अपराजिता -13

अपराजिता -13

अपराजिता में फिलहाल 2 कहानियां चल रही है एक रेशम अथर्व और मानव की और दूसरी कुसुम कुमारी और राजेंद्र की! लेकिन यह दोनों ही एक ही समय पर चलती कहानियां नहीं है..
कुसुम कुमारी और राजेंद्र की कहानी फिलहाल भूतकाल में चल रही है इसलिए इस बात को आप पढ़ने वाले पाठक याद रखिएगा…
दोनों ही कहानियों के छोर आगे जाकर एक हो जाएंगे,
और उस समय दोनों ही कहानियां एक ही समय में साथ साथ चलने लगेंगी, लेकिन तब तक दोनों कहानियों में कालांतर है इस बात का विशेष ध्यान रखें…


कुसुम कुमारी फर्राटे से अपनी बाइक चलाती हुई सरकारी अस्पताल की तरफ बढ़ चली..पीछे बैठी भावना बेचैन हो गई..

” क्या यार कुसुम तुम फिर हमें यहाँ लें आई.. ?”

” अपने देवता के दर्शन तो कर लेने दो..!”

“तुम्हारे इन देवता और उनके प्रति तुम्हारी भक्ति के बारे में अगर तुम्हारे चंद्रा भैया को मालूम चल गया ना तुम्हारे साथ साथ हमारा भी गला काट देंगे !”

“बहुत डरपोक हो तुम भावना !”

“हाँ हम डरपोक ही ठीक हैं.. हमें अपने शरीर से अपने जीवन से प्यार है.. !”

“हमसे नहीं है ?”

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