
अपराजिता – 2
सुबह से घर में अफरातफरी मची थी.. आज रेशम का पीएससी का इंटरव्यू होना था लेकिन पट्ठी अपने कमरे में मज़े से गाना गुनगुनाती तैयार हो रहीं थी…
मानव उसके सारे ज़रूरी कागज़ात इकट्ठा कर रहा था.. जो डॉक्युमेंट उपलब्ध नहीं था उसे प्रिंटर में से निकालता जा रहा था…
रेशम की पासपोर्ट साइज तस्वीर और उसके कागज़ात एक साथ फाइल कर वो नीचे पूरी तरह तैयार खड़ा था, और रेशम अब भी ऊपर अपने कमरे में तैयार हो रहीं थी…
नहा कर उसने अपने गीले बालों को सुलझाया और यूँ ही खुला छोड़ दिया…
अपने चेहरें को इधर उधर से देखते हुए उसने आईने के सामने अपना परिचय बोल कर देखा और मुस्कुरा उठी.. उसकी बड़ी बड़ी आँखों में आत्मविश्वास की चमक नज़र आ रहीं थी..
ये आत्मविश्वास उसकी बुद्धिमत्ता का था… !
और ये आत्मविश्वास उसे अभिमानी नहीं बनाता था, बल्कि स्वाभिमान के रंग से रंग जाता था…
उसने अपना दुपट्टा उठाया और उसे मुड़ा तूड़ा पाकर झल्ला गई और उसने वही से अपनी मां को आवाज लगा दी..
” क्या यार मम्मी मेरा सूट आयरन के लिए भेजा था तो दुपट्टा क्यों नहीं डाला ? दुपट्टा तो वैसे ही पड़ा हुआ है..! कॉटन का सूट है दुपट्टा ऐसे नहीं ले सकती मैं.. ! “
“कुछ और पहन ले ना.. मैं नाश्ता बना रहीं हूँ.. नहीं आ पाऊँगी अभी तेरी मदद करने !”
उसकी माँ ने टका सा जवाब दे दिया..
“वह तो नौकरी का इंटरव्यू है, इसलिए इतने तमीजदार कपड़े पहन कर जा रही हूं वरना अब तक अपनी जींस और टॉप पहन कर निकल गई होती मैं.. !”
” तू रुक मेरी मां, मैं आ रहा हूं ऊपर.. !”
भागता हुआ मानव 2-2 सीढ़ियां एक बार में तय करता हुआ ऊपर चला आया, उसने दुपट्टा लिया और तुरंत आयरन कनेक्ट करके दुपट्टे को आयरन करने लगा..
दुपट्टा रेशम के हाथ में पहुंचा कर मानव ने उसे देखा और फिर 1 मिनट रुकने को कहा ड्रेसिंग से कंघी उठाकर उसने उसके बालों को पीछे की तरफ झाड़ा और एक मोटा सा रबर उठाकर बालों को पोनीटेल में टाइ कर दिया…
“अब ठीक है.. वरना तेरे बिखरे फ़ैले बालों में तू भूतनी लग रही थी… !
मानता हूँ की तू भूतनी है, पर ज़रूरी है क्या की पहली मुलाकात में ही सबको डरा दे… !”
रेशम ने खुद को आईने में देखा और खुद को देख कर मुस्कुरा उठी..
“यहीं कमी लग रहीं थी… मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की क्या करूँ जो मैं सभ्य संस्कारी दिखने लगूं… अब ठीक है !”
“सुन बिंदी लगा लेगी तो और भी प्यारी लगेगी !”
“प्यारा नहीं लगना है मानव !! दिमागदार लगना है.. वहाँ बैठे लोगों को लगना चाहिए की बंदी अकेली अपना अस्पताल चला सकती है ! समझा बुद्धू !”
“हाँ देवी माँ ! अब चल, वरना तेरे चक्कर में मैं ऑफ़िस के लिए लेट हो जाऊंगा… तुझे वहाँ उतारते हुए निकल जाऊंगा.. जब तेरा इंटरव्यू हो जाये, तब बुला लेना !”
