अपराजिता – 3
रेशम का इंटरव्यू अच्छा हुआ था रात घर पर खाने की टेबल पर उसके पिता उससे एक एक सवाल पूछते जा रहे थे और वह याद कर करके उन सवालों और उनके जवाबों को अपने पिता को बताती जा रही थी, अपनी कटोरी से गाजर का हलवा खाता बैठा मानव धीरे-धीरे मुस्कुरा रहा था ! उसे मालूम था कि रेशम कि कही बातों में 1% भी सच्चाई नहीं थी ! रेशम अपने मन से सवाल बना रही थी और उनके जवाब अपने पिता को बताकर उन्हें खुश करती जा रही थी…!
मानव रेशम की रग रग से वाकिफ था! रेशम जितनी ही तीव्र बुद्धि की मलिका थी उतना ही उसका दिमाग शैतानी भी था..!
मस्ती मजाक करने में वह कभी पीछे नहीं रहती थी, और अपने माता-पिता को तरह-तरह के झूठ बोलकर परेशान करने में भी…!
सब बातचीत में लगे हुए खाना खा रहे थे कि तभी रेशम की मम्मी की नजर उसकी उंगली पर पड़ी…
रेशम उस वक्त 12वीं में थी जब उसने मेडिकल एंट्रेंस दिया था उस वक्त उसके पिता ने हंसी मजाक में उससे यूं ही कह दिया था कि अगर वह इस साल मेडिकल एंट्रेंस पास कर लेगी तो वह उसके जन्मदिन पर उसे सोने की अंगूठी खरीद कर देंगे!
इत्तेफाक ऐसा हुआ कि 12th के साथ साथ ही रेशम ने मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम क्लियर कर लिया !
अप्रैल के महीने में उसके मेडिकल एंट्रेंस का रिजल्ट आया और जुलाई में उसके जन्मदिन में उसके पापा ने उसके लिए एक प्यारी सी छोटी सी सोने की अंगूठी खरीद ली…
छोटी सी अंगूठी का भी उस मध्यम वर्गीय परिवार में बहुत मान हुआ! उस अंगूठी को बकायदे मंदिर में रखकर पूजा कर, दूध से धोकर अगले दिन सुबह जन्मदिन पर रेशम की अंगुली में उसकी मां ने पहना दिया था..!
और तब से आज तक वह अंगूठी रेशम की उंगली से कभी नहीं उतरी थी, लेकिन आज रेशम की उंगली सूनी नजर आ रही थी, इसलिए उसकी मां चौंक कर घबरा गई..
” रेशम तेरी अंगूठी कहाँ गयी बेटा..?”
“अरे…. मेरी अंगूठी ?”
रेशम खुद अपनी मां के मुंह से यह सवाल सुनकर चौंक गयी…
उसने तुरंत अपनी उंगली देखी उसकी उंगली में अंगूठी नहीं थी। वह भी घबराकर टेबल और उसके नीचे इधर-उधर देखने लगी…
लेकिन मानव इधर-उधर देखने की जगह सिर्फ रेशम को घूरता रहा !
कुछ देर तक अंगूठी ढूंढने का उपक्रम चलता रहा लेकिन उनमें से किसी को भी अंगूठी नहीं मिली !
कुछ देर बाद खाना खा कर रेशम ऊपर अपने कमरे में चली गई… ।
वह पूर्वा से फोन पर बात कर रही थी तभी उसके दरवाजे पर दस्तक देकर मानव अपना और उसका दूध लेकर कमरे में चला आया !
“ये ले दूध !”
” मुझे ना, ये दूध बिल्कुल पसंद नहीं आता…!”
“पी जा चुपचाप… लड़कियों को दूध पीना ज़रूरी होता है.. अरे इतना नहीं पता तुझे, लड़कियों की बॉडी में कैल्शियम का परसेंटेज कम होता है ना इसलिए दूध पीना बहुत जरूरी है..!”
गहरी सी सांस लेकर रेशम ने मानव को देखा और बहाना बना दिया…
“मैं लेक्टोजन इनटोलरेंस हूं, इसलिए दूध नहीं पीती हूँ, समझा कर ना..”
” मुझसे ज्यादा शायद ही तुझे कोई समझता होगा.. समझी ?
बड़ी आई लेक्टोजन इन्टॉलरेंस वाली ! कोई इनटोलरेंस नहीं है तेरे इंटेस्टाइन में, चुपचाप गुटक ले वरना एक खींचकर लगेगी..!”
” तू अपनी बहन को मारेगा मानव !”
