अपराजिता -51

अपराजिता -51

अब तक आपने पढ़ा…

दुर्वागंज गांव में एक प्रतिष्ठित परिवार की बेटी कुसुम कुमारी को गांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाले डॉक्टर राजेंद्र कुमार से प्यार हो जाता है! लेकिन दोनों के बीच जाति की ऊंची दीवार खड़ी है। इसके बावजूद कुसुम कुमारी को ऐसा लगता है कि वह अपने बड़े भाई चंद्रभान से बात करके घर पर सभी को राजेंद्र से शादी करने के लिए मना सकती है। लेकिन कुसुम कुमारी अपने घर परिवार में बात कर पाती उसके पहले ही चंद्रभान कुसुम और राजेंद्र को गांव के बाहर की चाय की गुमटी में एक साथ देख लेता है। जहां पर कुसुम के साथ उसकी सहेली भावना भी मौजूद होती है इसके बाद कुसुम को घर पर नजर बंद करने के साथ ही चंद्रभान कुसुम की सहेली भावना और राजेंद्र की जबरदस्त पिटाई करके उन दोनों को धमका कर छोड़ देता है…
इस बात के घर में पता चलते ही कुसुम की भाभी सुजाता और कुसुम की मां चंद्रभान पर नाराज भी होती हैं ।
उन दोनों को ही यह लगता है की भावना पर हाथ उठाकर चंद्रभान ने सही नहीं किया और इसीलिए सुजाता भावना के सामने हाथ जोड़कर उसे मना कर अपने घर ले आती है…
इसी सबके साथ भावना की एक अलग कहानी जुड़ी हुई है। भावना के पिता कई सालों पहले कमाई करने के लिए दुबई गए थे। जिसके बाद वह अब तक नहीं लौट कर आए। हां हर महीने उनका भेजा हुआ रुपया जरूर भावना और उसकी मां को समय से मिल जाता है।
लेकिन विगत 13-14 सालों में कभी भी भावना के पिता ने पलट कर गांव का रुख नहीं किया। भावना भी जरूरत भर की बातचीत ही किया करती थी, लेकिन जिस दिन चंद्रभान उसके साथ बदतमीज़ी से पेश आता है.. उस दिन भावुकता में बह कर भावना अपने पिता को अपनी तस्वीर भेजती है! और इसके साथ ही उनसे यह प्रार्थना भी करती है कि अब वह और उसकी मां यहां उनके बिना नहीं रह सकते, और वह दोनों यह गांव छोड़कर दुबई उनके पास चले आएंगे! इसके बाद भावना के पिता का लगभग रोज ही उसके पास संदेश आने लगता है। और वह लगभग रोज उनका हाल-चाल पूछने लगते हैं। एक दिन वह उसे फोन करते हैं और फोन पर उससे बातचीत करते हैं.. ।
बातों के दौरान वह फोन को वीडियो कॉल में बदल देते हैं। और तब भावना देखती है कि वह जिससे बात कर रही है वह भावना के पिता नहीं बल्कि उनके कमरे में उनके साथ रहने वाला लड़का निनाद है..।
इसके बाद भावना की 2 से 3 बार निनाद से बात होती है। लेकिन कभी भी फोन पर भावना के पिता सामने नहीं आते। भावना के मन में इस बात को लेकर एक उलझन सी बनी हुई है ।
अपनी उलझनों को दरकिनार कर भावना अब भी अपनी सहेली कुसुम को उसके प्यार से मिलवाने के लिए प्रयासरत है, और इसलिए वह कुसुम से कहती है कि एक महीने बाद वह राजेंद्र के साथ कोर्ट मैरिज करके इस गांव को छोड़ जाए। और इसके लिए आवेदन देने के लिए वह स्वयं राजेंद्र के साथ कोर्ट में जाती है। और जहां मजिस्ट्रेट के समक्ष अपना खुद का आई कार्ड प्रस्तुत कर अपने नाम से अप्लीकेशन जमा कर देती है…

इस कहानी के साथ ही रेशम की कहानी भी आपने पढ़ी।

    रेशम मेडिकल कॉलेज में अपनी पढ़ाई पूरी कर चुकी है… पढ़ाई पूरी करने के कुछ समय बाद वह मेडिकल ऑफिसर के पोस्ट के लिए आवेदन करती है। और एग्जाम में सेलेक्ट हो जाती है। इसके साथ ही उसके घर वाले उसकी शादी डॉक्टर अथर्व से करवा देते हैं.. ।
शादी के बाद रेशम को अथर्व के साथ खुलने में समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसका कारण उसका काला भयानक अतीत है..।

उस अतीत की भयानक परछाइयां आज भी रेशम को कंपा जाती है..
उस अतीत का नाम है अखंड सिंह परिहार..।

अखंड सिंह परिहार यूनिवर्सिटी का छात्र संघ अध्यक्ष है और यूनिवर्सिटी के छात्रों के हित में सदा कार्य करता है..।
रेशम को देखते ही उसे उससे पहली नज़र में प्यार हो जाता है..
लेकिन रेशम हमेशा ही अखंड को एक ज़िद्दी बिगड़ैल सनकी छात्र नेता समझ कर उससे दूर रहती है…