“ओके बॉस !”
दोनों भाई बहन नीचे उतर आये… रेशम की मां ने एक कटोरी में से दही और चीनी रेशम को चखाई और उसे आशीर्वाद देकर इंटरव्यू देने के लिए रवाना कर दिया! अपने भाई मानव की बाइक पर पीछे बैठकर रेशम इंटरव्यू देने निकल गयी !
उसके पहले उसने अपने माता पिता के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद भी ले लिया ! वैसे ज्यादातर ब्राह्मण परिवारों में माता-पिता कभी अपनी बेटी से पैर नहीं छुआते, लेकिन रेशम शुरू से ही जिद करके अपने भाई मानव की तरह अपने माता पिता के पैर छूती आई थी, बल्कि वह बहुत बार अपने बड़े भाई मानव के भी पैरों में झुक जाती थी और मानव हमेशा उसे उठाकर अपने सीने से लगा लेता था….
रेशम ऐसी ही थी, अपने आप में निराली !!
जो रीति रिवाज उसे समझ नहीं आते थे, उन्हें मानना उसके लिए वर्ज्य था, लेकिन जिन रीति-रिवाजों को वह अपनी बुद्धि में समझ पाती थी उन्हें पूरे मन से निभाती थी….!
लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि वो कुछ समय के लिए दुनिया से कट कर खुद में सिमट कर रह गयी थी..!
घर वालों खास कर मानव के प्रयास थे कि वो एक बार फिर वही सामान्य सी चंचल गुड़िया बन पायी थी…
पीएससी ऑफिस के बड़े से कैंपस में एक तरफ के ऑफिस में आज डॉक्टर पी एस सी का इंटरव्यू होना था! इंटरव्यू के लिए लगभग डेढ़ हजार लोगों को बुलाया गया था जिनमें से कुल 280 लोगों का चयन होना था ! रेशम तुरंत ही पास आउट हुई थी और इसलिए उसकी बैच के उसके अलावा भी 12-15 लोग लिखित परीक्षा में सेलेक्ट होकर इंटरव्यू तक पहुंच गए थे…
रेशम की सहेली पूर्वा भी सेलेक्ट हुई थी और आज इंटरव्यू देने आई थी..
गेट पर जैसे ही मानव ने रेशम को उतारा उसे सामने से आती पूर्वा नजर आ गई! पूर्वा रेशम को देखते ही भागकर उसके पास पहुंच गई…
” नमस्ते मानव भैया कैसे हैं आप?”
” मैं ठीक हूं! तू कैसी है? और इंटरव्यू की तैयारी कैसी है?”
” बस भैया, मैं भी मना रही हूं कि पास हो जाऊं ! यहां पर आने के बाद तो सब लोग पता नहीं कौन-कौन सी किताबों से पढ़ रहे हैं । कह रहे हैं, जीके भी पूछा जाएगा। अब हमारी पीएससी के इंटरव्यू में जीके का क्या काम? डॉक्टर हो कर जनरल नॉलेज हमें रहे या ना रहे क्या फर्क पड़ता है? हमें तो यह मालूम होना चाहिए कि खांसी में कौन सी दवाई देनी है और सर दर्द में कौन सी? कौन से मरीज को हमें तुरंत इमरजेंसी में रेफर करना है ?और किस मरीज के टांके हम खुद लगा सकते हैं ,इससे ज्यादा जानकर हम करेंगे भी क्या..?”
” पूर्वा बोल तो तू ठीक रही है, लेकिन आजकल हर चीज में जीके देखा ही जाता है। और डॉक्टर का तो ऐसा है कि उन्हें हर चीज पता होनी चाहिए। वरना देखा नहीं है, एक डॉक्टर से अगर गलती से भी कोई गलत दवा लिखा जाए, मरीज को कुछ नुकसान हो जाए, तो मरीज के घरवाले पहुंचकर डॉक्टर का केबिन सब तोड़ फोड़ देते हैं। इसीलिए डॉक्टर का जीके चेक किया जाता है। अगर हमारा जीके स्ट्रांग रहेगा, इसका मतलब है कि हम डेली न्यूज़ पेपर पढ़ते हैं, और अपडेटेड रहते हैं तभी तो हमें पता चलेगा कि किस एरिया के मरीज ऐसे खूंखार और खतरनाक हैं जिससे हम उस एरिया में कभी प्रैक्टिस ना करें..”
