अपराजिता – 17
सुजाता की लाई साड़ी पहन कर कुसुम तैयार हो गयी….. गहने भी सारे खुद पर सज़ा लिए !
लेकिन आने वाले मेहमानो को लेकर अब उसके दिमाग में कोई नाराज़गी नहीं थी, उसके दिल में तो अब डाक साब के नाम के लड्डू फूट रहे थे..
जब भावना समझ गयी कि उसे डाक साब से प्यार हो गया है तो, क्या वो नहीं समझ पाये होंगे..?
बेशक समझ ही गए होंगे, तभी उस दिन उससे पूरा जायज़ा ले रहे थे कि महीना भर वो कहाँ थी? क्यूँ नहीं आई ? फलाना ढिकाना…
भावना उसके साथ ही थी और उसे देख कर अचरज में भी थी कि कुसुम कुमारी इतनी प्रसन्न कैसे है ?
कुछ देर बाद ही मेहमानो के आने की आहट ऊपर तक भी चली आई… भावना ने कमरे से निकल कर नीचे झांक लगा दी…
तीन औरतें और दो नौकर ही उसे नज़र आये..
भावना ने इधर उधर हर तरफ से झाँकने की कोशिश की लेकिन उसे कोई युवा लड़का वहाँ नजर नहीं आया..।
“लगता है तुम्हारे दूल्हा बाबू नहीं आये ?”
भावना ने वहीँ से आवाज़ लगा कर कुसुम को बता दिया..
“हाँ फिर ? मेरे दूल्हा बाबू तो अपने अस्पताल में बैठे होंगे ना ?”
भावना ने अपने माथे पर हाथ मार लिया..
ये पागल लड़की और इसकी सनकी बातें…
कुछ देर बाद ही सुजाता कुसुम को बुलाने चली आयी…
