को रुलाई फूटने लगी..।
वो ज़मीन पर पालथी बना कर बैठा था.. उसने धीरे से रेशम को खींच कर ऊपर उठाया और उसके पीछे से खुले ब्लाउज़ की चेन चढ़ा दी..।
और उसी वक्त धीरे से रेशम ने ऑंख खोल दी..
“छोड़ दो, मुझे छोड़ दो.. !”
अखंड को रेशम को देख कर दया आने लगी थी…
रेशम आधी बेहोशी की हालत में भी खुद को बचाने के लिए जी जान से जूझ रहीं थी, उसके हाथ वापस चलने लगे थे..पैर पटकने लगी थी..
अखंड ने धीरे से उसके बांधे हुए हाथ खोल दिये..
और तभी स्टोर रूम की बत्तियॉँ अचानक जल गयी..
धीरेन्द्र और उसकी टोली धड़धड़ाते हुए अंदर दाखिल हो गयी…
उन लड़कों में से एक के हाथ में पानी की बॉटल मौजूद थी..
धीरेन्द्र अखंड को देखते ही चीख पड़ा..
“अखंड… ये तूने क्या कर दिया.. ?”
अखंड ने कातर नजरों से धीरेन्द्र को देखा..
“हमने कुछ नहीं किया धीरेन्द्र.. यक़ीन करो हमारा ! हम जब यहाँ आये तो ये कमरा अंदर से बंद था, हमने बाहर से बड़ी मुश्किल से इसे तोडा है.. हम जब यहाँ पहुंचे ये बेहोश.. …
“अखंड सिंह परिहार, आज तक गुंडागर्दी में ही तेरा नाम ख़राब था, लेकिन आज ये काण्ड कर तूने साबित कर दिया की तू बड़ा ही घिनौना इंसान है.. !”
धीरेन्द्र उस पर आक्षेप लगा रहा था कि भागती हुई पूर्वा भी वहाँ पहुँच गयी..।
इतने लड़कों के बीच घिरी ज़मीन पर आधी बेहोशी की हालत में अखंड की गोद में पड़ी रेशम को देख पूर्वा सिहर उठी..।
वो चीख कर रेशम के पास बैठ गयी, उसने अखंड की बाँहों से रेशम को छुड़ा कर खुद पकड़ लिया..
पूर्वा के आँसू बहने लगे..
धीरेन्द्र ने धीरे से पानी हाथ में लें कर रेशम के चेहरें पर डालना शुरू कर दिया..
रेशम ने धीमे से आंखें खोल दी..
“रेशम तू ठीक है.. ठीक है ना.. चल उठ, हम हॉस्पिटल चलते हैं.. !”
होश में आते ही रेशम को जैसे सब कुछ एकदम से याद आ गया और वो सिहर उठी..
उसने पूर्वा को देखा और उसके सीने में अपना मुहँ छिपा लिया..
अब तक कमरे में रौशनी हो जाने से अखंड को दूर पड़ा रेशम का दुपट्टा भी नज़र आ गया था, वो तेज़ी से दुपट्टा उठा लाया और रेशम की निरावरण पीठ पर डाल कर उसे अच्छे से लपेट दिया..।
धीरेन्द्र के चेहरें पर एक कुटिल मुस्कान चली आयी..
“रेशु… ये किसने किया.. ?
पूर्वा का सवाल हवा में ही तैर कर रह गया उसके पहले धीरेन्द्र ज़ीर से चिल्ला उठा..
“अखंड परिहार, यूँ आंचल ओढ़ा देने से तुम्हारे पाप कम नहीं हो जायेंगे… इस अकेले अँधेरे कमरे में उस मासूम के साथ क्या खिलवाड़ कर रहें थे तुम उस के साक्षी हम सब हैं.. समझे ?”
“हमने कुछ नहीं किया.. !” अखंड चीख पड़ा और तभी एक झन्नाटेदार थप्पड़ उसके गाल पर पड़ा और वो आश्चर्य से सामने खड़ी रेशम को देखने लगा..
रेशम उसे घूरती खड़ी थी..
अपनी सारी हिम्मत समेट कर वो उसके सामने खड़ी थी..
आज पहली बार दोनों का यूँ आमना सामना हुआ था, दोनों ही एक दूसरे की आँखों में देख रहें थे..
रेशम की दायीं ऑंख के ऊपर एक कट लग गया था जहाँ से ख़ून की बूँद टपक कर उसकी गहरी पलक के बाल पर अटक गयी थी…
उसकी आँखों से लगातार बहते आँसुओ से उसका मोटा काजल जगह जगह से फ़ैल कर चेहरें के गोरे रंग पर कालिख के धब्बे बन उभार आया था..।
आंखें रोते रहने से लाल पड़ गयी थी, उनमे सूजन सी आ गयी थी..
