अपराजिता -38

अपराजिता -38

अखंड के माथे पर बल पड़ गए.. उसने पंकज को नीचे उतारा और एक तमाचा उसे रसीद करने के बाद उससे पूछ बैठा..

“अब बताओ.. कौन सी तस्वीर की बात कर रहें हो तुम.. ?”

पंकज के शातिर दिमाग ने तुरंत दौड़ना शुरू कर दिया, उसे उसी वक्त समझ में आ गया कि अखंड को अब तक फोटो के बारे में मालूम नहीं चला है..!

“वो… अखंड भइया बात दरअसल ये है कि एन्युअल डे की फोटो सभी को चाहिए थी… उन्हें ही धीरेन्द्र प्रजापति भी मांग रहा था..
बस हमें लगा आप को शायद ये बात पसंद नहीं आएगी की रेशम की फोटो और किसी के पास जायें, बस वहीं कह रहें थे.. !”

“कह तो बेटा तुम कुछ और रहें थे, सच सच बताओ वरना थोबड़ा तोड़ देंगे तुम्हारा.. !”

और उसके साथ ही अखंड के हाथ का एक झन्नाटेदार थप्पड़ पंकज के चेहरे का भूगोल बिगाड़ गया..

“बोलो बे.. बताओ !”

“सच्ची कह रहें भैया, अम्मा कसम ! अगर हम झूठ बोल रहें होंगे तो अभी यहाँ बिजली गिरे और हम आज के आज मर जायें !”

अखंड ने एक पूरी नज़र से उसे देखा और उसकी कॉलर पकड़ कर दाँत पीसते हुए उसे झिंझोड़ दिया…

“साले, अगर मेडिकल की तस्वीरें यहाँ से बाहर गयी ना तो सोच लेना हम तुम्हारा क्या हाल करेंगे !”

“अरे काहे जाएँगी भैया जी.. हम बोले ना अब किसी को ना देंगे !”

“अब किसी को ना देंगे से मतलब ?”

ये पूछते हुए अखंड का एक तेज़ मुक्का पंकज की नाक फोड़ गया..
पंकज के चेहरें से बलबला के ख़ून बहने लगा और इस प्रहार से वो बौखला गया.. उसकी सहन शक्ति चूक गयी..
चेहरें पर चढ़ा मुखौटा उसने उतार फेंका..

होंठो ही होंठो में एक भद्दी सी गाली देने के बाद उसने अपने मोबाइल पर धीरेन्द्र को भेजी हुई अखंड और रेशम की आपत्तिजनक तस्वीरें अखंड के सामने खोल दी..

“ये देख… ये किया है मैंने..! ये भेजा है धीरेन्द्र प्रजापति को..
   तेरी और तेरी लैला की तस्वीरें बनवायी है मैंने, और अब जा रहा हूँ इन तस्वीरो को वायरल करने..।
साले खुद को समझता क्या है.. तमीज़ से बात कर रहा हूँ, तब भी रुकने की जगह मुझे ढोल समझ कर बजाये जा रहा है.. ।
तुझे क्या लगता है हाथ चलाना तुझे बस आता है.. !”

और पंकज ने भी एक घूंसा अखंड के चेहरे पर दे मारा….
अखंड ने चेहरा दूसरी तरफ घूमा कर खुद को बचाया और पंकज के हाथ से उसका नया मोबाइल लेकर उन तस्वीरो को देखने लगा..

“साले तुम्हारा तो फ़ोन तोड़ दिये थे हम… ये कहाँ से ले आये..?”

अपनी और रेशम की तस्वीरें देख देख कर अखंड का पारा उबलने लगा..।

“देख लें कमीने देख लें… तेरी लैला भी वहाँ बिसूर रहीं है देखने के बाद से ही.. !”

