अपराजिता -11

रेशम ने हाँ में गर्दन हिला दी.. अब वो भी अथर्व की बातें सुन कर सामान्य होती जा रहीं थी.. अथर्व जैसा उतावला पार्टी में हो रखा था, उसे लगा था गाड़ी में बैठते ही उस पर टूट पड़ेगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ..।
अथर्व के अंदर तो ढ़ेर सारी बातें भी थी.. और वो उन्हीं में मगन था..।

“हाँ तो वहीं.. वासु मेरा रूम मेट था..।
तुम पर मेरी नज़र देख उसने मुझे कुहनी मारी और छेड़ने लगा.. सबसे पहले उसी ने तुमसे इंट्रो देने कहा था.. तुम धीरे से अपना इंट्रो दे रहीं थी, और मैं तुम्हें देखता खोया हुआ था.. फिर तुमने एक गाना भी सुनाया था.. याद है ?”

रेशम ने धीरे से हाँ कह दिया..

” एक बार वापस सुनाओ ना ? प्लीज़ !”

कहाँ तो रेशम शर्म से गड़ी जा रहीं थी, कि बात करने को मुहँ नहीं फूट रहा और कहाँ अथर्व उससे गाने की फरमाइश कर रहा था..

“गाओ ना रेशम… प्लीज़ !”

रेशन ने धीरे से गला साफ़ किया और उसी गाने को गाने लगी.. जिसे उसने अपने फर्स्ट ईयर की रैगिंग के दौरान गाया था और उसके बाद कॉलेज के यूथ फेस्ट में..

गुनगुनाये हवाएं गुंजी सारी दिशाएं
सपने ही सपने हैं छाये..
तुम आये, तुम आये.. तुम आये..

रेशम गाने में मगन थी कि तभी उसे अपने पैरों पर कुछ महसूस हुआ। उसने झट से देखा, अथर्व की उँगलियाँ उस पर सरक रहीं थी….
उसका गाना बंद हो गया..

“अरे गाओ ना… अच्छा लग रहा था !”..
अथर्व ने उसे छेड़ते हुए कहा.. और रेशम शरम से ना में गर्दन हिला उठी…

“ऐसे शरमा जाती हो ना तो और प्यारी लगती हो… !”

अथर्व ने उसे खींच कर अपने सीने से लगा लिया… रेशम की धड़कन बढ़ गयी…
अथर्व का हाथ रेशम की पीठ पर सरकने लगा, उसकी उँगलियाँ उसे टटोलने लगी…
सांसो में नशा सा घुल रहा था…
रेशम अपनी ही बेकाबू हुई जाती धड़कनो को संभालने की कोशिश में थी… उसकी आंखें बंद थी…
अथर्व की उँगलियाँ रेशम के गले से सरकती नीचे आने लगी…
गले पर थिरकती उसकी उँगलियाँ जैसे ही थोड़ा और नीचे पहुँचने लगी कि अचानक ही रेशम की झिझक घबराहट में बदलने लगी…।
अचानक उसका हाथ अथर्व के हाथ पर रख गया और उसने अथर्व का हाथ झटक दिया..
उसके कान में एकदम से वही आवाज़ कौंध गयी…

“अखंड अगर एक बार किसी पर हाथ रख दे तो वो चीज़ उसकी हो जाती है…
तुम भी सुन लो, अगर मेरी नहीं हुई तो किसी की होने नहीं दूंगा !”

घबराहट के अतिरेक में रेशम की ऑंख खुल गयी…। उसकी धड़कने इतनी बढ़ गयी थी की वो हांफने लगी थी…
हाँफते हुए उसने खुद को अथर्व की बाँहों से अलग कर लिया..।

लेकिन इस पल भर में रेशम के साथ क्या घटा अथर्व जान नहीं पाया..।

उसका रेशम के गर्दन के नीचे पहुँचा हाथ रेशम ने हटा दिया था, लेकिन ये तो पहली बार में बहुत स्वाभाविक हो सकता है..
लड़कियां तो स्वभाव से ही लज्जालु होती ही है.. उन्हें खुलने में वक्त लगता है, यहीं सोच कर अथर्व ने ज्यादा ध्यान नहीं दिया..
यूँ रेशम का दूर होना भी उसे बहुत स्वाभाविक लगा..।

उसने रेशम को छोड़ दिया और उसके चेहरें की रंगत और माथे पर छलक आया पसीना देख मुस्कुराने लगा..

“रेशु यार… अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं, और तुम तो क्लीन बोल्ड हो गयीं.. !”

अब तक रेशम खुद को काफी हद तक संभाल चुकी थी..
उसकी हालत देख अथर्व ने गाड़ी में रखी पानी की बोतल उसकी तरफ बढ़ा दी…

एक घूंट में ढ़ेर सारा पानी पीकर रेशम को राहत सी मिली… ये अचानक उसे क्या हो गया था.. उसकी ज़िंदगी का वो काला अध्याय जिसे वो पूरी तरह भूल कर आगे बढ़ चुकी थी, अचानक आज ऐसे उसके सामने आ जायेगा उसने सोचा नहीं था..।

हालाँकि शादी से पहले एक बार उसके मन में अथर्व को सब बता देने का ख्याल आया तो था लेकिन फिर मानव ने उसे मना कर दिया था….