होंठो की लिपस्टिक होंठो से इधर उधर फ़ैल गयी थी..। बालों का हाल और ख़राब था.. चेहरे पर मारपीट के निशान उभर आये थे..।
गर्दन पर नकोडे जाने से धारियां उभर गयी थी..
कमरे में रौशनी हो जाने से रेशम का लुटा पिटा सा अवतार साफ़ नज़र आ रहा था और उसकी हालत देख अखंड को रोना आने लगा था।
वो उसे समझाना चाहता था, संभालना चाहता था। लेकिन यहाँ तो उलटी गंगा बहने लगी थी.. ।
रेशम का तमाचा अखंड को हिला कर रख गया..
“मैंने कुछ नहीं किया है… रे.. रेशम !!”
अटक अटक कर उसने अपनी बात कहीं.. तब तक दरवाज़े से लल्लन और गोलू भी भीतर चले आये….
और धीरेन्द्र अखंड पर टूट पड़ा..
” साले.. बनने को युनिवर्सिटी का अध्यक्ष बन गया और तमीज चवन्नी भर भी नहीं.. उस लड़की की आबरू लूट ली.. छी… थू है तुझ पर..।
लानत है अखंड परिहार, लानत है तुझ पर..।
धीरेन्द्र अखंड पर गालियां बरसाता रहा और उसके अंधभक्त अखंड पर पिल पड़े..
हालाँकि अखंड अकेला ही उन सबके लिए काफ़ी था..
उसका राजपूती ख़ून उबल पड़ा और उसने बचपन से अपने घर के आंगन में कर रखी वर्जिश का फ़ायदा उठाते हुए हर एक को पटखनी दे दी..
धीरेन्द्र भी अखंड से उलझ पड़ा..
अखंड के दो हाथ पड़ते ही धीरेन्द्र का जबड़ा हिल गया उसके माथे से ख़ून की धार बह निकली, लेकिन यहीं तो वो चाहता था..
उसने अपना सारा ज़ोर लगाते हुए भी सिर्फ अखंड की पीठ उसकी बाँहों और गर्दन पर नाखूनों के ही निशान बना दिये..
वहाँ मौजूद धीरेन्द्र की अंधभक्त सेना को भी ये समझ नहीं आ रहा था कि धीरेन्द्र आखिर करना क्या चाहता है.. ?
गोलू भाग कर प्रोफेसर साहब को बुला लाया..।
वो अपने साथ सिक्योरिटी के आदमी भी साथ लेते आये..
सिक्योरिटी वालों ने पूरा दम लगा कर आपस में भिड़े धीरेन्द्र और अखंड को अलग कर दिया..
प्रोफसर साहब ने रेशम की हालत देखी और तुरंत गाड़ी मंगवा कर उसे पूर्वा के साथ हॉस्पिटल भेज दिया…
प्रोफ़ेसर साहब बुज़ुर्ग व्यक्ति थे, उनके भी दो बेटियां थी इसलिए फ़िलहाल रेशम की हालत देख उन्हें ज़ोरों का गुस्सा चढ़ आया था..
उन्होंने आगे बढ़ कर धीरेन्द्र और अखंड दोनों को थप्पड़ लगा दिया..
“एक लड़की की जान पर बन आई है और तुम लोग यहाँ अपनी मर्दानगी दिखाते आपस में जूझ रहे हो.. लानत हो तुम दोनों पर ही..।”
प्रोफेसर साहब ने एक नज़र वहाँ मौजूद हर लड़के पर डाली और वापस बोलने लगे..
“ये जो भी है पुलिस का मामला हो चुका है.. मैं पुलिस को बुला कर उस लड़की से मिलवाने जा रहा हूँ.. तुम सब को सख्त हिदायत देकर जा रहा हूँ, इस मामले को खुद तक ही रखना.. अगर यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों तक इस कमरे की बातें पहुंची तो मुझ से बुरा कोई नहीं होगा….।
उस लड़की की इज्जत की बात है..।
वो पुलिस में जिसका नाम लेगी उसका जेल जाना तय है, लेकिन उस लड़की का नाम कहीं बाहर तुम लोगों की वजह से ख़राब नहीं होना चाहिए.. !”
तमतमाए से प्रोफेसर मुड़ कर बाहर निकल गए..
जाते जाते उन्होंने शहर के पुलिस विभाग में फ़ोन मिला लिया…
कुछ देर बाद ही अस्पताल परिसर में पुलिस की गाड़ी आ कर रुकी और उस गाड़ी में से अनिर्वान भरद्वाज उतरा और लम्बे लम्बे डग भरता अस्पताल के अंदर दाखिल हो गया…
क्रमशः
aparna…
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