
अपराजिता….
ये कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है, कहानी में लिखें गए पात्र, घटनाएं, शहर, व्यवस्थाएं आदि पूरी तरह से काल्पनिक है, इनका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से मिलना संयोग मात्र हो सकता है !
कहानी किसी भी तरह के व्यसन जैसे सिगरेट शराब आदि के सेवन का समर्थन नहीं करती !
कहानी सिर्फ मनोरंजन में उद्देश्य से लिखी गयी है…
ऐ अजनबी तू भी कभी आवाज़ दे कहीं से…
छत पर पल भर के लिए आई रेशम के कानों में ये गाना पड़ा और वो कान बंद कर उलटे पैर अंदर चली गयी थी…
आज की रात बहुत कठिन थी.. कल पीएससी का इंटरव्यू था..
ऊपर अपने कमरे में अपनी किताब हाथ में लिए इधर से उधर टहलती रेशम के दिल में धुकधुकी सी मची हुई थी.. पता नहीं कल क्या होगा ?
उसका सारा भविष्य कल के इंटरव्यू पर टिका था..
अभी-अभी उसने अपने मेडिकल की पढ़ाई पूरी की थी, और इत्तेफाक से इंटर्नशिप के दौरान ही पीएससी की पोस्ट निकल आई थी! रिटन एग्जाम उसने क्वालीफाई भी कर लिया था, अब इंटरव्यू बाकी था |
अगर इंटरव्यू भी वह सिलेक्ट हो जाती है तो, वह सीधे सरकारी नौकरी में घुस जाएगी और उसका डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो जाएगा…
लेकिन फिलहाल यह सब उसे बहुत तकलीफ दे रहा था…
दिल दिमाग में ऐसा कोहराम मचा था कि फिलहाल उसे अपने भाई का बड़ी शिद्दत से इंतजार हो रहा था | उसका भाई ही था जो उसे उसके मानसिक कोलाहल से मुक्ति दे सकता था और अब तक वह नदारद था…
रेशम ने इधर से उधर टहलते हुए अपनी दीवार पर लगी घड़ी पर नजर डाली, रात के 8 बज चुके थे, लेकिन अब तक मानव घर नहीं पहुंचा था…|
एक ठंडी सी सांस छोड़ कर रेशम अपने पलंग पर बैठ गई और उसी समय उसे नीचे दरवाजे पर एक के बाद एक दो बार कॉलबेल की आवाज सुनाई दी और उसके चेहरे पर मुस्कान चली आई, उसका भाई मानव ऑफिस से घर आ चुका था….
वह अभी अपने कमरे के दरवाजे की तरफ देख ही रही थी कि, धड़धड़ाते हुए सीढ़ियां चढ़ता हुआ मानव ऊपर आया और उसने दरवाजा खोल दिया…
” क्या यार मानव आज के दिन इतना लेट..?”
” सॉरी यार रेशु , मैं जल्दी निकल रहा था, लेकिन निकलते वक्त ही बॉस ने एक गैरजरूरी बेतहाशा बोरिंग सी मीटिंग रख ली..
और बस उसे अटेंड करने के लिए रुकना पड़ा ! मैं जानता था तू मन ही मन बहुत गालियां दे रही होगी… इसीलिए जब बॉस ने कॉफी मंगाई ना तो मेरा मुंह भी जल गया.. मैं समझ गया गाली दे रही है चुड़ैल !”
” तुझे पता है ना, कल क्या है ? उसके बाद तू इतना टाइम लगा के आएगा तो दिमाग नहीं खराब होगा क्या मेरा ? ऐसे में ही फिर मुहँ से गालियां झरने लगती हैं मेरे, सुट्टा कहीं का ?”
“आराम से मेरी माँ ! ऐसे गलियां देती हैं जैसे मेरी दादी अम्मा है.. धीरे से बोल कहीं नीचे बैठे पंडित जी ने सुन लिया ना तो हर्ट अटैक आ जायेगा उन्हें कि उनकी राजदुलारी कन्या कैसी ज़बान बोलती है ? वो बाप हैं हमारे, उन्हें भी समझ आ जायेगा की तू कुत्ता बोल रहीं सुट्टा नहीं !”
“वो सब छोड़.. तू मेरा सामान लाया है या नहीं ?”
मानव ने अपनी शर्ट की जेब में छिपा रखा सिगरेट का पैकेट निकाल कर रेशम के हाथ में रख दिया…
और उस पैकेट को हाथ में लेकर रेशम के चेहरे पर राहत बरसने लगी..
उसने बड़े आराम से एक सिगरेट हाथ में निकाली और उस पर माचिस मार कर उसे जला ली…
वो बड़े सुकून के डग भरती अपने कमरे से बाहर छत पर निकल आई… छत पर अँधेरा था.. वो बड़े आराम से छत की स्लेब पर पैर झूला कर बैठ गयी..