” तेरी अजूबा बातें !! कोई सेंस नहीं रहता, तेरी बातों के पीछे ।
चल अपना 10 के स्लॉट में ही इंटरव्यू है..! तू तो पक्का सेलेक्ट हो जायेगी… तेरा खूबसूरत सा चेहरा देख कर ही तुझे नौकरी मिल जायेगी.. देखना..।”
” तुम लोग पहले स्लॉट में ही निपट जाओगे तब तो 12 बजे तक तुझे लेने आना पड़ेगा? अब पूर्वा मिल ही गई है, तो तुम दोनों एक साथ वापस चले जाना घर..!”
” हाँ मानव हम दोनों साथ में चले जाएंगे, तू लेने मत आना.. !”
“पक्का आ जायेगी ना रेशु ?”
रेशम ने हाँ में गर्दन हिला दी
मानव ने मुस्कुराकर रेशम के सिर पर हाथ फेरा और अपनी बाइक ऑन कर वहां से ऑफिस के लिए निकल गया….
रेशम पूर्वी के साथ कैंपस में अंदर चली गई ! दूर एक पेड़ के चबूतरे पर उनके कुछ सीनियर्स बैठे हुए थे, जो इंटरव्यू की तैयारियों में लगे हुए थे उन्हीं सीनियर्स में अथर्व भी बैठा था..!
अथर्व अपनी क्लास का टॉपर था पढ़ने में बेहद सिंसियर, उसके सारे काम समय पर होते थे | एक जुझारू और बहुत अच्छा डॉक्टर था वह | रेशम से 4 साल सीनियर था, और अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद फिलहाल किसी नामचीन प्राइवेट हॉस्पिटल में अच्छे पैकेज पर नौकरी कर रहा था!
डॉक्टर्स के लिए निकली यह सरकारी नौकरी उसके लिए एक तरह से अपने सपने को पूरा करने जैसा था…
हालांकि उसकी बैच के ज्यादातर लोग प्राइवेट हॉस्पिटल ज्वाइन कर चुके थे, और अच्छे पैकेज में नौकरी कर रहे थे! इसलिए कईयों ने इस एग्जाम को दिया ही नहीं, लेकिन जाने क्यों अथर्व प्राइवेट सेक्टर से ज्यादा सरकारी नौकरी पर विश्वास करता था…!
प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले डॉक्टर्स की पर्सनल लाइफ कुछ भी नहीं रह जाती, यह वह अच्छे से जानता था| पैसे जितने भी मिले, लेकिन समय बिल्कुल नहीं मिलता था, और इसीलिए शुरू से वह संतोषी किस्म का लड़का होने के कारण सरकारी नौकरी को ही प्रिफरेंस देता आया था..!
अपने साथ के लोगों के साथ बैठा अथर्व प्यास लगने पर उठकर पानी पीने जा रहा था कि, सामने खड़ी रेशम और पूर्वा पर उसकी नजर पड़ गई..
” अरे तुम दोनों भी आई हुई हो इंटरव्यू के लिए…!”
” जी सर!”
” विच स्लॉट ?”
“सर ऐ !”
“ओह्ह गुड़… मेरा भी सेम स्लॉट है.. अच्छा है जल्दी फ्री हो जायेंगे !”
अथर्व की नजरें आज रेशम पर से हट नहीं रही थी… कॉलेज में भी अथर्व को रेशम पसंद थी और अमूमन जैसा इन प्रोफेशनल कॉलेजेस में होता है, अगर किसी सीनियर लड़के और उसकी जूनियर लड़की की कास्ट एक हो तो सारी बैच उन दोनों के बीच के संभावित भविष्य को देखकर उन्हें छेड़ने लगती है| अथर्व के बैच के लड़के भी उसे रेशम के नाम से छेड़ा करते थे, लेकिन उस समय अपनी पढ़ाई में व्यस्त अथर्व ने अपने आपको इधर उधर भटकने नहीं दिया था ! और फिर रेशम लोगों के प्रथम वर्ष के एग्जाम के साथ ही अथर्व के फाइनल एग्जाम हुए और वो उसके बाद कॉलेज छोड़ गया !