रेशम रो रहीं है ये सुनते ही अखंड ने पलट कर पंकज  को देखा और उसके सीने में एक घूंसा लगा दिया.. 
पंकज अपना पेट पकड़ कर वहीँ लोट गया..
अखंड ने उसे पीटना जारी रखा..
पंकज के दोस्तों की हिम्मत नहीं हो रहीं थी कि वो पंकज को अखंड से बचा सकें..

रास्ते में दो लड़कों के बीच झूमाझटकी हो रहीं हो और भीड़ इकट्ठा ना हो ऐसा कैसे संभव है… धीरे धीरे वहीँ के लोग जमने लगे, और आपसी खुसुर फुसुर भी शुरू हो गयी कि ये दो लोग क्यूँ भिड़े हुए हैं.. ?

इस सारी भीड़ में धीरेन्द्र के भेजें उसके पंटर भी घुस गए और लोगों के बीच ज़बरदस्ती अपना ज्ञान बाँटने लगे..

“सब लड़की का चक्कर है भाई साहब.. अब ये यूनिवर्सिटी के गुंडे आकर मेडिकल की लड़की को छेड़ेंगे तो यहीं तो होना है.. !”

एक लड़के ने अपने बगल खड़े चार लड़कों से कहा..

“मेडिकल की कौन सी लड़की.. ?”

“है कोई.. रेशम नाम है, बड़ी खूबसूरत है.. !”

बस इतना फैलाना काफी था… आसपास मौजूद लोगों में यहीं बातें शुरू हो गयी…

भीड़ में खड़े कुछ अधिक ही सज्जन पुरुषों ने अपनी भलमनसाहत दिखाते हुए वीडियो भी बनाना शुरू कर दिया..
वीडियो में अखंड पंकज की ज़बरदस्त पिटाई करता नज़र आ रहा था..।

लल्लन और गोलू उसे रोकने में लगे थे.. लल्लन की नज़र ऐसे ही किसी वीडियो मेकर पर पड़ी और वो उसका मोबाइल बंद करवाने उसकी तरफ लपका और उसी वक्त दूर से प्रोफेसर मित्रा सर की तेज़ आवाज़ उन लड़कों के कानो में पड़ी..

“क्या हो रहा है वहाँ.. ? चलो सब जाओ यहाँ से.. !”..

प्रोफेसर को आते देख लड़के वहाँ से छंटने लगे..

“अखंड… !”  उनकी आवाज़ ज़ोर से गूंज गयी और अखंड ने पंकज पर तान रखा घूंसा वापस ले लिया..
पंकज की उसने मरते दम तक पिटाई की थी..
पंकज का चेहरा खूनाखून हो चुका था….

अखंड की भी हालत कुछ ख़ास ठीक नहीं थी…
पर प्रोफेसर की बात सुन कर उसने पंकज को वैसी ही अधमरी हालत में छोड़ दिया… और वहाँ से चला गया..

प्रोफेसर के चिल्लाने पर पंकज के दोस्त उसे उठा कर अस्पताल ले गए..

*****

रेशम के मोबाइल पर एक बार फिर उसी नंबर से मेसेज आने लगा..

“लाइब्रेरी के पीछे वाले स्टोर रूम में आकर मिलो, रात आठ बजे।
वरना ये तस्वीरें सीधे शहर के लोकल न्यूज़ चैनल तक पहुंचा दूंगा…
   तुम्हारा अखंड !!”

रेशम झुंझला उठी…
उसने लाचारगी से पूर्वा की तरफ देखा..

पूर्वा की भी समझ से बाहर था कि क्या किया जायें..

“मैं कहती हूँ, चल एक बार मिल लेते हैं.. तू जितना बड़ा गुंडा उसे समझती है ना, उतना बड़ा गुंडा वो है नहीं..
मतलब गुंडा तो है, लेकिन मैंने अब तक जितने भी लोगों से पता किया उसके बारे में किसी ने भी बहुत गलत कुछ कहा.. !”

