अपराजिता -16

अपराजिता -16

कुसुम के घर रसोई में तैयारियां चल रहीं थी… रसोई से घी में कुछ सेंकने की सौंधी सी खुशबू बाहर रेंगती चली आ रही थी, जिसे नाक में खींच कर भरती महकती चहकती सी कुसुम रसोई में धमक पड़ी..

“अरे वाह!! बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है अम्मा ? क्या बना रहीं हो.. ?”

अपनी बात कहती हुई कुसुम कड़ाहे में झांक उठी…

“अरे वाह मालपुआ.. ! जिओ अम्मा जिओ.. तुमने तो आज हमारे दिल की बात सुन ली.. हम सोच ही रहें थे की डाक.. मतलब कब से मालपुआ नहीं खाया.. ! रबड़ी भी बनायी हो क्या ?

वहीं रखे दूसरे भगोने में उसने झांक लगा दी…
उसे रबड़ी भी नज़र आ गयी..

वहीँ काम वाली बाई कम्मो भी काम कर रही थी….

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Nidhi
Nidhi
2 years ago

Nice