अपराजिता -18

वहाँ से निकलते वक्त अथर्व ने उसकी बाँह अपनी बाँह में लेकर उसे खुद से एकदम सटा लिया… अपने पति से ऐसे चिपक कर चलते हुए रेशम ज़रा झेंपने सी लगी…

लेकिन अथर्व का पुराना सा रूप पाकर वो राहत भरी साँस लें उठी.. ऐसा लगा जैसे उसे जीवन मिल गया हो..
और उसका मनमोहना उसे एक बार फिर अपने तन मन की खूबसूरती से मोहता अपने साथ ले चला….

क्रमशः

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