अपराजिता -165
अपराजिता -165 अखंड के चुनाव लड़ने और जीत जाने के बाद यज्ञ पर काम का भार और भी ज्यादा बढ़ गया था.. अब अपने सारे व्यापार का जोड़ घटाव अकेले उस पर आ चुका था… कहाँ किससे ज़मीन ली, …
अपराजिता -164
अपराजिता -164 वक्त की ये खास बात हैं कि वक्त बीतने में वक्त नहीं लगता.. वक्त अच्छा हो या बुरा हो बीत ही जाता है ! ये और बात हैं की अच्छे वक्त को हम नहीं चाहते की …
अपराजिता -163
अपराजिता -163 राजेंद्र जल्दी वापस आता हूं कह कर अपने दोस्त अमित के घर के लिए निकल गया.. भावना भी बड़े मन से रात के खाने की तैयारी में जुट गई। गेंदा और उसने बहुत प्यार से खाना बनाया …
अपराजिता -162
अपराजिता -162 उस रोज कुसुम और भावना की बातों के बीच जैसे वह दो खोई हुई पुरानी सखियां एक बार फिर से मिल गई थी! वही अल्हड़पन, वही बचपन के दिन जैसे वापस जी उठे थे दोनों!वह दोनो …
अपराजिता -161
अपराजिता -161 "अब तुम ही बताओ क्या किसी इंसान को दो बार प्यार हो सकता है ?" "हाँ हो सकता है !" भावना ने अपनी बात ख़त्म की ही थी कि, उसकी बात के बाद एक आवाज़ हवा में …
अपराजिता -160
अपराजिता -160 ये गयी नहीं अब तक ? वो सोच ही रहा था कि उसकी अम्मा ने उसे देख लिया और वहीँ से आवाज़ लगा दी.. "रे अखंड.. इधर आजा बेटा ! कहाँ चला गया था तू शाम से …
अपराजिता -159
अपराजिता -159 रेशम पैकिंग करने के बाद आलस करती हुई माँ की गोद में सर रखे लेटी उनसे बातें करते हुए सो गयी.. उसे खुद मालूम नहीं चला कि कब वो गहरी नींद के आगोश में चली गयी…. शाम …
अपराजिता -158
अपराजिता -158 आज जब रेशम अपनी पैकिंग कर रही थी तब मानसी से बातें भी करती जा रही थी..मानसी की अलग तैयारियां चल रही थी और वो अपनी हर तैयारी रेशम को भी बताती चलती थी..उसका अपना शादी का …
अपराजिता -157
अपराजिता -157 उधर अपार्टमेंट की लिफ़्ट में चढ़ कर मानसी भी यही सोच रही थी.. "कैसी अजीब बात है.. ना मैंने उस का नाम पूछा ना उसने मेरा.. खैर ठीक भी है.. जब अब कभी मिलना ही नहीं तो …
अपराजिता -156
अपराजिता -156 भोर का सूरज उग रहा था, आसमान नारंगी हुआ जा रहा था.. पंछी अपने ठिकानो से निकल कर कोलाहल मचाते काम पर जाने लगे थे..गांव के लोगो की दिनचर्या भी शुरू हो चुकी थी… कुछ औरतें …

Jivansathi 3 ka 104 ,bhag kub aayaga,Mayanagri ke next part kub aayanga.please reply Dr Sahiba ji.
Mam next part kab aayega.waiting
आप को अपराजिता की बेहतरीन लेखनी के लिए बधाई में प्रतिलिपि पर आपकी कहानियों को पढ़ता था फिर आप ने मजबूरीवश वहाँ लिखना बंद कर दिया फिर आपने बताया कि आपको गूगल पर भी पढ़ा जा सकता है आशा है आगे भी आपकी कलम से बेहतरीन कहानियां पढ़ने को मिलेगी धन्यवाद आभार
😑 जीवनसाथी के पार्ट 29 मई से ही रुका हुआ है सिर्फ इसी के पार्ट आ रहे next part कब आएगा जीवनसाथी का
हम अपराजिता नही पढ़ते 🤷🏻♀️
अपरिजिता पढ़ें बहुत ही अच्छी कहानी है
Kaha gayab ho gaye
Mam next part kab aayega
Apne isme bhi likhna band kr Diya h kya
👌👌👌
अपराजिता
Hmm 🤔😼 thodi rol bdol ho rhi hai mam phr b nice part