” हां बिल्कुल मारूंगा! क्योंकि बच्चे जब हद से ज्यादा शैतान हो जाते है ना तो उन पर लगाम कसने के लिए कभी कभार उनकी पिटाई भी करनी पड़ती है ! अभी ये बता की अंगूठी कहां गँवा कर आई है ?”
” सच्ची विद्या की कसम!! घर पर ही गुमी है कहीं..
मुझे भी नहीं पता था मैं तो मम्मी ने कहा तब ध्यान गया मेरा..!”
मानव ने आगे बढ़कर रेशम की चोटी को हाथ में पकड़ा और जोर से मरोड़ दिया ! वह कलबलाकर चीख उठी और अपने बाल मानव से छुड़ाने के लिए उसके सीने पर अपने हाथों से मारने लगी! लेकिन उसे छोड़ने की जगह मानव ने अपने दूसरे हाथ से उसकी दोनों बाजुओं को जोर से पकड़ लिया…
” अच्छा छोड़….. छोड़… कुत्ते मैं बता रही हूं.!”
” गालियां तो ऐसे तेरे मुहँ से बरसती है जैसे मंत्र पढ़ रही हो..! बोल.. बता जल्दी !”
“वो… बात ये है की… !”
“बोलेगी की खींच के एक झापड़ लगाऊं ?”
“पाप लगेगा तुझे पाप ! छोटी बहन देवी का स्वरूप होती है, और तू अपने घर की देवी को कैसे झपड़िया रहा है… कैसा बड़ा भाई है तू ! शरम आती है मुझे तुझ पर !”
” हां तो शर्मा शर्मी में ही बता दे कि तूने अंगूठी कहां गंवाई है ?”
अपनी गले की थूक निगल कर वो कुछ कहने जा रही थी कि तभी नीचे से उसकी मम्मी ने उन दोनों का नाम लेकर पुकार लगा दी और मानव से पहले रेशम धड़धडाती हुई सीढ़ियां उतरकर नीचे पहुंच गई !
नीचे पहुंचने पर उसने देखा उसके ताऊजी उन लोगों से मिलने आए हुए थे! हॉल के सोफे पर ताऊजी उसके पिता के साथ बैठे बातों में लगे हुए थे !उन दोनों को इतनी गंभीरता से बात करते देखकर रेशम ने पलटकर मानव को देखा और उससे इशारे से पूछ लिया कि दोनों क्या बात कर रहे हैं ? मानव ने भी कंधे उचका कर मुझे नहीं पता है का इशारा कर दिया और इसके साथ ही रेशम को ऊपर चल तुझे देख लूंगा का भी इशारा कर दिया !
रेशम की मां रसोई में चाय बनाने में लगी हुई थी…
उन्होंने वहीं से आवाज देकर रेशम को अपने पास बुला लिया !
…. रेशम अपनी मां की मदद करने रसोई में चली गई, हालांकि उसे रसोई से कोई विशेष लगाव नहीं था ! बावजूद जब कभी उनके घर कोई भी मेहमान आता, वह ट्रे में सजाकर पानी के गिलास जरूर बाहर ले जाती थी… इसके अलावा उससे रसोई का और कोई काम नहीं होता था…
आज भी वह हमेशा के अभ्यास से पानी के गिलास लिए बाहर चली गई ! ताऊ जी को पानी का ग्लास देने के बाद वही अपने पिता के पास बैठ गई !
रेशम पहले से ही डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर बैठी हुई थी ..
” कैसा हुआ मेरी बच्ची का एग्जाम..?”
ताऊ जी के सवाल पर वह मुस्कुराकर हां में गर्दन हिला गई…
ताऊ जी ने भी उसे आशीर्वाद दिया और वापस अपने छोटे भाई से जिस जरूरी बात को कहने आए थे उसकी भूमिका बनाने लगे…
“देखो शिव, अब बिटिया नौकरी में भी लग जाएगी ! उम्र भी देखा जाए तो शादी विवाह के लायक हो गई है, तो अगर मेरी मानो तो अब रेशु के रिश्ते पर ध्यान दो…
बात यह है कि मेरे एक मित्र हैं अवस्थी जी, पीडब्ल्यूडी में क्लर्क है…
हमारे जैसा ही सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार है ! बहुत ज्यादा तामझाम और दिखावे वाले लोग नहीं है, सीधे सरल स्वभाव के हैं मेरे ऑफिस में ही अवस्थी जी काम करते हैं !
दो लड़के और एक लड़की हैं उनकी !
