मैं खुशबू से भरी हवा हूँ
मै बहता जिद्दी झरना हूँ
कठिन आंच मे तप के बना जो
मै ऐसा सुन्दर गहना हूँ ।।
छोटा दिखता आसमान भी,
मेरे हौसलों की उड़ान पे,
रातें भी जो बुनना चाहे,
मैं ऐसा न्यारा सपना हूँ ।।
हरा गुलाबी नीला पीला
मुझसे हर एक रंग सजा है,
इन्द्रधनुष भी फीका लगता
प्रकृति की ऐसी रचना हूं ।।
मैं हूँ पत्नी ,मै हूँ प्रेयसी
मै हूँ बेटी, मै ही बहू भी,
तुझको जीवन देने वाली
मै ही माँ,मै ही बहना हूं ।।
मैं हूँ मीठी धूप सुहानी,
मैं ही भीगी सी बयार भी,
मुझमें डूब के सब कुछ पा ले,
मै ऐसा अमृत झरना हूं ।।।
अपर्णा ।
ओ स्त्री: कभी खुद को भी जिया करो……..
जल्द आ रही है, मेरे ब्लॉग पर !!

Ma’am kch to post kr do, kisi b story ka part, apki sari stories achi lgti h, aur kch nhi to shadi.com ka hi next part kr do upload..
Yeah sure
Nice❤
अति सुन्दर
Beautiful lines..😍❤️
अति सुन्दर।
Last lines me ओ स्त्री… कल आना। मुझे ये याद आ गया।
जी कुछ उसी तर्ज पर है जो लिखने वाली हूँ
Apki to har rachna ka swag se swagat h mam.
बहुत ही सुंदर रचना। इंतजार रहेगा mam
Waiting 👍👍
Bahut sundar