अपराजिता -11
रेशम को साथ लिए अथर्व निकल गया... जाने आगे क्या होगा सोच कर रेशम के मन में घबराहट सी थी लेकिन अथर्व खुद में मगन था..
वो बस इसी बात पर बहुत खुश था कि रेशम उसके साथ थी.. वो उससे बातें करने में लगा था..।
“जानती हो रेशम तुम्हें मैंने पहली बार कब देखा था..?”
रेशम अथर्व के सवाल पर उसे देखने लगी..
“तुम्हारी जी आर में ! तुम जब फर्स्ट ईयर में आई, मैं फाइनल में पहुँच चुका था, फाइनल में वैसे भी इतनी पढाई होती है कि और कहीं ध्यान जाता ही नहीं..।
पर जीआर तो नियम है निभाना ही पड़ता है.. वैसे भी जीआर में सारे सीनियर्स इकठ्ठा करने का लॉजिक यहीं होता है कि जूनियर्स सीनियर्स मिल लें..।
वैसे भी साल भर रैगिंग दे देकर जूनियर भी थक चुके रहते हैं। लेकिन फर्स्ट ईयर वालों को वेलकम मिलने वाला होता है, इसलिए वो भी सारे सीनियर्स को एक साथ झेलने तैयार हो जाते हैं..।
मतलब की तुम्हारे कॉलेज में आने के साल भर बाद देखा था तुम्हें..।
और जब तुम सारे जूनियर्स एक साथ हम फाइनल वालों के सामने आकर सर झुका कर खड़े हुए ना, सच में मेरी नज़र तुम पर अटक गयी थी..
मेरा दोस्त वासु याद है तुम्हें ? तेलुगु था ?”