लड़की का ब्याह कर दिया है! लड़के दोनों बाकी है ! बड़ा लड़का अथर्व डॉक्टर है,और मैंने सुना है कि रेशु के कॉलेज से ही पास आउट है !अभी लड़का ओरिजन प्राइवेट हॉस्पिटल में नौकरी कर रहा है! महीने का डेढ़ लाख रुपए कमाता है,और जल्दी ही अपना खुद का नर्सिंग होम डालने वाला है ! उसने भी रेशु ने जो परीक्षा दी थी ना, वह दे रखी है ! उन लोगों को भी उम्मीद है कि उनका लड़का भी सरकारी नौकरी में आ जाएगा और बस उसके बाद दोनों जन मिलकर अपनी सरकारी नौकरी के साथ अपनी क्लीनिक संभालेंगे..!
तू सुन समझ रहा है ना मैं क्या कह रहा हूं ! उनकी ऊपर से किसी तरह की कोई मांग नहीं है! बस इतना कहना है कि शादी-ब्याह अच्छे से निपट जाये ! अब आजकल तो शादी ब्याह में इतना तामझाम हो गया है कि उसी में रुपए पानी की तरह बह जाते हैं ! और इसीलिए आजकल कोई तिलक की मांग करता भी नहीं ! सबको पता है लड़की पढ़ी-लिखी है, नौकरी करके उतना कमा कर दे ही देगी तो इस से अच्छा है कि तिलक मांग कर अपना ही नाम ख़राब ना करें..
हो सकता है रेशु जानती भी होगी, उसके कॉलेज का ही सीनियर था, क्यों बेटा किसी अथर्व अवस्थी नाम के लड़के को जानती हो…?”
रेशम के चेहरे का रंग बदलने लगा! कॉलेज में उसकी सहेलियां भी उसे अथर्व के नाम से कभी कभार छेड़ा करती थी !
दिखने में सुंदर सा शर्मिला सा अथर्व उसे भी ठीक लगता था, लेकिन पढ़ाई लिखाई के सामने उसने भी कभी इन बातों को कुछ खास तरजीह नहीं दी थी ! आज अचानक से घर पर अथर्व के रिश्ते की बात सुनकर वह पहली बार शर्म से अपनी जगह पर संकुचित हो गई ! उसने धीरे से मानव को देखा मानव सामने बैठा उसे देख रहा था! मानव ने अपनी एक आंख दबा दी और रेशम शरमा कर वहां से उठकर अंदर चली गई ! उसे खुद को समझ में नहीं आया कि अजीबोगरीब सा सब लड़कियों वाला टशन उसमें कहां से आ गया ! वह तो खुद में बड़ी बिंदास बनती थी, फिर आज जब शादी की बात आई तो वह क्यों पापा और ताऊ जी के सामने बैठकर सीधे से इस बात को स्वीकार नहीं कर पाई कि हां वह अथर्व को जानती है…
” क्या हुआ रेशम तू यहां क्या कर रही है..?”
रेशम ने ना में गर्दन हिलाई और पानी निकाल कर पीने लगी! इस वक्त उसका गला बेतहाशा सूख रहा था ! उसकी मां उसकी परिस्थिति से अनजान थी ! कप में चाय डालकर वह नाश्ता साथ में लिए बाहर चली आई ! उनके बाहर आते ही उनके पतिदेव ने उन्हें अपने बड़े भाई के लाए रिश्ते के बारे में बताया और उनके चेहरे पर प्रसन्नता की लहर दौड़ गई…
” देख लो बहू अगर तुम लोगों को जमता है, तो कल ही उन लोगों को मिलने के लिए बुला लेते हैं..”
“जी भाई साहब जैसा आप लोगों को ठीक लगे… !”
बड़े बुजुर्ग बैठकर आपस में बातें कर रहे थे और रेशम धीरे से अपने कमरे में चली गई.. पता नहीं क्यों आज उसके दिल में अलग सी गुदगुदी मच रही थी…!
जिसका साफ-साफ कारण भी उसे समझ नहीं आ रहा था उसने अपने मोबाइल में से फोटो गैलरी को खोल लिया | उसमें कॉलेज की तस्वीरों में सीनियर्स के साथ की एक तस्वीर थी, जिनमें वह सबसे सामने जमीन पर अपनी सहेलियों के साथ बैठी हुई थी, और सबसे पीछे अथर्व अपने दोस्तों के साथ हाथ बांधकर खड़ा था उस तस्वीर को देखते ही मानसी मुस्कुराने लगी…
तस्वीर देखते हुए उसकी नज़र अपने ठीक पीछे हाथ बांध कर खड़े उस पर भी चली गयी, और फिर वो चाह कर भी मुस्कुरा नहीं पायी….