“देख रेशु… उन चार महीनो की तकलीफ को अगर तू ज़िंदगी भर खुद पर हावी रहने देगी तो कभी जी नहीं पायेगी….
उसे भूल जा… भूल जा मतलब ऐसे भूल जा की जैसे ऐसा कुछ कभी हुआ ही नहीं…
तेरा किसी से कोई लेना देना ही नहीं… “
कितना रो रहीं थी वो उस समय और उसके भाई ने उसे अपने अंक में समेट लिया था…

“पागल बच्चा, ऐसे कोई रोता है भला.. इस सब में तेरी क्या गलती.. ?”

मानव का दोस्त अमित भी वहीँ खड़ा था, उसके पिता कमिश्नर थे और उन्होंने इन सब की बहुत मदद की थी.. अमित ने अपनी जेब से कुछ निकाला और रेशम की तरफ बढ़ा दिया..
उसके हाथ में सिगरेट देख मानव चौंक गया था..

“साले ये क्या दे रहा है तू.. मेरी बहन को !”

अमित भी रेशम से राखी बंधवाता था..

“मेरी भी बहन ही है… रेशु, लें.. आराम से एक फूंक मार और सारा धुआं बाहर उगल दे… और साथ में ये सोचना की अपने अंदर की सारी कड़वाहट सारी तकलीफ भी बाहर उगल दी है.. लें बच्चा… बस आज एक फूँक लें उसके बाद कभी नहीं.. !”

रेशम ने ना में गर्दन हिला दी थी… कुछ देर बाद जब वो दोनों कमरे से बाहर चले गए तब अपनी तकलीफ को कम करने उसने पास में पड़ी वो सिगरेट उठा ली थी..
उसे जला कर उसने मुँह से लगाया और जितनी गालियां उसे आती थी सब देते हुए सारा धुंआ बाहर उगल कर सिगरेट फेंक दी थी…

“क्या हुआ.. ? किस सोच में गुम हो गयी रेशु ?”

अथर्व ने उसे देखते हुए पूछा और गाडी एक जगह वापस रोक दी..
गाड़ी रुकते देख वो घबरा कर अथर्व को देखने लगी…
अथर्व मुस्कुरा कर नीचे उतर गया..
पास खड़े मटके वाले के पास जाकर उसने दो मटका कुल्फी ली और उसके पास चला आया…

रेशम के तरफ के दरवाज़े से टिक कर वो खड़ा हो गया और कुल्फी अंदर रेशम की तरफ बढ़ा दी..
अथर्व अपनी कुल्फी खाने लगा..
क्या है ये आदमी.. ?अभी कुछ देर पहले प्रेम की फुहारों में भीगने और भीगाने को तैयार था और अब अगले ही पल इतना शांत और संयत हो गया जैसे कुछ देर पहले कुछ हुआ ही नहीं…
कहीं अथर्व बुरा तो नहीं मान गए…

उनका हाथ कैसे घृणा से झटका था… उफ़ मैं भी क्या कर जाती हूँ.. जब वो सब भूल चुकी तो अब याद करने का क्या मतलब.. ?
वो सब कुछ मेरी ज़िंदगी के सालों से हट चुका है..।
वो समय वो आदमी, उसकी आवाज़, उसकी आंखें सब कुछ….

एक बार फिर रेशम के शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ गयी….
उसने अपने आप को संभाला और गाड़ी का दरवाज़ा खोल कर बाहर चली आई…
अपनी कुल्फी उसने अथर्व के सामने कर दी..

“क्या हुआ.. ? तुम्हें नहीं पसंद ?”

“पसंद है.. पर चाहती हूँ पहले आप जूठा कर दे.. फिर खा लूंगी.. !”

रेशम अपने किये पर शर्मिंदा थी और वो अथर्व को मना लेना चाहती थी.. ये जानते हुए भी की अथर्व ने शायद उस बात को उतना नोटिस नहीं किया वो अपनी गलती की माफ़ी चाहती थी…।
और इसलिए उसने अपनी कुल्फी उसके सामने रख दी थी..
हालाँकि ऐसा करते हुए वो एक बार फिर अपने संकोच में गड़ गयी…

“ओह्हो क्या बात है…बड़ा प्यार आ रहा अपने पति पर.. !”

अथर्व ने अपना एक हाथ रेशम की कमर पर लपेट कर उसे अपने पास खींच कर अपनी कुल्फी उसके मुँह के पास कर दी…

“जूठा तो तुम्हें करना चाहता हूँ.. पता नहीं कब मौका दोगी तुम… !”

उसके कान के पास जाकर अथर्व ने अपनी होश उड़ा देने वाली आवाज़ में कहा और रेशम के शरीर में करंट सा दौड़ गया…
उफ़ ये आदमी…
हाथ भर मिलाओ तो गला पकड़ लेता है…
लेकिन जो भी हो प्यारा बहुत है…

सुकून से रेशम ने आंखें मूंद ली और उसके माथे को चूम कर अथर्व ने उसे छोड़ दिया…

छोड़ क्यूँ दिया… ऐसे ही अपनी बाँहों में लिए रहना था ना.. कितना सुकून था तुम्हारी बाँहों में, तुम्हारी खुशबू में !
.
रेशम सोच कर मुस्कुरा उठी और अथर्व दूसरी तरफ से घूम कर अपनी सीट पर आ बैठा..

“चलिए मैडम वरना वहाँ आपके घर वाले आपकी गुमशुदगी की रपट लिखा देंगे !”

रेशम के बैठते ही अथर्व ने गाड़ी भगा दी…

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