अपराजिता -30
कुछ दिन और सरक गए, रेशम को अथर्व का साथ तो बहुत अच्छा लगता था! उसका प्यार से अपनी बाहों में भर लेना बहुत भाता था, लेकिन जैसे ही वह अपनी सीमाओं से बाहर जाने लगता जाने क्यों रेशम कसमसा कर रह जाती!
उसके कान में बार-बार वही आवाज गूंजने लगती, वही अंधेरा कोना, कानों के पास कानों में आग उगलती बिजली जैसी आवाज, पान तमाखू गुटके की मिली-जुली तेज गंध और यह सब दिमाग में कुछ इस तरह से चक्कर लगाता कि रेशम चाहते हुए भी अथर्व के साथ अपनी सीमाओं के पार नहीं जा पाती। अथर्व को भी धीरे-धीरे यह समझ में आने लगा था कि रेशम को खुलने में वक्त लगेगा। लेकिन वह भी इस बात से परेशान था कि आखिर उसकी नई नवेली को और कितना वक्त चाहिए? आजकल के लड़के लड़कियां जहां शादी तक का भी इंतजार नहीं कर पाते, वही उसकी ब्याहता बीवी शादी के 4 महीने बीत जाने पर भी उसके साथ खुलकर प्रेम नहीं कर पा रही थी…।
अथर्व खुद भी डॉक्टर था और स्त्री शरीर की जटिलताओं से भी वाकिफ था। बावजूद उसे लगा कि उसे अपने किसी डॉक्टर दोस्त से इस बारे में चर्चा करनी चाहिए…।
अथर्व की बैच के उसके दो दोस्तों मोनिका और राहुल ने शादी की थी और दोनों की ही दो दिन बाद पहली सालगिरह थी..।
तीनों एक ही अस्पताल में साथ काम किया करते थे…
टी ब्रेक में अथर्व राहुल के केबिन में पहुंच गया उसने अपनी चाय भी वही मंगाने के लिए कह दिया। राहुल ने अथर्व के चेहरे को देखते ही जान लिया कि वो किसी परेशानी में है..
“क्या बात है.. टेंशन में लग रहा ?”
” हां यार थोड़ी सी टेंशन वाली बात तो है..।”
“अबे यार… इतनी भी क्या जल्दी थी तुझे बाप बनने की ? अभी ले दे कर तो शादी हुई है। मुश्किल से तीन चार महीने बीते नहीं कि साले तुम बाप बनने की राह में निकल पड़े! अबे डॉक्टर होकर अगर तुम प्रिकॉशन के बारे में नहीं जानोगे तो लानत है तुम्हारी डिग्री पर..!”
” अरे मैंने कब बोला कि मैं बाप बनने वाला हूं..?”
” शक्ल में जैसे बारह बजाकर यहां आए हो ना, उससे तो यही लग रहा है बेटा कि तुम्हारे और तुम्हारे बीवी के बीच में कोई प्रॉब्लम तो है। और शादी के 3 से चार महीने में अगर पति महोदय ऐसे मुंह लटका कर आते हैं तो उसका एक ही मतलब निकलता है की बीवी अब असीमित काल के लिए दूरदर्शन बनने जा रही है.. !”
“वो तो वैसे भी दूरदर्शन बनी बैठी है !”
“मतलब… मायके से मोह ज्यादा है क्या?”
“मायके का मोह तो रहता ही है लड़कियों को.. लेकिन वो बात नहीं.. !”..
“फिर.. ? और क्या समस्या है ?”
एक गहरी सी साँस लेकर अथर्व ने राहुल को देखा..
“बात दरअसल ये है की.. हम दोनों में अभी तक… अह्ह्ह मेरा कहने का मतलब है.. हम…
“वेट अ मिनट.. तुम दोनों अब तक फिज़िकल नहीं..
“हम्म…
“लेकिन क्यूँ.. ?”
“वहीं तो समझ नहीं आ रहा.. मतलब वो शायद घबरा जाती है.. या इतनी जल्दी रेडी नहीं है.. !”
“कहीं ऐसा तो नहीं की उसकी लाइफ में कोई और हो ?”
राहुल की कही ये बात अथर्व ने उसी वक्त सिरे से नकार दी..
” पॉसिबल ही नहीं है यार। हमारे कॉलेज से तो पास आउट है। हमारी जूनियर थी और उसका कोई भी लफड़ा चक्कर होता तो आसानी से पता चल जाता..!”