ट्रेन से उतर कर अनिर्वान आगे बढ़ रहा था की ट्रेन एक झटके से रुक गयी..
अनिर्वान ने पीछे पलट कर देखा, कुछ गुंडे किस्म के लोग भागते हुए ट्रेन की तरफ आये और धड़धडाते हुए हर एक कूपे में झांक झांक कर देखने लगे..
उन गुंडों के हाथ में खंजर, चाकू, हॉकी स्टिक्स देखते ही अनिर्वान के बढ़ते कदम रुक गए..
वो वापस उसी तरफ पलट गया…
अपने लम्बे लम्बे कदम भरता वो प्लेटफॉर्म पर आकर खड़ा हुआ की उन गुंडों ने उतनी देर में सरना को ढूँढ निकाला..
और उसे उसके बालों से पकड़ कर घसीटते हुए वहाँ लें आये..
सरना को ज़ोर से प्लेटफॉर्म पर गिरा कर वो सारी राक्षसों की सेना उस पर टूट पड़ी..
“साले कमीने खुद को समझता क्या है बे ? तुम लोग खुद को समझता क्या है.. चींटी की तरह मसल कर रख देंगे सिंह साहब समझा.. ! सब हेकड़ी निकल जायेगी तब..
बता कहाँ भागा है तेरा दोस्त ?”
एक लड़के ने सवाल पूछा और फिर जमीन पर गिरे पड़े सरना के मुँह पर अपने जूते से ज़ोर से प्रहार कर दिया .. सरना के मुहँ से ख़ून बलबला कर बहने लगा..
“हमें नहीं पता !”
उसके ऐसा बोलते ही दूसरे ने उसके पेट पर एक ज़ोर की लात मारी और वापस उस पर चीखने लगा…
अनिर्वान उनके पास चला आया..
“क्या बात है.. क्यूँ परेशान कर रहें हो उसे.. ?”
जिस लड़के के कंधे पर पीछे से अनिर्वान ने हाथ रखा था उसने बिना पलटे ही अनिर्वान का हाथ झटक दिया..
अनिर्वान ने दुबारा अपना हाथ मज़बूती से रख कर अपना सवाल दुहराया और इस बार उसका हाथ झटकने के साथ ही वो लड़का पीछे पलटा और अपने सामने खड़े ऐसे लम्बे चौड़े महामानव से आदमी को देख चौंक गया.. उस लड़के की लम्बाई पांच फुट चार इंच थी इसी से उसके सामने अनिर्वान और भी ज्यादा लम्बा लग रहा था..
“तू कौन है बे .. ?”
उस लड़के ने अपनी अकड़ दिखानी जारी रखी और अनिर्वान ने खींच कर एक थप्पड़ उसके गाल पर जड़ दिया… वो लड़का गोल घूम कर ज़मीन पर गिरा, और इसके साथ ही उसका एक दाँत जो जाने कब से उसे तकलीफ दे रहा था, ना टिक रहा था ना निकल ही रहा था, बाहर निकल कर फिंक गया.. मुँह से छलक आये ख़ून को देख लड़के को रोना आ गया.. उसने अपना चेहरा उठा कर उसे देखा, और उसके साथ खड़े लड़के ने अनिर्वान को देख पूछ लिया..
“सवाल ही तो पूछा था, उस पर इतना बम होने की का जरूरत थी भाया ?”
“सवाल ही तो पूछा था, लेकिन बदतमीज़ी से… अपने से बड़ों से बात करने की एक तहज़ीब होती है, तरीका होता है.. और मुझे बद्तमीज़ो से चिढ होती है.. !
हमारा भारत किस लिए फेमस है जानते हो.. ?”
“शाहरुख़ खान ?” उसी बौड़म लड़के ने कुछ सोचते हुए जवाब दिया.. और अनिर्वाण ने ना में गर्दन हिला दी..
“लता मंगेशकर.. ! उन्हें तो पाकिस्तानी मांग भी रहें थे ना ?”
अबकी बार उस लड़के को लगा उसने सही जवाब दिया है और अनिर्वान ने फिर से ना में गर्दन हिला दी..
“गलत जवाब ! “
अनिर्वान के मुहँ से ये सुनते ही वो लड़का डरते हुए आगे बोल पड़ा..
“आप भी बच्चन जी के फैन लगते है.. हैं…. केबीसी देखना पसंद है आपको ?”
अनिर्वान ने उस लड़के को कॉलर से पकड़ कर ही ऊँचा उठा दिया और वो ज़मीन से लगभग बित्ते भर की ऊंचाई पर पैर हिलाते तड़पने लगा..