हालाँकि रेशम के खूबसूरती के कॉलेज में बहुत चर्चे थे.. और वो एक किस्सा भी अथर्व का सुना हुआ सा था, लेकिन उसे ज्यादा कुछ मालूम ना था.. या शायद उसने उस किस्से के बारे में ज्यादा ध्यान दिया ही नहीं..।
पर जो भी हुआ था, उससे उस वक्त उनका कॉलेज हिल गया था !
लेकिन उसने कभी उस किस्से के बारे में रेशम से चर्चा नहीं की..।
वो मध्यम वर्गीय परिवार का सादा सा लड़का था,और अपने पारिवारिक मूल्यों को भी पहचानता था। उसे मालूम था कि उसके पिता की नौकरी से सिर्फ उसका घर चल सकता है, और उसके सपनों को पूरा करने के लिए उसे खुद को एक अच्छी नौकरी में आना बेहद जरूरी है। और इसलिए उसने अपनी पढ़ाई से कभी कोई समझौता नहीं किया था। लेकिन आज जब उसका सुनहरा भविष्य उसके सामने दस्तक दे रहा था, तब रेशम को अपने सामने देख उसके दिल में एक अलग सी कामना जाग उठी और उसके चेहरे पर एक भीनी सी मुस्कान चली आई…।
अपनी बाइक में गाँव के बाहर पहुँच कर कुसुम राजेंद्र को इधर उधर ढूँढ रहीं थी कि वो भागता हुआ उस तक पहुँच गया….
राजेंद्र को देखते ही कुसुम बाइक से उतरी और उसके सीने से लग गयी…।
राजेंद्र ने भी उसे खुद में भींच लिया…।
“अब तुम दोनों निकलो यहाँ से ! अब तक वहाँ भौकाल मच गया होगा की दुल्हन भाग गयी है !”
राजेंद्र के दोस्त सरना ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया..
राजेंद्र ने हाँ में गर्दन हिलायी और बाइक स्टार्ट कर ली..
राजेंद्र के पीछे कुसुम बैठ गयी..
राजेंद्र गाड़ी आगे बढ़ाने को था की सरना ने अपनी शर्ट से निकाल कर रुमाल में बंधा एक बंडल उसकी तरफ बढ़ा दिया..
” राजी, ये तुम लोगों के काम आएगा… !”
“अबे यार.. इसका क्या ज़रूरत था…? और इतना रुपया तुम लाये कहाँ से बाबू ?”
“अब वो सब तुम छोडो, फ़िलहाल ये कुसुम को लेकर तुम निकलों यहाँ से.. कहीं इसके लठैत भाई बंधु चले आये ना तो छोड़ेंगे नहीं तुमको… !”
“पहले सच बताओ बे… ये रुपल्ली लाये कहाँ से हो.. !अपना खेती खार बेच तो नहीं दिये ?”
“नहीं.. खेती बाबूजी का निसानी है, कैसे बेच देंगे ? अम्मा बेचने भी नहीं देगी !”
“हम्म, मतलब बैला बेचे हो ?”
“अबे जाओ ना यार… तुम यहाँ काहे टाइम वेस्ट कर रहें… जाओ…!
बाइक बेचे हैं अपना…! हमको काम भी नहीं था, और अब हम खुद ट्रेन पकड़ कर शहर निकल रहे हैं.. !”
राजेंद्र ने बाइक पर बैठे बैठे ही सरना को गले से लगा लिया…
“सरना… अपना ख्याल रखना !”
“तुमको हमसे ज्यादा ज़रूरत है ये दुआ की… जाओ तुम दोनों भी अपना ख्याल रखना !”