“ओके… तो फिर.. क्या बात हो सकती है ?”..
“कैसे बताऊँ यार? मैं खुद तुझसे यही पूछना चाहता था कि …. मतलब क्या यह नॉर्मल है? क्या अरेंज मैरिज में ऐसा ही होता है..!”
” अब ये मैं कैसे बता सकता हूं ? मेरी तो लव मैरिज थी!”
राहुल और अथर्व की बातों के बीच ही मोनिका भी उनके कमरे में चली आई। अपनी चाय के कप थामे वह भी एक कुर्सी खींच कर बैठ गई। लेकिन उसके आते ही अथर्व एकदम शांत हो गया। मोनिका ने घूर कर उन दोनों को देखा और फिर राहुल से इशारों में ही पूछ लिया कि क्या बात है राहुल ने धीरे से ना में गर्दन हिला दी…।
पर मोनिका चुप बैठने वालों में से नहीं थी उसने उन दोनों से बात उगलवा ही ली.. !
” अगर सच कहूं तो लड़कियां बहुत इमोशनल होती है। हम हर बात को अपने इमोशन से जोड़कर देखते हैं। जब हमारी शादी भी होती है ना तो, हम जब तक उस लड़के पर पूरी तरह से विश्वास ना करें अपने आपको उसे सौंपने में बहुत झिझकते हैं। हां यह और बात है कि बहुत सी जगह पर लड़कियों के दिमाग में पहले से इतनी भ्रांतियां भर दी जाती हैं कि वह बहुत बार अपने पति पर पूरी तरह से विश्वास कायम किए बिना भी खुद को सौंप देती है। सिर्फ इस डर में कि कहीं उनका पति इसी कारण उन्हें छोड़ ना दे…।
अगर पुरुष की नजर से देखो तो बात बहुत छोटी सी है। लेकिन एक स्त्री की नजर से देखो तो बात बहुत बड़ी है।
एक स्त्री अपनी देह उसी को सौंप सकती है जिसे उसने अपना मन सौंप दिया हो..।
हालाँकि हमारे हिंदुस्तान में बहुत सी ऐसी लड़कियां हैं, जिन्हें शादी नहीं समझौता करना पड़ता है और वह समझौता उन्हें अपने ससुराल में हर एक दिन, और हर एक रात करना पड़ता है। लेकिन रेशम के केस में जितना मुझे समझ में आ रहा है, उसने तुमसे शादी कर कोई समझौता नहीं किया है।
वह तुमसे प्यार करती है, और इसीलिए वह अपने आप को भी वक्त देना चाहती हैं, तुम्हारे साथ खुशहाली से आगे बढ़ने के लिए।
मुझे ऐसा लगता है कि बचपन में या कुछ बाद में उसके दिमाग में भी बड़ी बुजुर्ग औरतों ने कुछ ना कुछ ऐसी बातें डाली होंगी जिनके कारण उसके दिमाग में फिजिकल रिलेशन को लेकर एक टैबू या एक डर बैठा हुआ है। और शायद अपने उस डर को जब तक जीत नहीं लेगी वह तुम्हारे साथ आगे नहीं बढ़ पाएगी। मैं तुम्हें यही सलाह दूंगी अथर्व के उसे पत्नी बनाने से पहले उसे दोस्त बनाओ। उसके दिल की गहराइयों में झांक कर देखो कि कहीं कोई ऐसा डर तो नहीं छिपा, जिसके कारण वह अपनी सीमाओं से आगे चाह कर भी बढ़ नहीं पा रही…।”
अथर्व ने धीरे से हामी भरी और उठकर अपने केबिन में चला गया..
” अच्छा सुनो, परसों हमारे साथ ही डिनर पर जाना है तब तुम रेशम को लेकर आना, थोड़ी देर मेरे साथ बैठेगी तो मैं उसे काफी सारी समझाइश दे दूंगी ओके..!”
अथर्व ने हाँ में गर्दन हिलाई और मुस्कुरा कर चला गया..