“अब यहाँ से देख कर समझ आ रहा की भारत क्यूँ प्रसिद्ध है.. ? नहीं समझ आएगा.. क्यूंकि तुम चिड़ीमार लोगों को लगता है चिड़िया मार कर तुमने बड़ा शेर मार लिया है..
अबे बौड़म इंसान हमारे भारत के संस्कार प्रसिद्ध है, हमारी तहज़ीब प्रसिद्ध है.. हम बड़ों को सम्मान और छोटो को प्यार देते है ये प्रसिद्ध है.. !
बदतमीज़ी से बात करना हमारे यहाँ की मिट्टी नहीं सिखाती… !
हमारे यहाँ के राजा महाराजा को अगर विदेशी आक्रमणकारी पकड़ लेते थे और पूछते थे की बोलों तुम्हारे साथ क्या सलूक किया जायें तो हमारे सम्राट के मुहँ से गाली नहीं निकलती थी.. वो कहते थे ” वहीं सलूक कीजिये जो एक सम्राट दूसरे सम्राट के साथ करता है !”
बहुत सम्पन्न इतिहास है हमारा, उसका कचरा मत करो..!
और बाकी रहीं बात बच्चन साहब की तो, उन्हें पसंद ना कर के पाप का भागी थोड़े ना बनना है..!
बेटा अब हमारी संगत में हो तो धीरे धीरे जान जाओगे की हम कौन है.. ?”
अनिर्वान ने उन लड़कों के गोल घेरे के बीच घुस कर सरना को हाथ देकर उठा लिया…
तभी पीछे से एक लड़के ने अपनी हॉकी स्टिक से अनिर्वान की पीठ पर वार किया और उसकी स्टिक भरभरा कर टूट गयी..
अनिर्वान पीछे घूमा और अपनी हथेलियों में उस लड़के के गाल पकड़ कर दबा दिये..
“मैं लगातार समझा रहा हूँ की मुझसे ना लगो तो समझ नहीं आ रहा तुम लोगों को..
गाँधी जी का भक्त हूँ, इसलिए कोई एक गाल में एक बार मारे तो उसे समझाता हूँ की ऐसे मारना नहीं चाहिए, लेकिन अगर सामने वाला दूसरे गाल पर मारने आता है ना तो उसका हाथ कंधे से उखाड़ फेंकता हूँ…
अब तक बच्चा समझ कर छोड़ने की सोच रहा था, लेकिन जब तुम्हारे जैसे गंवार बच्चे अपनी हद पार करने लगते है, तब मेरे अंदर का रावण अंगड़ाई लें कर खड़ा हो जाता है..
अनिर्वान ने उस लड़के को छोड़ा और दूसरे के बाल पकड़ कर तेज़ी से घूमा दिया..
“तुम लोग सोच रहें होंगे मेरे और रावण में क्या समानता है.. तो वो ये है की वो भी ब्राम्हण, शास्त्रों का ज्ञाता, बुद्धिमान और महादेव का भक्त था और मैं भी..
अंतर् सिर्फ ये है की मैं राम का भी भक्त हूँ..
जय श्री राम.. !”
इतना बोल कर अनिर्वान ने सामने खड़े दो लड़कों को हवा में ऊपर उठा कर नीचे फेंक दिया…
दोनों कलबला कर तड़प उठे..
अनिर्वान ने उन पांचो लड़कों को पहले तो तबियत से पीटा फिर उन्हीं की जीप में उन्हें लाद कर खुद गाड़ी चलाते हुए पुलिस स्टेशन की तरफ निकल गया..
सरना को भी उसने साथ लें लिया था..
दूर्वागंज पुलिस चौकी पर जाकर उसने जीप खड़ी की और उन लड़कों को हंकालते हुए अंदर लें गया..
क्रमशः

बहुत सुन्दर भाग 👌👌👌👌
बिलकुल सही कहा सुंदरता के आगे गुण फीके पड़ ही जाते है शायद सुन्दर ना होना एक औरत के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। बेशक वो कितनी भी गुणी हो।रश्मि और कुसुम दोनों ही बिंदास है। रेशम बड़े भाई पर हुकुम चलाने वाली और बिंदास सिगरेट के कश भरती और धुएं के साथ टेंशन भी कम करती 😃। कुसुम भी दमदार है वरना किसकी इतनी हम्मत जो अपनी शादी से भाग जाए और उसकी बातें एकदम मस्त किरदार 👌🏻👌🏻।कुल मिलाकर दिल जीतने वाला भाग, एकदम मजेदार 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
Nice ji