अखंड के दुश्मन कुछ ऐसी परिस्थितियां निर्मित कर जाते हैं कि रेशम को लगता है उसे अकेले कमरे में बुला कर उसके साथ गलत करने की कोशिश करने वाला लड़का अखंड है। और वो इस बात की शिकायत कर देती है..।
अखंड को पुलिस पकड़ कर ले जाती है.. जहाँ पुलिस कस्टडी से उसे चार नकाबपोश लड़के भगा कर निकाल ले जाते है। लेकिन इसी के साथ अस्पताल में भर्ती पंकज को कोई मार डालता है.. ।

एसीपी अनिर्वान भारद्वाज को इस बात से बड़ा धक्का लगता है क्यूंकि जाने क्यों उसे अखंड की बेगुनाही पर ही विशवास होता है..।

अखंड जेल से भाग कर सीधा रेशम के घर पहुँचता है, और उसे सच्चाई समझने की कोशिश करता है लेकिन रेशम का भाई मानव उसकी बात सुने बिना उसे मार पीट कर वापस पुलिस के हवाले कर देता है…

इधर राजेंद्र अब पूरी तरह से इस बात के लिए तैयार था, की वो और कुसुम दूर्वागंज से बाहर निकल कर अपनी अलग दुनिया बसा लेंगे.. इसलिए वो जिला अस्पताल में अपनी पोस्टिंग के लिए आवेदन देने के साथ ही अपने रहने की जगह का इंतेज़ाम भी कर आया..
इस सब में उसे अचानक कुसुम की याद आने लगी और वो उससे मिलने के लिए तड़प उठा..

अब आगे…

राजेंद्र से बात करने के बाद कुसुम ने मुस्कुरा कर अपना मोबाइल नीचे रखा और वापस मुड़ गई। लेकिन मुङते ही उसके चेहरे का रंग उड़ गया। क्योंकि उसके ठीक सामने उसकी भाभी सुजाता खड़ी थी। सुजाता एकटक उसे  ही देख रही थी..

” क्या हुआ राजकुमारी जी के प्रेम का चश्मा उतरा नहीं अब तक..?”

“भाभी… वो.. बात ये है की… भावना को हमसे कोई जरूरी बात करनी है। और इसीलिए वह हमें अपने घर बुला रही है..!”

” हां जानते हैं हम कि भावना आपको अपने घर बुला रही है। और वैसे भी अभी जिस भावना का फोन आया था ना, वह आपके इस घर में आपसे मिलने आ भी नहीं पाएंगी। लेकिन संभाल कर जाइयेगा, आपको अकेले शायद ही निकलने दिया जाए घर से..!”

“आप चलेंगी हमारे साथ ?”

” चलने को तो चले जाएंगे लेकिन अगर आपके भैया को भनक भी लग गई ना कि आप अब भी किसी प्रेम अग्नि में झुलस रही है, सच्ची कह रहे हैं वह आपके डाक्टर बाबू को उसी प्रेम अग्नि के अंगारों में जिंदा जला देंगे..!”

” भैया को कुछ पता चलने के पहले हम यहां से बहुत दूर निकल जाएंगे…!”

” अरे कौन कहां निकल जाएगा जरा हम भी तो सुने..?”

अपने घुटनों पर हाथों से मालिश सी करती दूसरे हाथ से कमर को सहारा देती कुसुम की बुआ जी कुसुम के कमरे में पधार गई..
   अचानक पधारी बुआ जी को देखकर कुसुम और सुजाता एक दूसरे को देखने लगी! सुजाता ने तुरंत अपने आप को संभाला और सर पर से आंचल लेकर बुआ जी के पैरों को छूकर आशीर्वाद ले लिया। मुस्कुराकर बुआ जी ने आशीर्वाद दिया और कुसुम के पलंग पर फैल गई..

” वैसे बुआ जी अचानक कैसे आना हुआ?” कुसुम से जैसे रहा नहीं जा रहा था। उसने लपक कर सवाल पूछ लिया..

“अचानक कहाँ बिटिया, हमे तो आना ही था ! बीस दिन बचा है तुम्हरे ब्याह को, हल्दी कूटने से लेकर नेग नावर संजोना, गहना गुर्रा जोड़ना, लेनी देनी संजोना, काम सारा पसरा पड़ा है..।
अब हम ही तो बडौती हैं घर की। तुम्हरी अम्मा कहाँ ये सब अकेले कर पायेगी..?
बस तुम्हारे बाबूजी का फ़ोन आया और हम तुरंत चले आये.. मोंटू के पापा को बोल दिए की तुम बेटा बहु के साथ आते रहना, हम अपने भाई के घर तैयारी करने के लाने जा रहे.. !”

कुसुम ने हामी भर दी…

“ए बहुरिया तुम टुकुर टुकुर काहे ताक रही, ज़रा चाय पानी कलेवा धर लाओ,हमारे लाने !”

“जी बुआ जी !”
.सुजाता कुसुम की तरफ देखती हुई नीचे चली गयी.. कुसुम भी उसके पीछे होने वाली थीं कि बुआ जी ने उसे टोक दिया। लेकिन बुआ जी की बात अनसुनी करती वो धड़धड़ा कर नीचे उतर गयी..

घर में सब को बुआ जी के पीछे व्यस्त देख वो चुपके से बाहर निकल गयी….

उसे लगा उसे किसी ने नहीं देखा, लेकिन ये उसकी भूल थीं.. उसे निकलते हुए चंद्रा के एक गुर्गे ने देख लिया और वो तेज़ी से अंदर चंद्रा के ऑफिस की तरफ भाग खड़ा हुआ..

क्रमशः

aparna…

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