मोनिका को क्या और कैसे समझाता कि वह खुद रेशम को कितना ज्यादा वक्त दे रहा है ? वह वैसे भी रेशम पर कोई भी मालिकाना हक नहीं जताता! पति के अधिकार और कर्तव्य को तो उसने एक तरफ रख छोड़ा है, वह हमेशा उसके साथ एक दोस्त का सा व्यवहार ही करता है। बावजूद रेशम को वक्त लग रहा है। वह खुद नहीं जानता कि रेशम कितना वक्त लेगी। लेकिन रेशम के स्वभाव में एक जो अजीब सा परिवर्तन आ जाता है उस बात से वह घबरा जाता है।
पूरे दिन चहकती फिरने वाली रेशम रात आते ही घबराने क्यों लगती है? जब वह उसे प्यार से गले लगाता है या उसका माथा चूमता है, उसके गालों को सहलाता है, वह बेहद खुश और खिली खिली सी लगती है, लेकिन जैसे ही वह थोड़ा सा भी आगे बढ़ना चाहता है, रेशम की साँसे अप्रत्याशित तरीके से बढ़ने लगती हैं। उसकी घबराहट, उसका चौंकना उसके माथे का पसीना, उसकी आंखों के आंसू, सब कुछ इस तरह से आकर रेशम को अपने घेरे में ले लेते हैं कि उसके बाद रेशम रात भर के लिए एक अजीब गहरे से सन्नाटे में डूब जाती है। उसने कई बार आधी आधी रात को जाग कर देखा है कि रेशम रात भर फिर सो नहीं पाती। आखिर उसकी इस परेशानी के पीछे ऐसा कौन सा कारण है? क्या बचपन में कभी रेशम को चाइल्ड अब्यूस का शिकार तो नहीं होना पड़ा था…?
अथर्व के दिमाग में ढ़ेर सारी बातें चल रहीं थी और उन बातों को सोचता हुआ अथर्व एक निर्णय पर आ चुका था…
शाम में वो घर जाते हुए एक अलग उत्साह में था.. आज उसके माता पिता उसके छोटे भाई आरव को लेकर उसकी बुआ के घर के लिए निकले थे.. उनके यहाँ गृह प्रवेश होना था, जिसमे शामिल होने के बाद वो लोग वहाँ से हरिद्वार ऋषिकेश घूमते हुए सात दिन बाद लौटने वाले थे..
अब पूरे सात दिन पूरे घर पर सिर्फ वो और रेशम ही रहने वाले थे..
इसलिए अब उसे भी रेशम से बात करने का, उसे समझने और उसे समझाने का पूरा वक्त मिलने वाला था..।
इधर घर पर रेशम भी बहुत उत्साहित थी..।
सासु माँ के साथ सुबह से वो उनकी तैयारियों में लगी थी.. रास्ते के लिए ढ़ेर सारा खाना, सूखा नाश्ता उसने उनकी मदद से बना लिया था…। काम बहुत ज्यादा हो रहा था लेकिन कहीं ना कहीं उसके दिल के किसी कोने में उमंग भरे फूल भी महक रहें थे.. और उसी उत्साह में वो सारा काम निपटाती चली गयी..
उन सब के जाने के बाद उसने पूरे घर को नए सिरे से साफ सुथरा कर सज़ा लिया..
एक बार फिर उसने अपने पास रखें खुशबू वाले कैंडल्स जला लिए..
रात का खाना तैयार ही था.. पूरियां, कचौड़ियां, गुलगुले पुआ, सूखे आलू और मिर्च के टिपोरे उन दोनों के लिए पर्याप्त मात्रा में बचे थे..
घर ठीक कर वो नहाने घुस गयी..
नहा कर उसने अपना पसंदीदा परफ्यूम लगाया और बालों को सूखा कर आज बहुत दिनों बाद उसने अपनी एक पुरानी ड्रेस निकाल कर पहन ली..
ये उसके शादी के पहले की ड्रेस थी.. फ्लोर लेंथ की फ्लोरल ड्रेस थी… जो उसने आज बड़े दिनों बाद निकाली थी.. शादी के बाद से साड़ी और सूट ही पहनती आई थी वो अब तक..
लेकिन आज ये ड्रेस कमर पर ज़रा सी कसी हुई लग रहीं थी.. वो खुद को आईने में देखती इधर उधर घूम घूम कर ध्यान से नापजोख रहीं थी..
मोटी हो गयी हूँ क्या ? इतना तो खाती भी नहीं…ये ड्रेस तो एकदम परफेक्ट फिट की थी.. लेकिन आज ज़रा चुस्त सी लग रहीं..
उसे मालूम भी नहीं चला की कब नीचे का दरवाज़ा खोल कर अथर्व चला आया..
नीचे घर की साज सज्जा देख कर उसके होंठो पर मुस्कान चली आई..
वो भी रेशम की कोशिशों को देख़ समझ रहा था..