कमरे के दरवाज़े की चिटकनी चढ़ा कर मानव पैकेट छुपाता बाहर छत पर भागता चला आया..
“जल्दी ख़त्म कर, अभी मम्मी आवाज़ लगाने लगेगी की खाना परोस दिया है… !”
लेकिन अब रेशम को कुछ सुनाई नहीं दे रहा था..
वो बड़े मज़े से छत की रेलिंग पर अपने दोनों पैर मोड़े बैठी कश पर कश लगा रही थी…
धुंए के छल्ले उड़ाती वो आंखें बंद किये खोये हुए थी..
“अबे जल्दी जल्दी फूँक ना ! “
मानव रेशम को देख कर परेशान हो रहा था, उसे डर था कहीं मम्मी या पापा ऊपर ना चले आये.. वो अपने हाथों से मानसी के चेहरे के आसपास छाये धुंए को हटाता भी जा रहा था..
“हे महादेव ये कैसी छोटी बहन दी है मुझे… चार साल छोटी है मुझसे, लेकिन हुकुम ऐसे चलाती है, जैसे मेरी दादी अम्मा हो !”
“सुकून…….
महसूस तो लेने दे ! बकर बकर मत कर !”
“तेरा सुकून ना मेरे जी का जंजाल बना जा रहा है.. उस दिन शाम को मम्मी को मंदिर से लेकर वापस आया, और बाइक अंदर कर ही रहा था की शर्मा अंकल इधर से जाते जाते बम गिरा गए..
क्या बात है मोनू, कल तेरी छत पर रात में धुंआ उठता दिख रहा था… फूंकने तो नहीं लग गया ना तू ?
ये पूछ रहें थे वो मुझसे, वो तो शुक्र है मम्मी उन्हें जेठ मानती हैं इसलिए सर में पल्ला धर अंदर भाग गयी वरना सुन लेती ना तो मेरी जो आरती उतरनी थी बेटा कि क्या बताऊँ ?”
“उतरी तो नहीं ना ! बच तो गया ही.. बस !! चिंता मत कर, मेरा आशीर्वाद जब तक तेरे साथ है तेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता !”
मानव ने गन्दा सा मुहँ बनाया और अपने कान नीचे से आने वाली आवाज़ों पर केंद्रित करने की कोशिश करने लगा..
“ला ज़रा तेरा सुकून टेस्ट कर के देखूं !”
मानव ने हाथ बढ़ाया और रेशम ने उसके हाथ पर झापड़ लगा दिया…
“सोचना भी मत ! इस सिगरेट का टार डामर से भी ज्यादा खतरनाक होता है फेफड़ों के लिए ! इसलिए इससे तेरी दूरी ही भली !”
“तो मेरी माँ, तू क्यों फूंकती है अपना कलेजा ?”
“मैं कौन सा रोज़ पीती हूँ ? ये तो बस स्ट्रेस रिलीज़ करने के लिए है…
अभी देख एक सिगरेट बस में मैंने अपना सारा इंटरव्यू दिमाग में सेट कर लिया है, की मुझे कौन से सवाल का कैसा जवाब देना है ?”
“बेटे वो तो वहीं लोग तय करेंगे की सवाल क्या पूछने है ?”
“तू बुद्धू का बुद्धू ही रहेगा मानव ! एक परफेक्ट अप्लीकेंट वो होता है जो इंटरव्यू को अपने हिसाब से मोड़ लेता है.. इंटरव्यूवर पहला सवाल ज़रूर खुद से करते है लेकिन जवाब देने वाला उसे इस ढंग से मोड़ लेता है कि अपने जवाब में ही अपना अगला सवाल सामने वाले के सामने पेश कर देता है और सामने बैठा साक्षात्कार लेने वाला आदमी उस सवाल को पूछने के लिए मजबूर हो जाता है! और इस तरह से एप्लीकेंट अपने मन मुताबिक अपना इंटरव्यू कंडक्ट करवाता है, समझे !!
और तुम जानते हो कि मेरा दिमाग कैसा है ? इस सब में इंटरव्यू लेने वालों को जरूर यह लगता है कि, वह बहुत टफ इंटरव्यू ले रहे हैं लेकिन, उन्हें नहीं पता होता कि उनके दिमाग से सामने बैठा बंदा उनके दिमाग से खेल रहा होता है ! तो बस वही खेल मुझे भी खेलना है…!”
“यार तू भी ना रेशू … अपने दिमाग का बहुत ऊलजलूल यूज़ करती है.. ! पता नहीं डॉक्टरी कैसे करेगी ?”
“बस ऐसे ही ऊलजलूल तरीको से !”
.और वो ज़ोर से हॅंस पड़ी..
