“कमीने साले कब से गांव पहुंच गया और तूने बताया तक नहीं हमें..!” सामने खड़े लड़के को देखकर राजेंद्र के चेहरे पर भी सूरज जगमगा उठा..
” अबे यार अभी तो आया हूं, बताने का मौका ही नहीं मिला ! वैसे तुम गायब कहां थे? मैं तुम्हारे घर गया था?”
” अरे मामा घर गया हुआ था यार, मामा की बेटी की शादी थी तो बस महीने भर से वही तैयारियों में झूल रहे थे। आज वापस लौटे और बाबा के पास गए तो पता चला तुम आए हुए हो। बस हम सीधे एक छलांग में तुम्हारी डिस्पेंसरी में कूदे..।
यार तुम तो वाकई हमारा नाम रोशन कर दिये ,
तुम तो सच्ची के डॉक्टर बन गए राजी !”
एक गहरी सी साँस लेकर राजेंद्र ने सामने खड़े लड़के को वापस गले से लगा लिया..
“तो तुम क्या सोचें थे सरना… तुम्हारा राजी जो वादा करता है वो निभाता भी है.. ! समझे.. चलो घर चलते हैं.. बड़े दिन बाद मिले हो..
कब से ढंग का खाना नहीं मिला यार! बाबा को अब
ठीक से दिखाई नहीं देता है, इसलिए वह चावल और कंकड़ की खिचड़ी खिलाते हैं..!”
” क्या बात कर रहे हो? जैसे उस दिन से खिचड़ी खा रहे हो..?”
” हां फिर? तुम तो थे नहीं जो लिट्टी चोखा खिलाते..?”
” चलो यार फिर आज जम जाए महफिल… बढ़िया लिट्टी खिलाएंगे तुमको शुद्ध देसी घी में डूबा कर..!”
सरना ने राजेंद्र का हाथ पकड़ा और उसे अपने साथ लेकर निकल गया! कुसुम कुमारी और भावना वही खड़ी रह गई….
” मन में खिलाने की प्रेम भावना होनी चाहिए… जो आदमी कल तक दूध दही घी के नाम पर उल्टी कर रहा था, आज अपने दोस्त के गले में बाहें डाल कर शुद्ध देसी घी में डूबी हुई लिट्टी खाने निकल पड़ा है! देख लीजिए कुसुम कुमारी जी! यह राजेंद्र जी आप से बचने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं बस !”
कुसुम ने घूर कर भावना को देखा और जाते हुए राजेंद्र को देखने लगी..
” कोई बात नहीं भावना डाक साब का भी पाला इस बार कुसुम कुमारी से पड़ा है, इन्हें अपने प्यार में गले तक डूबा नहीं दिया ना तो, हमारा नाम भी कुसुम कुमारी नहीं.. समझी चलो…!”
क्रमशः

Nice story
nice story
Nice ji
madam aap pratilip ko chhot kar aapne site pe likhna chalu kar diya nice
जी ब्लॉग पर काम शुरू जार दिया हैं.. कोशिश हैं सोमवार से कहानियों के भाग ब्लॉग पर देने शुरू कर दूँ..