वो ऊपर कमरे में ही चला गया..
वो दरवाज़े को खोल कर अंदर दाखिल हुआ और रेशम को खुद से बातें करता देख धीमे कदमो से उस तक पहुँच गया..
उसने पीछे से जाकर रेशम को अपनी बाँहों में भर लिया.. उसके खुले हुए कंधे पर अपना चेहरा टिका कर उसके कानों के पास अपना मुहँ ले आया..
“बहुत प्यारी लग रही हो.. पता है आज तुम्हें देख कर एक गीत गुनगुनाने का मन कर रहा है.. !
शरमा कर रेशम ने सामने आईने में अथर्व के चेहरें को देखा और पूछ लिया.. -“कौन सा ?”
“तू मेरे सामने, मैं तेरे सामने, तुझको देखूं की प्यार करूँ.
ये कैसे हो गया तू मेरी हो गयी, कैसे मैं ऐतबार करूँ.. !”
अथर्व अपनी मदहोश सी आवाज़ में गुनगुना गया… और उसकी आवाज़ सुन कर ही रेशम के होश गुम होने लगे..
उसका भी मन किया की वो भी अपने इस अलबेले प्रेमी के लिए कुछ गा दे लेकिन हाय री शरम…
पता नहीं क्यूँ लेकिन जिसके साथ उसका शरम से दूर जाने का रिश्ता था, उसी के सामने सारे जहाँ की शरम उसे खुद में लपेट लेती थी..।
उसके चेहरे को अथर्व ने अपनी तरफ मोड़ा और उसके माथे को चूम लिया..
“कुछ तो तुम भी सुनाना चाहती हो, है ना… रेशम… प्लीज़ सुनाओ ना… !”
हे भगवान किसी की आवाज़ भी ऐसी हो सकती है कि सुन कर शरीर में करेंट दौड़ जाएं..
मन ही मन सोचती रेशम ने अपनी सारी हिम्मत जुटा कर गा ही दिया..
“हम जब सिमट के आपकी बाहों में आ गए
लाखों हसीं ख्वाब निगाहों में आ गए… !”
“अरे.. माँ कसम.. दिल जान जिगर गुर्दा सब लूट लिया मेरी जान.. “..
रेशम का गाना सुन कर अथर्व ने ख़ुशी से उसे अपनी बाँहों में ज़ोर से भींच लिया और रेशम की घुटी हुई सी चीख निकल गयी..
“ओह्ह सॉरी सॉरी मेरी छुईमुई… गड़बड़ हो गयी.. !”
अथर्व ने वापस उसे प्यार से बाँहों मे भर लिया और रेशम को वाकई जन्नत मिल गयी..
उसे दिन भर के सबसे हसींन पल यहीं लगते थे, जब वो अथर्व की बाँहों में होती थी..
हालाँकि लाख कोशिशों के बावजूद वो खुद को आगे बढ़ने को तैयार नहीं कर पा रहीं थी…
लेकिन कहीं ना कहीं उसे विश्वास था कि वो आगे बढ़ लेगी..
इसी बारे में आज ही उसने पूर्वी से बात की थी, और पूर्वी ने उसे कुछ एक ऐसी विडिओस के बारे में बताया जिन्हे देख कर वो अपने शादीशुदा जीवन को खुशहाल बना सकती है..
दोपहर में सासु माँ लोगों की रवानगी के बाद उसने सुकून से बैठ कर उन विडिओस को खोला, लेकिन थोड़ा सा देखने के बाद ही उसे समझ आ गया कि ये विडिओस देखने के बाद उसका रहा सहा उत्साह भी किसी कुंए में जाकर कूद कर आत्महत्या कर लेगा..।
इसलिए उसने उन वाहियात विडिओस को बंद कर दिया..
वो अथर्व के गले से लगी हलके से मुस्कुरा रही थी की उसके फ़ोन पर कोई मेसेज आया..
अथर्व को लगा की रेशम के में किसी का फ़ोन आ रहा है, उसने रेशम का फ़ोन धीरे से उठाया और फ़ोन पर अचानक वहीं वीडियो खुल गया, जो रेशम देख रहीं थी..
उस वीडियोे में एक लेडी कुछ अभूतपूर्व ज्ञान की ऐसी फूहड़ बातें बता रहीं थी जिन्हे जानने ना जानने का कोई खास फ़ायदा नहीं था..
अथर्व को उस विडिओ को देख कर हंसी आ गयी..