राजेंद्र ने गाड़ी आगे बढ़ा दी… और सरना अपने गमछे से अपना चेहरा ढंकते हुए रेलवे स्टेशन की तरफ बढ़ गया…
स्टेशन पर खड़ी कोई गाड़ी छूटने को थी…
वो तेज़ी से गाड़ी की तरफ बढ़ने लगा…
लेकिन गाड़ी स्पीड पकड़ने लगी थी… वो भी दौड़ने लगा.. तभी सबसे पीछे की तरफ के एसी कम्पार्टमेंट का दरवाज़ा खुला और एक मज़बूत हाथ दरवाज़े से बाहर चला आया…
कलाई में बंधे रुद्राक्ष के बीच में सोने का त्रिशूल चमक रहा था..
सरना ने उस हाथ को देखा और उस मज़बूत हथेली को थाम लिया..
किसी ने उसे गाड़ी के अंदर ऐसी आसानी से खींच लिया जैसे वो सत्तर किलो का आदमी नहीं बल्कि दस किलो का कोई बच्चा हो..
अपने तारणहार को सरना ने देखा और देखता रह गया..
ऐसा लगा जैसे साक्षात् महादेव कैलाश पर्वत से उतर आये हो..
साढ़े छैः फ़ीट ऊंचाई के साथ चौड़े कद्दावर कंधे, चौड़ा माथा, और उस पर बिखरी ज़ुल्फ़ें… आधे चेहरे को दाढ़ी ने ढ़ाक रखा था, बावजूद चेहरें की सुंदरता कम नहीं हो रहीं थी..
सरना को खींचने के कारण वो उस अजनबी के सीने से लग गया था..
उस अजनबी ने उसे खुद से दूर किया और धीर गंभीर आवाज़ में बोल पड़ा…
“टिकट है की नहीं ?”
सरना उस अद्भुत युगपुरुष को देखता रह गया…
“मेरे सामने से हटो… मुझे यहीं उतरना है !”
सरना को एक तरफ कर वो एक छलांग लगा कर वहाँ उतर गया…
उसके कंधे पर एक मात्र बैग टंगा था…
इधर उधर नज़र डाल कर उसने एक अंगड़ाई ली, और तेज़ कदमों से स्टेशन से बाहर निकल गया…
सामने ही दूर्वागंज का बोर्ड टंगा था..
दूर्वागंज आपका स्वागत करता है..
उस बोर्ड को देख उसके चेहरे पर मुस्कान चली आयी..
“अनिर्वान भारद्वाज !! दूर्वागंज आपका स्वागत कर रहा है !”
मुस्कुरा कर वो आगे बढ़ गया..
क्रमशः
aparna…

hi
बिलकुल सही कहा सुंदरता के आगे गुण फीके पड़ ही जाते है शायद सुन्दर ना होना एक औरत के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है। बेशक वो कितनी भी गुणी हो।रश्मि और कुसुम दोनों ही बिंदास है। रेशम बड़े भाई पर हुकुम चलाने वाली और बिंदास सिगरेट के कश भरती और धुएं के साथ टेंशन भी कम करती 😃। कुसुम भी दमदार है वरना किसकी इतनी हम्मत जो अपनी शादी से भाग जाए और उसकी बातें एकदम मस्त किरदार 👌🏻👌🏻।कुल मिलाकर दिल जीतने वाला भाग, एकदम मजेदार 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
लाजबाब शुरुआत 😊👌🏻👌🏻👌🏻। बहुत बहुत बधाई आपको एक और नयी कहानी की 💐💐💐। आप लिखती जाए, लिखती जाए और हम पढ़ते जाए, पढ़ते जाए,,, ये सिलसिला यूँ ही चलता जाए 😊।अनिर्वान की एक बार फिर धमाकेदार एंट्री 👏👏👏।शानदार ट्रेलर 👏👏।अब आगे क्या 🤔🤔🤔इंतजार, इंतजार, इंतजार…….
बेहतरीन लेखन डॉ साहिबा 👌👌👌👌
Good going dear
कहानी कहने में आपका कोई हाथ नहीं पकड़ सकता ,going on dear
Nice ji