उसके हाथ से सिगरेट का आखिरी टुकड़ा छीन कर मानव ने उसे जल्दी से अपने पैरों से बुझाया और उसे उठा कर ठिकाने लगाने चला गया..
कुछ देर बाद दोनों भाई बहन नीचे खाने की टेबल पर अपने माता पिता के साथ बैठे खाना खा रहें थे….
“कल की तैयारी कैसी है रेशू ?”
“फर्स्ट क्लास पापा ! “
“गुड… बेटा किसी सवाल पर घबराना मत, जो ना आये उसके गलत जवाब देने से अच्छा है, माफ़ी मांग कर अगला सवाल पूछने की रिक्वेस्ट कर देना.. !”
रेशम ने शराफत से हाँ में सर हिला दिया…
और मानव को उसे देख हंसी आ गयी.. अपनी बहन के तेज़ तंदुरुस्त दिमाग से वो भली भांति परिचित था..
किताबें रट घोंट लेना उसके लिए उसके दाएं हाथ का खेल था..
बस दिल की ही ज़रा सी कमज़ोर थी वो !
उसे असल में पढाई करने में बहुत मज़ा आता था.. उसके लिए पढाई किसी मज़ेदार खेल से कम नहीं थी.. और वो खुद इस बात को जानती थी कि वो विलक्षण प्रतिभा की धनी थी…
उसके पिता उसे ख़ूब सारी बातें समझते बैठे रहें और वो चुपचाप अच्छी बच्ची बनी सब सुनती बैठी रहीं…
रेशम ने एक बार सामने बैठे अपने भाई की तरफ देखा और अपनी सब्जी की कटोरी उठा कर उसके सामने बढ़ा दी..
“तू ही खा ये कटहल ! मम्मी रोज़ रोज़ अपने लाड़ले की पसंद का ही खाना बनाती है.. हुंह !!”
रेशम ने पूरी कटोरी मानव की थाली में रख दी और उसकी इस बात पर उसकी माँ जवाब देने लगी..
“सुबह नाश्ते में तेरी पसंद का पोहा बनाया तो था.. दोपहर में लंच में भी कढ़ी और कोफ्ता बना था.. हर वक्त तो तेरे हिसाब से बनाती हूँ… बेचारा मेरा मोनू तो सब कुछ बिना हील हुज्जत के खा लेता है.. तेरे ही नखरे है बस…
बथुआ नहीं खाना, कटहल नहीं खाना, सुरन देख कर उबकाई आती है, अरबी खाने से मुहँ में खुजली होती है.. उफ़ तू और तेरे नखरे !
तेरी ससुराल में देखूंगी महारानी जी का नखरा !”
मजाक में उसकी माँ ने उसे टोका और उसकी थाली में एक रोटी और डाल दी..
“बस मम्मी इतना खाना खाउंगी तो कल वहाँ इंटरव्यू देने की जगह सो जाउंगी.. !”
और उसने रोटी भी उठा कर मानव की थाली में पटक दी.. और सिंक में हाथ धोकर ऊपर चली गयी..
खाना खा कर मानव ने टेबल पर पड़ी अपनी बहन और अपनी थाली समेट कर सिंक में रखी और वापस ऊपर अपने कमरे में चला गया…
*****
इस सब से दूर दूर्वागंज के एक मुहल्ले में एक घर बिल्कुल दुल्हन की तरह सजा था…
दुलहन अपने कमरे में बैठी तैयार हो रहीं थी..
उसकी सहेलियां, बहने उसे छेड़ रहीं थी और वो सबकी बात पर मुस्कुरा भर दे रहीं थी..
कुछ देर में उसने अपनी एक सहेली की तरफ देखा और उसे अपने पास बुला लिया..
“ऐ डिंकी सुनो.. हमारे लिए कुछ खाने का तो ले आओ.. बहुत भूख लग रहीं है.. !”
“हाँ हम तुम्हारी अम्मा से पूछ कर कुछ फल या जूस लें आते हैं, क्यूंकि कुसुम हमें लगता है आज तुम्हें उपवास रखना होगा.. !”
“अरे यार.. हम पहले ही अम्मा से बोले थे कि ये उपवास वुपवास हमसे नहीं होता। पर अम्मा हमारी सुने तब ना ! रहने दो फिर, हमसे कंदमूल भी नहीं खाएं जाते.. !”
“कुसुम.. ये तुम लहंगा के नीचे स्पोर्ट्स शूज़ काहे पहनी हो.. ?”
“आजकल फैशन है… देखी नहीं हो क्या… पिस्ताग्राम में हर एक दुल्हन ऐसे ही लहंगा के नीचे बूट्स पहन कर स्टेज पर आ रहीं है.. !”
“तुम और तुम्हारा फैशन !”