“अच्छा तो ये तैयारी की जा रही थी.. !”
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अथर्व ने खिलखिला कर कहा और रेशम चौंक कर उसे देखने लगी.. उसे खुद को देखते पाकर अथर्व ने उसके मोबाइल को उसी की तरफ मोड़ दिया..
और अपने मोबाइल पर चलते उस बेहूदा से वीडियो को देख कर रेशम बुरी तरह झेंप गयी..
“वो….दरअसल.. वो बात ये है.. मेरी दोस्त है ना पूर्वी.. उसने कहा था की ये विडिओ देख लेना.. सब कुछ जान जायेगी.. बस इसलिए.. !”
“क्या जानना है.. मुझसे पूछो ना..?
मैं तो तुम्हें अब सिखाने तैयार बैठा हूँ.. पर तुम सीखना ही नहीं चाहती.. !”
एक बार फिर अथर्व की मदहोश करने वाली आवाज़ सुन वो अपने होश खोने वाली थी कि नीचे घर की बेल बज गयी और अथर्व तेज़ी से नीचे सीढ़ियां उतर कर चला गया..
रेशम खुद की बेकाबू धड़कनो को संभालने की कोशिश में थी कि अथर्व की आवाज़ उसके कानों में पहुँच गयी..
“रेशम.. देखो कौन आया है ?”
.
अथर्व की आवाज का उत्साह महसूस कर रेशम तुरंत नीचे चली गयी…
सामने खड़े मानव को देखते ही वो ख़ुशी से झूम उठी..
वो मानव की तरफ बढ़ी ही थी कि मानव ने अपने हाथ में पकड़ रखें मिठाई के डिब्बे से मिठाई निकाल कर उसके मुहँ में डाल दी..
“अब ये भी तो पूछ ले कि ये मिठाई किस लिए लाया हूँ.. !”
“नहीं पूछूँगी तो नहीं बताओगे ना ?”..”
“ना !”
“पक्का ?”
“चुप कर.. बकवास करने में तेरा कोई मुकाबला नहीं.. फ़िलहाल ये मिठाई खा और गुड़ न्यूज़ सुन…
गुड़ न्यूज़ ये है की तेरा पीएससी में सेलेक्शन हो गया है..।”
मानव की बात सुनते ही अथर्व ने ख़ुशी से मिठाई का टुकड़ा उठा कर रेशम के साथ साथ मानव के भी मुहँ में ठूंस दिया…
मानव के साथ वो तीनों ही बैठ गए…
अथर्व अपना लैपटॉप उठा लाया, और एक बार फिर वो लोग साईट खोल कर रिज़ल्ट देखने लगे…
रेशम का रोल नंबर तो चयनित उम्मीदवारों में नज़र आ रहा था लेकिन अथर्व का रोल नंबर वहाँ मौजूद नहीं था..।
हालाँकि वो पहले से ही अच्छी नौकरी में था.. लिखित परीक्षा भी पास कर चुका था, लेकिन इंटरव्यू में उसका सेलेक्शन नहीं हुआ था…
.अथर्व के चेहरे पर पल भर के लिए निराशा के बादल आये और तुरंत ही चले भी गए..
अपने मन की उदासी को उसने ना रेशम पर ज़ाहिर होने दिया ना मानव पर, लेकिन कहीं ना कहीं रेशम समझ गयी थी कि उसका पति उसके सेलेक्शन से जहाँ बेहद खुश है वहीँ अपने ना होने से दुःखी भी बहुत है, लेकिन मानव के सामने उसकी कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई..।
लेकिन वो गहरी सी आँखों से अथर्व को ही देख रहीं थी..।
वो मानव के साथ बराबर हंसी मजाक कर रहा था, उसे देख कर ये आभास ही नहीं हो रहा था कि उसे किसी बात का ज़रा सा भी दुःख हुआ है..।
रेशम अंदर चाय चढाने चली गयी..
उसी समय पूर्वा का भी फ़ोन आ गया.. उसका भी इंटरव्यू में नहीं हो पाया था.. पूर्वा एक एक कर उनकी बैच में से किसका हुआ है किसका नही का ब्यौरा देती रहीं…..
रेशम का इन सब बातों में ज़रा सा भी मन नहीं लग रहा था, उसे तो इस वक्त अपनी खुद की सीट भी बहुत चुभ रहीं थी। पति को दुःखी कर के वो खुद कौन सा बड़ा तीर मार लेगी..