“इसके डर के मारे नहीं कहते, वरना है तो गुंडा ही.. ! मुझे बार बार धमकी दे रहा है, और तू कह रहीं उतना बड़ा गुंडा नहीं है.. छी मुझे नफरत हो रहीं इस लड़के से.. !”

वापस एक बार फिर मेसेज की बीप बजने लगी..

“जल्दी करना.. अखंड परिहार समय का बड़ा पाबंद है..
वैसे तुम्हें लग रहा मैं तुम्हारी इन तस्वीरो को और कहीं नहीं भेज सकता है ना..
लो अभी के अभी तुम्हें उदाहरण दिखाये देता हूँ..।”

मुश्किल से तीस सेकंड बीते होंगे की निहाया भागती हुई रेशम और पूर्वा के पास चली आई..

“ये क्या है रेशम ?”

उसने रेशम की तस्वीरें उसके सामने खोल कर दिखा दी..

रेशम सर पकड़ कर बैठ गयी..

“चल हम डीन सर से शिकायत कर देते हैं.. !”

पूर्वा ने कहा और उसी वक्त अगला मेसेज आ गया..

“जिस किसी के पास शिकायत करने जाओगी, तुम्हारे उसके पास पहुँचने से पहले तुम्हारी ये तस्वीर वहाँ पहुँच जायेगी..
अरे सिर्फ एक बार मिलना ही तो चाहता हूँ… आ जाओ ना !
  बस एक बार तुमसे मिलना बस है… मैं कोई हरकत नहीं करूँगा अगर तुम शाम में वहाँ पहुँच जाओगी.. !”

आखिर रेशम ने तय कर लिया की वो अखंड से  मिलने जायेगी…

वैसे भी अब आठ बजने में कोई बहुत ज्यादा वक्त नहीं बाकी था….

रेशम उठ कर इधर से उधर टहलने लगी….
उसके मन में जो हाहाकार मचा था वो सिर्फ वहीं समझ पा रहीं थी…
उसके मन में आया, एक बार अपने भाई को सब कुछ बता दे लेकिन फिर दूसरे ही पल ये विचार भी आ गया की कहीं उसके मोबाइल पर ये घटिया तस्वीरें पहुँच गयी तो क्या होगा.. ?

आज जो माँ जो भाई उस पर खुद से ज्यादा यक़ीन करते हैं वो अपनी आँखों के सामने ऐसी तस्वीरो को देख कर क्या कहेंगे..?

वो खुद उन लोगों से आंखें कैसे मिला पायेगी….?

अपने मन में घुमड़ते सवालों को मन में ही दबाये वो लाइब्रेरी के पीछे की तरफ बने कमरे की ओर बढ़ गयी…

पूर्वा भी उसके साथ थी! लेकिन तभी रेशम के मोबाइल पर वापस मेसेज आ गया..

“उन तस्वीरो में तो फिर भी हम दोनों ने कपड़े पहन रखें हैं.. बाकी तस्वीरों में तो वो भी नहीं है.. भेजूं क्या पूर्वा के फ़ोन पर.. ?
अगर नहीं चाहती तो उसे वापस चलता करो !”

रेशम चौंक कर इधर उधर देखने लगी.. 

आखिर कहाँ खड़ा था ये अखंड परिहार, जहाँ से उसकी पूरी नज़र रेशम और पूर्वा पर बनी हुई थी..
पर अखंड होता तब तो दिखता..?

रेशम की नजर अखंड को ढूँढ रहीं थी, इसलिए उससे कुछ दूर चल रहें धीरेन्द्र पर उसने ध्यान ही नहीं दिया…

रेशम ने पूर्वा को वापस भेजा और सधे हुए कदम रखती लाइब्रेरी के पीछे मुड़ गयी..

जाते जाते उसे रास्ते पर पड़ा एक ब्लेड नज़र आया और उसने उसे उठा कर अपने हाथ में रख लिया….

क्रमशः

aparna…

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