उसी समय बारात आ गयी का शोरगुल मचा और कुसुम की सखियाँ दूल्हा बाबू को देखने बेकरार हो उठी..
“कुसुम.. हम लोग दूल्हा बाबू को देख आये?”
“देखने भर से क्या होगा, तुम चूम के आ जाओ !”
“छी बेसरम ! कुछ भी बोल देती हो ! सच्ची बताओ, जाएँ ?”
कुसुम ने पलकें झपक कर हाँ में गर्दन हिला दी…
उसकी दोनों सहेलियां छत पर निकल गयी.. और कमरे में कुसुम और उसके बड़े भाई की पांच साल की बेटी बस रह गयी..
कुसुम फटाफट अपनी जगह से उठी…
उसने सबसे पहले अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और अपना लहंगा उतारने लगी, लहंगे के नीचे उसने जींस पहन रखी थी…
अपने सर से चुन्नी उतार कर उसने नीचे रखी और अलमारी से निकाल कर एक लम्बा सा ओवरकोट ऊपर से डाल लिया…
एक छोटी सी कैप से अपने जुड़े और गजरे को ढंकने के बाद उसने अलमारी में रखा एक बैग निकाला…
अपने लहंगे और चुन्नी को उस बैग में डाल कर उसने फटाफट ज़िप लगायी, और अपना मोबाइल, लॉकर से कुछ पैसे लेकर उस बैग को अपनी पीठ पर लाद कर कमरे के पिछले दरवाज़े की तरफ बढ़ गयी..
“फुआ…. कहाँ जा रहीं हो.. ?”
पांच साल की गिट्टू ने प्यार से उसे पुकारा और वो वापस पलट कर उसके पास चली आयी..
“हम जा रहें अपनी लाइफ की सबसे मनोरंजक जर्नी में गिट्टू रानी.. ! हमारे और तुम्हारे पापा ने चाहा तो एक दिन तुम्हारे फूफा जी के साथ वापस आएंगे.. !”
गिट्टू को प्यार से चूम कर पिछले दरवाज़े को खोल वो पिछली तरफ की सीढियों से घर के दालान में उतर गयी..
पीछे का आंगन सूना पड़ा था..
वहीं से पिछला दरवाज़ा खोल वो बाहर निकली और वहाँ पहले से खड़ी बाइक पर चाबी घूमा का उसने एक झटके में बाइक आगे बढ़ा दी…
ढ़ेर सारा धुंआ उगलती बाइक कुछ पलों में हवा से बातें करने लगी…
क्रमशः

वाह ! मेम कमाल हो गया । आपकी कहानी अपराजिता ढूंढली। शुरू से पढना है इसलिए पहले इस कहानी को पुरा पढती । मायानगरी, जीवनसाथी ये कहानी भी ढुढलुगी। अब पहले अपराजिता पढलु। बहुत मुश्किल से अनकही किस्से को बार-बार हर बार chrome किया तब मिला इसलिए पहले इस कहानी को पुरा पढती । आपको धन्यवाद 💙 💙 💙 💙 💙 💜 💜 💜 💜 💜 💚 💚 💚 💚 💚 💛 💛 💛 💛 💛 💖 💖 💖 💖 💖 😎 😎 😎 😎 😎 👍 👍 👍 👍 👍 👍 👍 👍
अब जुड़ गया आंकर अपराजिता का पहला भाग सिलसिलेवार ….बढ़िया है ,पढ़ने की उत्सुकता में बस हाजिरी लगाकर आगे बद्व रही हूँ
Ye part to tb ka h jb kusum ki shadi ho rhi thi. Ye old part post ho gya h
Ye to 137 part h hi nhi pehle ka part post ho gya h ye to😒
मुख्य पृष्ठ पर आइये वहाँ आपको part 137 मिल जायेगा
????????
Mam yeh to 2nd part hai link mai to 137th part likha tha😔
Kal bhi 136th part double post ho gaya…. Kya karan hai
अभी चैनल पर फिर से लिंक भेजी है.. देख लीजिये
गई थी पहला भाग पढ़ने, जाने कौन सा भाग पढ़ आई, लेकिन मजा आ गया.. रोज दो तीन भाग पढ़कर आपको जल्दी से टच कर लूँगी🥰🥰🥰🥰🥰
आज से पड़ना शुरु किया कितना सुकून मिला आप मिल गई
नही तो ऐसा लग रहा था जैसे आप छूट गई थैंक्यू
Nice starting
डॉ साहिबा सिगरेट से स्ट्रेस रिलीज होती है क्या
कही आप भी…….. hoooooo
दुल्हन फरार हो गई अब दूल्हे का क्या होगा देखते है आगे
अभी कहानी पढ़नी शुरू की है देखते है कहा ले जाएगी आपकी अपराजिता
nice start
nice