तरह तरह की बातों में उलझी वो चाय लेकर बाहर चली आई..
मानव और अथर्व बिल्कुल पुराने दोस्तों जैसे आपस में प्यार से बात कर रहें थे.. उन दोनों को देख कर उसे अच्छा लगा और वो भी एक तरफ जाकर बैठ गयी..
मानव ने चाय का प्याला उठाया और मुँह से लगा लिया..
“वाह.. रेशु चाय तो बनाना सीख गयी तू.. !”
रेशम ने लाड़ भरे गुस्से से उसे घूरा..
“मुझे सब बनाना आता है !”
“हाँ, और सबसे ज्यादा मुहँ बनाना आता है… अरे इतनी मीठी खुशखबरी के बाद मुहँ कौन बनाता है ऐसे.. ?
किस बात के लिए दुःखी है तू ? अथर्व का नहीं हुआ ये सोच कर टेंशन मत लेना.. वैसे भी तू अपने सारे प्रोमोशन के बाद जहाँ पहुंचेगी वहाँ उस पोस्ट के बराबर सैलरी तो वो अभी ही उठा रहा है..
इसलिए रुपये पैसे में तो बेटा तुझसे ज्यादा ही कमाना है उसे, दूसरी बात शोहरत और नाम भी प्राइवेट वालों के बराबर तुम्हारा नहीं होना, तो फिर क्यूँ दुःखी होना..?
इंटरव्यू तक पहुँच कर उन्होंने भी अपनी योग्यता तो स्पष्ट कर ही दी ना..
अभी तो हम दोनों ये डिस्कस कर रहे थे कि कहीं किसी अंदर के बीहड़ गाँव में तेरी पोस्टिंग हो गयी तो तू क्या करेगी ?”
मानव ने हँसते हुए अपनी बहन के मन में मचे हाहाकार को दूर कर दिया..
उसके जीवन के ये दोनों महत्वपूर्ण पुरुष वाकई उसके बिना कहे भी कैसे उसकी हर बात जान जाया करते थे.. दोनों ही निराले थे, दुनिया से अजूबे..
रेशम की ऑंख में हलके से आँसू चले आये..
वो दोनों देख पाए उसके पहले ही उसने पोंछ लिए..
अथर्व ने रेशम से खाना परोसने कहा और तीनों एक साथ बैठ कर खाना खाने लगे.. इसी बीच दोस्तों रिश्तेदारों के फ़ोन आते चले गए….
खाना खाकर तीनों बाहर आइसक्रीम खाने चले गए..
रेशम का अपनी माँ से मिलने का मन हो रहा था, इसलिए लौटते हुए वो लोग उसके मायके चले गए…
सब से मिल जुल कर देर रात दोनों वापस अपने घर लौट आये..
अथर्व अपने कमरे में कपड़े बदल रहा था कि रेशम नीचे सब साफ कर के उसके लिए दूध लिए ऊपर चली आई..
वो चुपचाप एक तरफ बैठ गयी… अथर्व ने उसे देखा और इशारों में ही “क्या हुआ” पूछ लिया और उसने भी ना में गर्दन हिला दी… ..
अथर्व ने पास आकर उसे बाँहों में भर लिया..
“ये मत सोचना की तुम्हारा सेलेक्शन हो गया और मेरा नहीं इसलिए मैं ज्यादा दुःखी हूँ..। ऐसी कोई बात नहीं है.. हालाँकि दुःख तो हुआ क्यूंकि एग्जाम तो हम सफल होने का सोच कर ही देते हैं। फिर ये सोचा की कहीं अलग अलग जगह हमें पोस्टिंग मिल जाती तो कितनी दिक़्क़त बढ़ जाती.. मैं तो तुम्हें छोड़ कर नहीं रह सकता, बिल्कुल नहीं !
अब शुरू में भले तुम्हें जहाँ भी पोस्टिंग दे,दो साल बाद तो तुम्हारा यहीं करवा ही लेंगे.. ! ठीक है ना ?”
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कितना समझने लगा है उसे अथर्व… उसके मन की बात तुरंत जान ली… वो भी अब कहाँ पल भर के लिए भी उसे छोड़ कर रह पायेगी… अगर कहीं दूर भेजा तो जायेगी ही नहीं…
अथर्व को उसने भी अपनी बाँहों में ज़ोर से कस लिया…
क्रमशः

Very nice
लाजबाब भाग 👌👌👌👌
बहुत अच्छा भाग 👌👌👌